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Thursday, July 29, 2010

सावन आया झुम के

आपने घर में घुसे पानी को बाल्टी से बाहर निकालते हुए
              आज सावन मास के दूसरे दिन इन्द्र भगवान बगड़ नगरी पर ऐसे मेहरबान हुए कि बगड़ की सड़को गलियों को पानी से सराबोर कर दिया
                                                    
एक तरफ लोगों ने नहाते हुए इसका लुप्त उठाया दूसरी तरफ कुछ लोगों के घर पानी घुस गया तो उन्होंने बाल्टी लेकर अपने घरों से पानी निकाला  नगरपालिका नालियों की अव्यवस्था के कारण वो लोग सावन की बारिश का मजा लेने की बजाय परेशानी का बोझा उठाना पड़। क्योंकि इस इलाके का नालिया कम गहरी तथा कम चोड़ी है जिसे बारिश के वेग का परनी एक साथ इनसे नहीं निकल पाता है। पानी सड़क पर जमा हो जाता है। साथ ही ये नालिया जगह जगह से टूटी फूटी हुई भी है।।  एक तरफ और बरसने की नहाते हुए खुशिया मनाई जा रही है और एक तरफ प्रभु से विनती है कि प्रभु अब तो रोको नहीं तो हमारे घर डूब जायेंगे। यह हाल है बगड़ नगर के पीरामल गेट इलाका का जहां  पर मेरी दुकान है।
              मेरी दुकान एक ऊँचे स्थान पर होने के कारण मैं वहा बैठकर बारिश के साथ इन सब का लुप्त उठा रहा था और तभी इन सभी गतिविधियों की फोटो खिचने का मन बन गया तो फोटो खिंच ली ताकि आप लोगों के साथ अपने यहाँ की बारिश शेयर कर सकूं। एक तरफ जैसा की फोटो मे दिखाया है बुढे लोग तक बारिश में भाव विभोर होकर नहाने के लिए आतुर हो गये वहीं बच्चे जवान सभी ने इस सावन मास की बारिश का बहुत ही मजा उठाया मेरा भी मन नहाने को किया लेकिन क्या करता मेरे पास दुकान पर दूसरे कपड़े नहीं थे और न ही तोलिया वग़ैरह ...
बीच रोड़ पर खड़े होकर नहाते हुए नागरिक
इस बारिश में लगभग  2-3 फिट तक पानी भर गया था बारिश रुकने के 1 घंटे बाद तक पानी जमा रहा फिर कहीं जाकर आगे नालियों में होकर बाहर निकल सका । यह मै। आपको कल ही शेयर करने वाला था लेकिन क्या करता बारिश के बाद काफी समय तक बिजली रानी गुल रही तो नहीं कर सका अब प्रातः आकर यह करना पड़ा




बरसात का नहाते हुए आनन्द उठाते हुए विश्वम्भर लाल जांगिड़
अपनी साईकिल पर नहाते हुए एक व्यक्ति
वास्तव में कल की बारिश में बहुत ही आनन्द आया

लगभग 2-3 फिट सड़क के किनारे भरा पानी

Sunday, July 25, 2010

पळका

एक शिष्ट  राजस्थानी गीत पळका

              मैने पहले भी राजस्थानी  कवि कैलाश जी मण्ड्रेला की  कविता तैने कुण  कहवै री काळी, आपके समक्ष पैश कर चूका हूं ,और आज उनकी ही एक कविता जो अबौध प्यार पर निर्भर है ‘‘पळको’’
एक 12 -13 साल का लड़का  और एक 12-13 साल की लड़की दोनों के आमने सामने घर लड़का अपने घर की छत पर चढ़कर लड़की के घर  काच के चलके पटकता  चलके के पड़ने  से जो पळका पड़ता उस पर कवि ने यह गीत लिखा है कांच के चलके से जो रीफ्लैक्शन पड़ता है उसे पळका कहते है।
          लड़की समझती कि चलके का मतलब क्या और न लड़का समझता कि चलके का सही मतलब क्या? पर मजा दोनों को ही आ रहा । लड़की परेशान होकर कहती है उस क्षण को कवि मण्ड्रेला जी  ने अपनी लेखनी में बांधा है।
       यह एक अबोध प्यार (इनोसेंट लव) कैसे होता है वही बताने का पूर्ण प्रयास किया है कवि ने।
और जब अंत में लड़की अपनी सहेलियों को चलके का सही मतलब पुछती है तो कवि ने अंतिम 5 नम्बर के मुखड़े में लिखा कि लड़की क्या कहती है? और इसको कवि ने अनुप्रसा अलंकार के साथ पैश किया है। जो बहुत ही अच्छा लगा। जिसके लिए मैं राजस्थानी कवि डॉ. कैलाश जी मण्ड्रेला को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहुगा। अगर आपको भी कविता अच्छी लगे तो मण्ड्रेला जी को धन्यवाद देना।
इस कविता में कवि ने लय स्वर के साथ अनुप्रास अलंकार का सटीक प्रयोग किया जिसे आप देख सकते है।
जैसे (चाचा ने चाची को चांदनी चोक में चांदी की चम्मच से चाट चटाई की तरह ही अनुप्रास अंलकार का बहुत सुन्दर प्रयोग )


1 डागळा री डोळी पाछे छाने छाने छुप छुप,
मत पटके रै चलका काच का
आख्या में म्हारे पळका पड़े रै म्हारे पळका पड़े।

2 खोड्या र् करतो मचक मचक कर
नीत बिगाड़ों नचक नचक कर
डोळया र् चढ़तो उचक उचक कर,
अर माजणा सूं मानजा जै खैवूं हूं
नितर थारी गत बिगड़े छोरा कळी बिगड़ैं
मत पटके रै चलका काच का
आख्या में म्हारे पळका पड़े रै म्हारे पळका पड़े।
3 दांतला रै दूर सूं तूं मत कर हांसी,
नितर म्होरो भाई थ्हारा रूग्च्यां उडा सी
थ्हारा काच में ही थ्हारो थौबड़ो दिखा सी,
और कुतरे रो जो पड़ग्यो उबा मौरा में गडे
तो थ्होरो चामड़ों सडे, छौरा चामड़ों सडे,
हे मत पटके रै चलका काच का
आख्या में म्हारे पळका पड़े, रै म्हारे पळका पड़े।

4 मान अणूता मत सळगावे लखणा बिगाड़ो लखण बतावै
तिजोरी का उंदरा ज्यूं ताक लगावै
तो काच री आंच सै वा औट कर चानणी पै भागी आऊ
जिसूं म्हारी जीजी लड़े लड़े रे म्हारी जीजी लड़े,
मत पटके रै चलका काच का
आख्या में म्हारे पळका पड़े रै म्हारे पळका पड़े।
5 चलका री चक मक सूं चकराई
साथणा नै गौरी जद बात बताई
आखीर में बात समझ में आई
तो
चोरडा़ जी चलका सूं  चोरी चोरी चोर लियो
चांद चुप-चाप म्हारी चूनड़ी उडै रे, छोरा चूनड़ी उडै
देखता ही देखता यो तेरो फिको तीर म्हारे सळया गडै रै म्हारे सळया गडै
मत पटके रै चलका काच का
आख्या में म्हारे पळका पड़े रै म्हारे पळका पड़े।




कठिन शब्दों के अर्थ

डागळा री डोळी   - छत की (मडीरी) दीवार
छाने -छाने         - छुप छुप कर
पटके                - गिराना
चलका            - कांच का धुप में डाला गया प्रतिबिंम्ब
पळका            - चलके के डाले जाने पर जो रिफ्लेक्सन होता है वही पळका
खोड्या            - शैतानी
मचक मचक   - कंधे उचकाते हुए मन खुश करते हुए।
नीत बिगाड़ो    - आदत बिगाड़ना
माजणा           - इज्जत से
खैवूं                 - कहती हूं।
नीतर               - नहीं तो
थारी                - तुम्हारी
गल\कळी        - हालत
आख्यां            - आंख में
दांतला             - बडै दांतों वाला
रूग्च्यां             - रूंग उडाना \बाल उडाना, पिटाई करना
थ्हारो               - तुम्हारो
थौबड़ो              - मुंह
उबा                  -  सिधा खड़ा
चामड़ो              - चमड़ी
उंदरा                 - चूहा
गडै़                    - चुभना
सळया               - सुली की तरह
अगर और कोई ‘शब्द समझ में नहीं आये तो ट्टिपणी द्वारा पुछ सकते है।

Tuesday, July 20, 2010

चित्रकारी और शिल्प कला,का बेजोड़ नमूना बगड़ का मोती महल

बगड़ कस्बा जिसका जिक्र मैं अपनी एक पोस्ट में पहले भी कर चुका हूं  यह कस्बा हमारे जिला मुख्यालय झुन्झुनूं से 15 कि.मी दूर स्थित है।इसके बारे में विस्तृत पढ़ने के लिए मेरी पोस्ट बगड़ एक नजर में  पढ़े। अब तो मैं आपको बगड़ की एक विशाल धरोहर जो (इतिहासकारों के अनुसार) वि.स. 1840 में  शार्दूल सिंह  के पड़पोते मालिक सिंह (महा सिंह) बगड़ आये और उन्होंने गढ़ का निर्माण करवाया था।  अब यह महल नबाब अलि खां के महल (मोती महल) नाम से जाना जाता है।
नरेश सिंह राठौड़ जो महल के नजदीक ही रहते है इनके द्वारा मिली टिप्पणी जानकारी के अनुसार यह महल 
‘‘ नरहड के नवाब मोहन खां ने बनवाया था| यह १९४७ तक उनके कब्जे में रहा बाद में यह लावारिस होने की वजह से कस्टोडियन ने नीलाम किया जिसे सेठ मोती 
लाल जी ने खरीद लिया और इसे एक चैरीटेबल ट्रस्ट
के अधीन धर्मशाला के तौर पर रखा है लेकिन अब इसकी देख रेख करने वाला कोइ नहीं है | आज केवल पोलियो बूथ या चुनाव मतदान केन्द्र बनाने के अलावा इसका कोइ उपयोग नहीं है |’’
इसमें उस समय के चित्रकारी के बेजोड़ नमूने है। जो अभी तक स्पष्ट देखने को मिलते है। जो आपको फोटो में दिखाये गये है। यह महल दो मंजिला भवन है। इसमें घोड़ों की घुड़साल,रसोई खाना,महिला विश्राम गृह (जनाना महल), सभा गृह आदि बने हुए है और उनकी दीवारों पर बहुत ही सुन्दर व कलात्मक चित्रकारी की गई है जो अपने आप में एक अनूठी
मिसाल कायम करती है। और उस समय के चित्रकारों, शिल्पकारों,कारीगरों की याद दिलाती है। आज के कारीगर के लिए यह सब कुछ कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है और करता भी है तो बिना
मशिनरी  की सहायता से नहीं कर पाता और इतनी सुन्दरता नहीं दिखा सकता है।     इस कलाकारी को देखकर मेरा मन उस समय के कारीगरों को सलाम करने को करता है। 
यही विशाल धरोहर लगभग 2 बीघा जमीन पर फैली हुई है। और इसका निर्माण (चिनाई ) पत्थर और चुने से की गई है इसकी दीवारे लगभग 2-2.5 फिट तक चोड़ी हैं इसमें उपर तक पत्थरो तक चिनाई की गई

है।इतनी मजबूत दीवारे और इतनी सुन्दर कलात्मक चित्रकारी जो आज भी इनकी दीवारों पर स्पष्ट देखने को मिलती है
इस महल का सभा गृह जो दूसरी मंजिल पर बना हुआ है। जहां बैठ कर सभा की जाती थी उस कमरे में  उपर एक बड़ा  गाटर काठ की लकड़ी का (शहतीर) साल की लकड़ी का बना हुआ लगा है जिस पर इतनी बारिक व सुन्दर खुदाई करके कलाकारी की गई है

जिसे देखकर कोई भी व्यक्ति अचंभित रह सकता है। इतने वषों के बाद भी यह ज्यों का ज्यों  पड़ा कोई टूट -फूट नहीं है। इसको आज तक कोई दीमक किड़े 
वगैरह भी नहीं लगे है। इतने वर्षो और बिना सार सम्हाल के बाद भी यह शहतीर ज्यों का त्यों पड़ा है कमाल की बात हैं उस समय की लकड़ी की और उस समय के कारीगरों की । 
 दीवारों पर की गई उस समय की चित्रकारी आज भी मन को लुभाना नहीं भूलती है।
 ( चित्रों को बड़ा देखने के लिए उन पर डबल क्लिक करें।)
 इस लकड़ी पर इतनी बारीक कढ़ाई खोदकर निकाली गई जिसको देखकर अचंभित होना पड़ता है। और आज तक यह लकड़ी बिना टूटे बिना दीमक आदि लगे ज्यों की त्यों है।
 परन्तु अब इस महल की दिवारें गिरने लगी है वो बिना किसी की देखभाल के कारण अगर इसकी देखभाल नहीं की गई तो कुछ समय में यह सिर्फ एक कचरे या मलबे का ढेर बनकर रह जायेगा।  अगर आज भी इसको कोई हेरिटेज होटल या हॉस्पीटल के काम में लिये जाये तो यह इस महल के लिए बड़ा सौभग्य और बगड़ की जनता तथा सैलानियों को लुभा ने के लिए एक अनूठी चिज होगी।
   

यह जिम्मा नगरपालिका को लेना चाहिए ताकि इस भवन की देखभाल हो सके और लोगों के लिए यह प्राचीन धरोहर एक ऐतिहासिक धरोहर बन कर रह सके।
   
                  
  इस महल में नीचे एक कमरे में एक गुफा का भी जिक्र सुना जाता है जो कोई तो बताता है कि यह गुफा नरहड़ पीर साहब तक जाती है कोई बगड़ के बाहर तक जाती बताते है परन्तु इसके बारे में कोई पुष्टि नहीं हो पाई है हालांकि मैने इस गुफा के मुख्य द्वार से फोटो जरूर लिये है लेकिन अब बहुत ज्यादा पुरानी होने के कारण इसमें जाने का साहस नहीं कर पाया। 

आज यह महल अपनी बेबसी और जीर्ण - शीर्ण हालात पर खड़ा रो रहा है। इनकी देखभाल न तो नगर
पालिका कर पा रही  और नही कोई और...
    मेरा तो यही कहना है क हमें हमारी प्राचीन धरोहरों को रख रखाव करके रखना चाहिए  और इसके ज्यादा मैं आपको इसके बारे में न लिखकर इसकी फोटो ही दिखाना ज्यादा पंसद करूंगा उन्हें देखकर आप ही बतायें कि ...

Thursday, July 8, 2010

इन दिनों रिज़ल्ट की साइट बन रही है औपरेटिंग सिस्टम और यूजर की जान का फंदा

Indiaresults.comखुली साइट और वाइरस की सूचन

 इन दिनों रिज़ल्ट की साइट बन रही है औपरेटिंग सिस्टम और यूजर की जान का फंदा

आजकल वैसे ही भरमार चल रही है रिज़ल्टस की एक आप बीती कहानी मेरी ज़बानी
जी हां सावधान! अगर आप के कम्प्यूटर में कोई अपडेटेड एन्टी वाइरस नहीं है तो आप
वाइरस की सुचना देता एण्टी वाइरस
इंडिया रिज़ल्ट.कॉम की साइट न खोले क्योंकि इन दिनों इस साइट पर वाइरसो की भरमार है और खोले तो अपनी रिश्क पर। मैं तो इसका भुगत भोगी बन चुका हूं कम से कम आपको तो सुचित करके बचाना चाहता हूं। भाई नरेश सिंह जी ने अपने ब्लॉग पर इस साईट प्रशंसा बहुत की थी कि यह रिजेल्ट के लिए सबसे बढ़िया साइट है। परन्तु उन्हें भी क्या पता था कि यही साइट उनके लिए भी परेशानी पैदा कर सकती है। जी हां उनको भी इस साइट के वाईरसो की मार सहनी पड़ी और अपना औपरेटिंग सिस्टम दुबारा फारमेट करके लोड करना पड़ा वो भी दो बार बेचारे क्या करते  रिज़ल्ट देखने के लिए इस साइट को खोलना भी अनिवार्य हो जाता है। क्योंकि आजकल रिजेल्टस की भरमार चल रही है। और ज्यादा तर रिज़ल्ट इसी साइट पर पहले उपलब्ध हो पाते हैं जैसे बी.ए. पार्ट तृतीय का परिणाम यूनिवर्सिटी की साइट की बजाय इस पर पहले उपलब्ध हुआ और यूनिवर्सिटी की साइट पर एक दिन बाद । तो हम लोग करते भी क्या? बजाय इंडिया रिजेल्टस.कॉम खोलने के और उसको खोलते ही वाइरस जी ने चाट डाली हमारी विण्डोज की फाईलस और कम्प्यूटर बंद क्या करते काफी जुगाड़ी उपाय किये लेकिन नहीं चला अन्त में हार्ड डिस्क को फॉर्मेट करके ही विण्डो लोड करना पड़ा ओर सबसे पहले एण्टी वाइरस साफ्टवेयर लोड करके उसे अप डेट करना पड़ा तब जाकर कुछ राहत मिली लेकिन अब भी इस साइट से वाइरस हटे नहीं है अगर किसी दिन एन्टी वाइरस अप डेट नहीं हो पाया तो कर देंगें दुबारा हमला और जान को आफत।
             इसी प्रकार मैंने भी तीन बार फॉर्मेट विण्डोज लोड किया और नया एण्टी वाइरस अवास्ट का नया वर्जन लोड किया तब जाकर इस आफत से कुछ पिछा छुटा आज भी मैं इस साईट को डरते डरते खेलता हूं। क्योंकि यह साइट खोलते ही आती है वार्निग वाइरस पकड़े जाने की
        इस वाइरस की ख़ासियत है कि यह या तो विण्डोज की फाईल खा कर या मिटा कर विण्डोज को ही करेप्ट कर देगा या फिर हमारें डायल अप नेट कनेक्सन को प्रभावित कर देगा जिससे या तो नेट कनेक्ट ही नहीं होगा और कनेक्ट हो जाने के बाद अपने आप ही डिसकनेक्ट हो जायेगा। कभी कभी तो कम्प्यूटर हैंग ही हो जायेगा और कभी कभी नेट स्टेटस ही गायब कर देगा।
    तो दोस्तों सावधान या तो इस साइट को कम से कम काम में ले या फिर कोई अप डेट एण्टी वाइरस रखें जिसे रोजाना सबसे पहले अपडेट करें ताकि इस खतरे से बचा जा सके।

    अन्त में इंडिया रिज़ल्ट साइट के निर्माताओं से निवेदन है कि कृपया करके इस साईट को वाइरस मुक्त करें। कयोंकि यह साइट रिज़ल्ट के लिए आम जन की पसंद बन चुकी है। लेकिन अब ये फंदा बनी हुई

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