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Tuesday, October 26, 2010

दो दिन से दलदल में फसी गाय को बचाकर हमने पुन्य प्राप्त किया लेकिन नगरपालिका बगड़ लापरवाह

एक तरफ जिस देश में गाय को पूजनीय मानते हैं वही दूसरी तरफ बेचारी इस गाय की कोई मदद ही नहीं कर रहा था न नगरपालिका न कोई और



आज मुझे हमारे एक मित्र शंकर लाल योगी जाटाबास द्वारा सूचना मिली की बगड़ फतेह सागर तालाब के पास नगरपालिका परिसर बगड़ के पास इकट्ठे  गन्दे दलदल में दो दिन से एक गाय फंसी हुई है। और नगरपालिका के पास होने पर भी उसे कोई  बाहर नहीं निकाल रहा है।  या तो नगरपालिका इसे अनदेखी कर रही है।




या फिर वो नगरपालिका ही जाने लोग पास से गुजर जाते हैं और बेचारी तड़फती गाय की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा था।

मुझे दया आयी मैने अपने दो चार मित्रों को लिया और वहां पर पहुच गया पहुच कर देखा की एक बहुत ही बदबू दार शहर के गन्दे दलदल युक्त नाले में बेचारी गाय बुरी तरफ फंसी हुई है। उसके चारों पैर सिधे के सिधे दलदल में फंसे हुए थे और उससे बिलकुल भी हिला डुला नहीं जा रहा था घास में छिपे इस दलदल का क्या पता कि ये कितना गहरा है।
ये गाय  बैठी हुई नहीं हैं अपने पेरो पर खड़ी दो दिन से नगरपालिका या किसी और के आने की प्रतिक्षा कर रही थी इसे ये भी पता था कि नगरपालिका से कोई नहीं हो सके तो किसी राहगीर को ही दया आयेगी नहीं तो मौत तो आनी ही आनी है। फोटों को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये गाय कितनी दलदल में धंसी हुई थी
हम दो चार से बात बनती नजर नहीं आई मुझे आश्चर्य भी हुआ कि बिलकुल नगरपालिका कार्यालय के पिछे इस दलदल पर नगरपालिका के किसी भी कर्मचारी का ध्यान क्यों नहीं गया जाता भी कैसे वे मजे से बैठे मौज कर रहें थे उन्हें क्या लेना शहर के पशु जानवरों से ?
मैं तुरन्त अपनी दुकान की तरफ आया और वहां से दो चार लोगों को और लाया तथा रस्से वगेरह लेकर और अपने टूल केमरे के साथ दुबारा वहां गया  तथा अपने केमरे में वहा का दृश्य केद किया । और पास के मौहल्ले जाटाबास से 10 -15 दोस्तों को जो पहले से ही वहा मौजूद थे वास्तव में वे भी इस गाय को बचाना चाहते थे
हम सभी ने अपने कपड़े उपर उठाये तथा वहां पड़ी एक चारपाई के बांस निकाले तथा उस दल दल में उतरने लगे चार पाई का निवार दलदल पर फेंक दिया ताकि हम दलदल में न फंस सके
गाय लगभग 4-5 फिट तक दलदल में धंस चुकी थी हमने काफी जतन ओर रस्से द्वारा खिंचा तान करके 2 घंटे की मस्कत के बाद अन्तः गाय को उस दलदल से निकाल लिया
फिर भी आश्चर्य देखो वहा उपस्थित 20-30 लोगों के इकट्ठे होने और  शोर गुल को देखकर और सुनकर भी वहां नगरपालिका बगड़ से हमारे लिए कोई मदद नहीं आई मदद तो दूर की बात कोइ यह पुछने भी नहीं आया कि यहां इस दलदल में ये शोर क्यों हो रहा हैं? क्या बात है? अब आप ही अंदाज लगा सकते हैं कि यहां की नगरपालिका कितनी जागरूक है।

गाय को निकाले के पश्चात उससे खड़ा नहीं हुआ गया तो उसे नहलाया गया तथा पास में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय द्वारा उसका प्राथमिक उपचार करवाया गया अब वह गाय बिल्कुल स्वस्थ है।

और अब आपको बगड़ के पत्रकारों की बताता हूं मैने स्वय पत्रिका के संवाददाता श्रीमान ज्योति प्रकाश जी से कहा था कि गाय फंसी हुई है। तो उनके कान के निचे जूं तक नहीं रेंगी मेरी बात को ऐसे अनसुना कर दिया जैसे गाय ही तो कोइ बड़ी बात थोडे ही है। ये तो वहां जाते है जहा या तो कोई वी आई पी आया हो या फिर कोई नेता ये गाय बेचारी इनकी क्या लगती हैं जो ये उसे बचाने या न्यूज बनाने आते या फिर होली दिपावली  विज्ञापन लेने जाते हैं दुकानो दुकानों पर क्योकि इससे ही तो इनको आमदनी होती है। ये हाल हैं हमारे बगड़ के प्रशासन और मिडिया का ।और नगरपालिका इस दलदल युक्त गंदे पानी का कोई निकासी प्रबंध  नहीं कर पा रही है। 
 जिन लोगों ने  लोगों ने  इस गाय को निकालने में मदद की उनमें ज्यादातर जाटाबास के नोजवान थे बिजू ललीत, बगैरह  मैं उनका तह दिल से शुक्रगुज़ार हूं उन्हे बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। आखिर उनमें अब भी देशभक्ति और मातृत्व बचा हुआ है। और बाकि मेरी दुकान के पास के कुछ मित्र लोग थे मैं उनका  शुक्रगुज़ार हूं।
क्योकि पहला कर्त्तव्य तो नगरपालिका  का था लेकिन एक इंसान होने के नाते हर इंसान का भी तो ये फर्ज बनता हैं कि अपनी मां समान गांय की सहायता की जाये सो इन्होनें की उन्हे बहुत बहुत धन्यवाद
वाह रे नगरपालिका!  वाह रे बगड़ का मिडिया ! ??????????


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दिन दिन गिरता जा रहा शिक्षा का स्तर

बगड़ की रामलीला का रंगमंच और चलचित्र

जितनी लम्बी सौर सुलभ हो उतने ही तो पग फैलाएं ( ज्वलन्त समस्या)

 साया :- जय मां पहाड़ा वाली जय मां शेरा वाली कर दे कोई चमत्कार,सारा जग माने तेरा उपकार

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साया
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रोडवेज बस चालक की सुजबुझ ने बचाई 30 सवारियों की जान

"मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है।" यही कहावत चरितार्थ हुई इस दुर्घटना में, आज का दिन वैसे माने तो बड़ा दुःखद निकला लेकिन अच्छा और शुभ ही माना जा सकता है। क्योंकि आज सवेरे 9- 9.30 बजे झुन्झुनूं दिल्ली राजमार्ग  पर बगड़ में हुई एक बस दुर्घटना में रोडवेज़ बस के चालक की सुजबुझ से बस में सवार 30 सवारियों की जान बच गइ किसी को खरोंच तक नहीं आई लेकिन दुर्घटना हुई ये बहुत बुरी बात हुई।
 हुआ यूं कि झुन्झुनूं डिपों की एक अनुबंधित रोडवेज़ बस पिलानी से जयपुर बस नं. आर जे 23  पीए 1938  जयपुर रूट लेकर जयपुर जा रही थी बगड़ के पूर्व दिशा में स्थित बड़ मन्दिर के पास झुन्झुनूं कि तरफ से आ रही एक छोटी गाड़ी जो फोटों में  दिखाई दे रही है। जो कि बताये अनुसार उसमें 3 लोग  सावर थे सड़क के बीच में आ रही थी बस चालक ने  उसको बचाने के लिए बस चालक ने अपनी सुज बुझ से बस को रोड के नीचे उतार दिया और उस गाड़ी के पिछे से आ रहे ट्रक और उस गाड़ी  को बचाने के लिए बस को रोड से नीचे उतार कर पास के खेत की तरफ मोड़ दी  बस ने एक दिवार को तोड़ फिर बाड  के उपर से होकर खेत में छलांग लगा दी तथा एक ( जांटी) खेजड़ी से टकरा गई और खेजड़ी(जांटी) के दो टूक हो ये लेकिन भगवान की दया से किसी को भी खरोंच तक नहीं आई छोटी गाड़ी के बोनट को क्षती पहुची तथा छोटी गाड़ी के सावर तुरन्त भाग गये। बस रोड़ से लगभग 25-30 फिट दूर चली गई  ।

 एक जोरदार धमाका हुआ इधर उधर से लोग वहां पहुचे और सवारियों को हिमलास बधायाऔर आराम से बाहर निकाला  और पता चला कि किसी को कोई खरोंच तक नहीं आई  बस के आगे का हिस्सा बुरी तरह टुट गया है।  लोगों के बताये अनुसार अगर बस चालक बस को वही ब्रेक लगाता तो बस उलट सकती थी और सवारियों की जान जाने की संभवना हो सकती थी अतः उसने अपनी सुझ बुझ से ऐसा नहीं किया और आज वैसे चतुर्थी का व्रत भी है। शायद लोगों की आस्था ने ही एक बड़ा हादसा होने से बचा लिया और भगवान भी डाईवर के रूप में  आकर उनकी जान बचा गये वहां उपस्थित लोगों के कहे अनुसार बस अपनी सही दिशा में ही आ रही थी छोटी गाड़ी सड़क के बीच में आ रही थी  गलती किसकी हैं ये तो भगवान ही जाने परन्तु देखने में तो गलती  छोटी गाड़ी वाले की ही लग रही थी और वो भाग भी खड़े हुए ।
एक फोटों मे रेड मार्क लगे निशान को देखकर आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि बस वाले चालक ने कहां पर अपने ब्रेक लगाने कि कोशिश की फिर अपना मन बदल कर बस को खेत की तरफ घुमाना ही उचित समझा ताकि लोगों की जान की हिफाज़त की जा सके बस चालक की हिम्मत की वास्तव में दात देनी चाहिए । खुशी इस बात की हैं कि किसी सवारी को चोट नहीं आई  भगवान का लाख लाख शुक्र है। अब आगे क्या होता हैं ये तो रोडवेज़ विभाग ओर पुलिस ही जाने वहां मौके पर पुलिस भी पहुच गई थी ।



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बगड़ की रामलीला का रंगमंच और चलचित्र

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Thursday, October 21, 2010

जितनी लम्बी सौर सुलभ हो उतने ही तो पग फैलाएं ( ज्वलन्त समस्या)

भाई मैं तो कवि हूं नहीं, परन्तु कविता पढ़ना मुझे बहुत अच्छा लगता है। इसलिए आज  बैठे बैठे इधर उधर से हिन्दी की किताब पढ़ रहा था तभी मेरी नजर इस कविता पर पड़ी इस के कवि का नाम तो नहीं दिया हुआ था परन्तु मुझे ये कविता बहुत ही अच्छी लगी मैने तुरन्त आपके साथ शेयर करने का फैसला कर  लियाजनसंख्या वृद्धि पर कवि द्वारा रचित ये कविता आज की ज्वलन्त समस्या जनसंख्या वृद्धि पर एक सवाल खड़ा कर रही है। इस कविता के लिए इस कविता के कवि को लाख लाख बधाईयां जिन्होंने इस समस्या पर अपनी लेखनी चलाई ।
आपसे निवेदन हैं कि कवि की बात पर गोर फ़रमा कर इस समस्या से अपने देश को बचाने का प्रयास जरूर करें।
!!जय भारत !!                  !!जय हिन्दुस्तान!!  

दिन-दिन बढ़ती आबादी ने, पैदा कर दी विपदाएं।
बटते- बटते घटी घरों में सभी तरह की सुविधाएं।
दूध- भात की बातें बीती, रोटी दाल न खाने को ।
तन ढ्कने को वस्त्र न पूरे, चादर नहीं बिछानें को।


एक जून का भी भोजन,जन जुआ रहें कठिनाई से।
बेटों को मां, मां को बेटे, भार बने महँगाई से।
पाटी - पोथी बिना पढ़ाई , हो ना पा रही बच्चों की।
पैरों तले जमीन खिसकती,देखी अच्छे - अच्छो की ।


हाट - बाट में भीड़-भाड़ है, धका -पेल बाजारों में।
लोग जरूरी चीजें लेने, देखों खड़े कतारों में।
हुए चौक-चौपाटी चौपट,खेलें ऐसी ठौर कहां।
उग आए हैं कंकरीट वन,कच्ची बस्ती जहां तहां । 


वस्तु अभाव भाव बढ़ जाते, फैली तंगी कंगाली।
कई लोग बेकार, हाथ में काम नहीं ,जेबें खाली।
सोच विचार मनन करके हम,यदि बदलाव न लाये तो।
विफल विकास सभी होंगे तब, हो न सकेगा चाहें जो।


बाजू में बल नहीं असीमित,सीमित साधन धरती धन।
जनसंख्या का बोझ बढ़ाकर,नरक बनाएं क्यों जीवन ?
जितनी खाद जमीन और जल,उसे देखकर पौधलगाएं।
जितनी लम्बी सौर सुलभ हो उतने ही तो पग फैलाएं।


भूख, गरीबी,बीमारी से, होने दे हम क्यों मौतें ?
जान बूझ कर हम विनाश को, अपने हाथों क्यों न्यौतें।
जितना पाल सकें उतना ही ,निज कुटुंब को फैलाएं ।
अपने घर को चमन बनाएं,सभी ओर सुख बरसाएं।

ये शेखावाटी की वहीं कहावत हैं कि 
‘‘ जितणा आपणी गुदड़ी म तागा हैं , उतणा ही पग पसारना चाये’’
तो भाया सगळा मिलर अब इं समस्या न रोको

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प्रसिद्ध हैं बगड़ की रामलीला, इसे देखकर क्या कहें?

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साया
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Tuesday, October 19, 2010

बगड़ की रामलीला का रंगमंच और चलचित्र

पिछली पोस्ट के वादे के मुताबिक आपके सामने पेश हैं बगड़ रामलीला मंचन (अभिनय)  का सजीव चित्रण
यहा पर पहली क्लिप में बगड़ रामलीला की आरती का दृश्य है। और दुसरी क्लिप में रावण विभीषण संवाद आप इस संवाद में रावण की गम्भीर भाव और कलायुक्त  आवाज सुनकर अंदाज लगा सकते है। इनके जैसे ही कलाकार 20 -25 वर्ष पहले यहाँ इस  मण्डल में हुआ करते थे तब यह कितनी रामलीला प्रसिद्ध रही होगी। 

नीचे वाली क्लिप में आपको वो देखने और सुनने को मिलेगा जो दबंग आवाज आप रामायण सीरियल में रावण बने पात्र श्रीमान अरविन्द त्रिवेदी जी से सुनते थे उनसे किसी भी प्रकार कम नहीं कही जा सकती अगर वैसे ही मशीनरी उपकरण द्वारा इनकी आवाज रिकॉर्ड की जाये तो ये श्री शिव भगवान जी शर्मा उनसे किसी भी प्रकार अभिनय और कला में शायद कम नहीं रहेंगे। इनका अभिनय वास्तव में दांतों तले अंगुली दबाने वाला ही चरितार्थ होता है।
श्री शिवभगवान जी शर्मा के अभिनय से जो  रामायण सीरियल में रावण बने श्रीमान अरविन्द त्रिवेदी  जी से अदाकारी में कही कम नहीं नजर आ रहे है।ये उनका 30 वर्ष का तर्जुबा जो लोगों को आज भी उनका अभिनय देखने के लिए खिंच लाता है। इस मंच की और
बाकि आप सुनकर अंदाज लगा सकते है।

 

तीसरी इस क्लिप को सुनकर आप जान जायेगें कि मैं मेरी पहली पोस्ट में क्यों कह रहा था कि अब वो बात नहीं रही


बगड़ के निकट रेखावाली ढ़ाणी में हो रही रामलीला का एक छोटा सा परिदृश्य
 
इन नन्हें कलाकारों की कला को हम तो नमन करते है।
इनका अभिनय तो बगड़ की जनता को अपनी तरफ खिचने के लिए बहुत ही अच्छा है। 
बाकि ज्यादा न लिखकर मैं आपको यह विडियों ही दिखलाउ तो अच्छा रहेंगा क्योंकि विडियों देखकर आपका मन पढ़ने को नही करेगा।

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जय मां नवदुर्गा सारा जग तेरे सहारे,तुझे मां मां प...

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Monday, October 18, 2010

प्रसिद्ध हैं बगड़ की रामलीला, इसे देखकर क्या कहें?

आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं
बगड़ की प्रसिद्ध रामलीला के कुछ दृश्य
 दशहरे का अवसर हैं आपको हर जगह गांव- गांव ढ़ाणी- ढ़ाणी में आपको इन दिनों रामलीला का मंचन होता नजर आ जायेगा।
तों मैं भी आपको हमारे नजदीक की रामलीलाओं के अभीनय से अवगत करा रहा हूं सबसे पहले बगड़ की रामलीला यहां -

हर जगह की भांति सबसे पहले प्रभु की आरती जैसा कि फोटों मे दर्शाया गया है। करके फिर आगें का कार्यक्रम शुरू किया जाता है।जब मैं गया तो यहां काफी भिड़ जमा हो चुकी थी और विभीषण द्वारा रावण को समझाना और रावण द्वारा विभीषण को लात मारकर लंका से


निकालना तथा उसका राम के पास आने का अभिनय चल रहा था मंच बहुत ही सुन्दर और मन मोहक लग रहा देखकर ऐसा लग रहा था जेसे यहाँ बैठे लंका नगरी पहुच गये हों  ये


रामलीला  श्री श्याम मण्डल प्रबंध समिति द्वारा चलायी जाती है। 
मैं आपको बता दूं कि बगड़ नगर की रामलीला आज से 15 - 20 वर्ष पहले

इतनी प्रसिद्ध थी की आते थे आस पास के अनेकों गावों के लोग रात को अपने अपने साधन लेकर झुण्ड के झुण्ड बनाकर देखने के लिए । इतनी भीड़ जमा हो जाती थी कि  बैठने के 

लिए जगह कम पड़ जाती थी ।तब हम तो सिर्फ अपने बड़ों से ही सुनते थे बच्चे थे इतनी दूर आ नहीं सकते थे  जब वास्तव में देखा तो पता चला पहले वास्तव में सच्चे अभिनय युक्त (अचंभित करने वाली)रामलीला

होती थी वही रामलीला आज मैने कई वर्ष पश्चात आज फिर देखी लेकिन वैसा आनन्द नहीं आया अब बगड़ की रामलीला में वो बात नहीं रही करण क्या हैं ये तो प्रभू ही जाने बाकि मेरे मतानुसार  मण्डल में
राजनीतिकरण और लोगों की ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों के प्रति घटती रूचि तथा कुछ हद तक पुराने पात्रों का बदलाव है।  अब सिर्फ बगड़ के ही लोग इसे देखने को आते है।मुझे यहां बच्चों और महिलाओं की संख्या ही ज्यादा नजर आई।और यहा हर रोज इन 10 -15 दिनों में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता करवाई जाती है। अब यहां इस मण्डल द्वारा अभिनय की बजाय और व्यवस्था करवाने की बजाय चन्दा वगेरह और पेसे इकट्ठे करने में रूचि ज्यादा दिखाई दे रही थी  यहां अभिनय कम और 
दान दाताओं के नाम जल्दी जल्दी बोले जा रहें थे उसके लिए चाहे अभिनय को रोकना ही क्यों न पड़े मुझे तो यहाँ एक तो लाइट की व्यवस्था का  अभाव दिखाई दिया  और आवाज भी पिछे तक कुछ स्पष्ट सुनाई नहीं दे रही थी। जबकि इस मण्डल के पास जैसी जानकारी मिली हे। पैसे बहुत है। हालांकि अब भी यहाँ बगड़ के काफी बच्चो और औरतों  और नवयुवकों की भीड देखने को मिल जायेगी परन्तु ये सिर्फ बच्चों का मनोरंजन और टाइम पास ही लग रहा था  कोई ज्ञान प्राप्ति नहीं ।अब आये दिन यहाँ कुछ न कुछ छुट पुट बदमासियां होन लगी है। हो सकता हैं ये कारण भी भिड न होने का एक कारण हो, मण्डल को इसे रोकने की तरफ भी ध्यान देना चाहिए।इसे ज्यादा अच्दी मुझे पास के एक छोटें गांव ढ़ाणी रेखवाली में अभिमंचित रामलीला लगी वहां भीड भी काफी थी और बगड़ के भी कुछ लोग इसे छोड़कर वहां देखने को गये हुए थे वहां के पात्रों की धीर गम्भीरता भी अच्छी लग रही थी
परन्तु एक बात जरूर हैं कि इतनी भीड़ को देखकर ऐसा लग रहा थ कि कुछ तो हैं अपने धार्मिक कार्यक्रमों में  
मेरा उदेश्य किसी आदमी या किसी समिति या मण्डल विशेष की बुराई करना नहीं अपितु मुझे जो कमिया नजर आई उनके प्रति मेरा यह सुझाव हैं जो मैने प्रस्तुत कर दिया मुझे लगा कि कुछ सुधार की अवश्यकता हैं ताकि यह रामलीला पहले जैसी प्रसिद्ध रामलीला ही बनी रहें और दुबारा वही प्रसिद्धि का आसमान छुये
बाकि आज भी रामलीला का मंचन होता देख द्वापर युग की याद और  लोगो के मन में  हमारे धर्म के प्रति आस्था पैदा हो जाती है।
बगड़ की रामलीला मंच के कलाकार
यहाँ पुराने पात्रों में रावण बने श्री शिवभगवान जी ही रह गये है।
अब मैं यहाँ के पात्रों से आपको अवगत करवाता हूं।
राम का रोल  अदा कर रहें  है। श्री अशोक जी शर्मा
लक्ष्मण श्री सुशील जी
रावण बने श्री शिवभगवान जी
विभिषण के रोल में थे हमारे मित्र श्री रौहितश जी सैनी (आंचल स्डूडियों)
श्री कुन्दन जी और श्री बलबीर नट  मनोरंजक रोल अदा करते है।



बगड़ के नजदीक ही रेखावाली ढ़ाणी की रामलीला वास्तव में देखने में लग रही थी राम की लीला
जो वास्तव में टक्कर दे रही बगड़ की राम लीला को और प्रसिद्धि का आसमान छू रही है।


ये रामलील का दृश्य हैं बगड़ के नजदीक के एक छोटे से गांव रेखावाली ढ्राणी का रेखावली ढ्राणी में रामलीला का मंचन लोग मंत्र मुग्ध होकर देख रहें थे और वहां नीम का थाना से एक कलाकार को नृत्य के लिए बुलाया गया था तथा अभिनय बहुत ही सुन्दर था ।
हा. हा. हा. हा. रावण के ठहाके गुंज रहें थे हा. हा. हा. हा.नाचने वाली प्रबंध किया जाये  ये लंकेश का आदेश ऐसा ही कुद देखने को मिला वहां।
इस नृत्य कलाकारा ने सबका मन मोंह  रखा था 

आप सब को विदित है। यह पर्व दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। और अधर्म पर धर्म की विजय 
तो हमेशा धर्म का साथ देना चाहिए और सच्चाई का साथ देना चाहिए


यहाँ के पात्र थे जिन्हें मैं जानता हूं उनके नाम आपाके बता रहा हूं।
गुलझारी लाल कटारिया  कुंभकर्ण के रोल को अदा करता है।
बलबीर सैनी  हनुमान जी
सुनील  जो राम का रोल अदा कर रहें थे 

लक्ष्मण का रोल शक्ति सिंह सैनी अदा कर रहें थे
विनोद जो रावण बने हुये है। 

सत्यनाराण कटारिया  मजाकिया मनोरंजक रोल अदा कर रहें थे आदि
 दोनों ही जगह की रामलीला मंचन का विडियो अगली पोस्ट में अगली पोस्ट के विडियों में आपको रूबरू करवाये गें लगातार 30-32 वर्ष से  रावण बनते आ रहें श्री शिवभगवान जी शर्मा के अभिनय से जो  रामायण सीरियल में रावण बने श्रीमान अरविन्द त्रिवेदी  जी से अदाकारी में कही कम नहीं नजर आ रहे है। 
तो देखना मत भुलना अगली पोस्ट 
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Sunday, October 17, 2010

मां भवानी के दरबार बगड़ में हुई आरती के विडियों और झुमते भक्त जन

जहां आकर मन को शान्ति मिले ,दुर्गाष्टमी पर बगड़ में सजा मां दुर्गे का दरबार विडियो के साथ


मैने मेरी पिछली पोस्टजहां आकर मन को शान्ति मिले ,दुर्गाष्टमी पर बगड़ में सजा मां दुर्गे का दरबार में आपसे वादा किया था कि आपको आरती का विडियो दिखाउगा सो अब ये लीजिए मैने वादे के मुताबिक आपके सामने पेश किये हैं दुर्गाष्टमी के दिन बगड़ में हुइ मां दुर्गा की आरती के विडियो , मैने तो प्रत्यक्ष देखकर भजनों और आरती का अनन्द उठाया अब आप के साथ शेयर कर आपको भी माता के दर्शनों ओर आशीर्वाद से लाभान्वित कर रहा हूं।
पहली आरती का दृश्य बगड़ के मध्य बने दुर्गा मन्दिर परिसर का हैं जिसका जिक्र मैं अपनी पिछली पोस्ट में कर चुका हूं  और बाकी सभी विडियों फतेहसागर तालाब के पास स्थापित मा भवानी की मूर्ति स्थल की आरती और वहा झुम रहें भक्तों के है। इसे देखकर आप ही अंदाज लगा सकते हैं कि मैने अपनी पिछली पोस्ट में सही लिखा था कि यहां कितनी भीड इक्कठी हो रखी थी

यहा देखिये कितने भक्तजन भाव विभोर माता के दर्शनों के साथ आरती और भजनों का आनन्द उठा रहें थे   यहां का पण्डाल में जितनी संख्या में माता के भक्त उपस्थित थे कि लोगों को खड़े रहने में भी दिक्कत आ रही थी यानि दरबार खचाखच भरा हुआ था 
यहां इस स्थल पर पिछले तीन वर्षो से इस दरबार को आयोजन किया जा रहा है। और यहां हर वर्ष की तुलना में इस वर्ष बहुत ही काफी संख्या में भक्तजन उपस्थित हुए और यहाँ नो दिनों तक रात्रि में भजन संध्या का आयोजन किया जाता है।इन सब के बारे में मैं पहले ही बता चुका हूं सो आपके सामने ज्यादा न लिखकर आपको विडियो ही दिखाना पंसद करूगा  
  माता आप सभी पर भी अपनी असीम कृपा बनाये रखे आपके अन्न धन के भण्डार भरे इन्हीं शुभकामनाओं के साथ कि माता अगले वर्ष इस वर्ष से भी सौगुनी खुशिया आपके परिवार में लेकर आये  यही कामना है।  अगले वर्ष की नवरात्रि तक के लिए इजाजत  इजाजत चाहुंगा।
 आप सभी पाठको व आपके परिवार को दशहरे की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

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जय मां नवदुर्गा सारा जग तेरे सहारे,तुझे मां मां प...

साया :- जय मां पहाड़ा वाली जय मां शेरा वाली कर दे कोई चमत्कार,सारा जग माने तेरा उपकार

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Saturday, October 16, 2010

जहां आकर मन को शान्ति मिले ,दुर्गाष्टमी पर बगड़ में सजा मां दुर्गे का दरबार

 दुर्गाष्टमी के अवसर पर हमारे  बगड़ नगर में मां भवानी का दरबार दो जगह सजाया गया ।
 एक बगड़ के पुराने दुर्गा मन्दिर जो दुर्गा मार्केट के पास स्थापित जहां हर वर्ष नवरात्रों में मां की प्रतिमा स्थापित की जाती हैं तथा नो दिनों तक उसकी विधिनुसार उसकी पूजा अर्चना कर नो दिन बाद उसका बड़े ही हर्षोल्लास के साथ विर्शजन किया जाता है। यहां नो दिन तक विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है।             जैसे ( डाडिया गरबा नृत्य व भजनों का कार्यक्रम)
 यहाँ नगर के काफीह मात्रा में लोगों ने माता की आरती की तथा मां से मन्नतें मांगी। सजाय गया दरबार और और माता की प्रतिमा स्वर्ग के सामान सुन्दर और मन मोहक लग रही थी पिछले वार्षो में तो यहाँ श्री दुर्गा प्रबंन्ध कमेटी द्वारा  काफी प्रोग्रम आयोजित करवाये गये थे लेकिन इस बार वे कुछ नहीं हो सके इसका कारण पता नहीं क्या रहा  शायद राजनिती करण ?
 वहीं दुसरी तरफ  फतेहसागर तालाब के पास स्थापित मां अम्बे की प्रतिमा स्थल व दरबार का नजारा तों देखने लायक ही था
 वहां काफी संख्या में माता भक्तजन ने वहा हो रही आरती का लुप्त उठाया और माता के दर्शन कर अपना जीवन धन्य बनाया यहां उपस्थित भक्तजनों को फोटों में देखकर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि कितनी आस्था है आज भी लोगों के मन में अपने धर्म देवों के लिए ।
 यहां का पण्डाल में जितनी संख्या में माता के भक्त उपस्थित थे कि लोगों को खड़े रहने में भी दिक्कत आ रही थी यानि दरबार खचाखच भरा हुआ था
 यहां इस स्थल पर पिछले तीन वर्षो से इस दरबार को आयोजन किया जा रहा है। और यहां हर वर्ष की तुलना में इस वर्ष बहुत ही काफी संख्या में भक्तजन उपस्थित हुए और यहाँ नो दिनों तक रात्रि में भजन संध्या का आयोजन किया जाता है। माता के मधुर भजनों का आनन्द उठाने और माता के दर्शनों के लिए आस पास के गांवों के लोग भी उमड़ पड़ते है।
 ये आयोजन फतेह सागर नव दुर्गा कमेटी द्वारा किया जाता है। और यहां नवमी के दिन विशाल भण्डारे का आयोजन भी किया जाता है।
 और नों दिनों तक भक्त जनों को प्रसाद वितरण किया जाता हे। बुढ़े जवान बच्चे  सभी लोग माता के भजनगान व दर्शनों का लाभ उठाते है।
 ओर यहाँ आरती के सामय का नजारा तो वास्तव में देखने लायक था मैं उसका विडियों क्लिप आपको अगली पोस्ट में जरूर दिखाउगा।
यहाँ नवरात्र स्थापना के दिन कलश यात्रा की भव्य रैली निकाली जाती है। नो दिनों तक चले कार्यक्रमों के बाद आज भण्डारें के साथ ही दोनों ही जगह  स्थापित कार्यक्रम का समापन किया गया  माता की असीम कृपा पाने के लिए ये कार्यक्रम हर वर्ष हमारे नगर में आयोजित किये जाते है।
मैने भी इन दोनों ही जगह जाकर माता के भजनों व दर्शनों का अनुपम लाभ उठाया और वही लाभ व मां का आशीर्वाद अब आपके साथ शेयर कर रहा हूं आशा है आपको पंसद आयेगी।
 और माता आप सभी पर भी अपनी असीम कृपा बनाये रखे इन्हीं शुभकामनाओं के साथ इजाजत चाहुंगा।
अगली पोस्ट माता की आरती के विडियों के साथ

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कोई बड़ी बात नहीं है, भारत में

जय मां नवदुर्गा सारा जग तेरे सहारे,तुझे मां मां प...

साया :- जय मां पहाड़ा वाली जय मां शेरा वाली कर दे कोई चमत्कार,सारा जग माने तेरा उपकार

मेरी शेखावाटी - : मंडावा के बैध जी (एक रोचक दास्तान )

साया
लक्ष्य

Friday, October 15, 2010

दिन दिन गिरता जा रहा शिक्षा का स्तर

आपके सामने राजस्थान में  पी.टी.ई.टी द्वारा जारी दो राउण्ड की तीन कट आफ लिस्ट है। जिन्हें देखकर आप खुद अन्दाजा लगा सकते हैं कि ये कट आफ क्या दर्शा रहें है।?
पहली कट आफ लिस्ट
दूसरे राउण्ड की पहली कट आफ लिस्ट
सैकेण्ड दूसरी कट आफ लिस्ट

एक तरफ तो राजस्थान में पी.टी.ई.टी कम्पीटीशन द्वारा बी.एड करवाने की बात कह रही है। वही दूसरी और इस लिस्ट में दर्शाये अनुसार विज्ञान वर्ग और वाणिजय वर्ग के छात्र छात्राओं को तो दूसरी लिस्ट में ही सभी को स्थान दे दिया गया था चाहें वो पास हो या फैल यह बात कोई मायने नहीं रखती बस सिटें पूरी होनी चाहिए   अर्थात एक तो  वो छात्र हैं  जो पुरी  तैयारी के साथ काचिंग वगैरह करके परीक्षा देते हैं और एक तरफ वो छात्र हैं जो परीक्षा मात्र देते हैं लेकिन पी.टी.ई.टी द्वारा लास्ट में इन दोनों वर्ग के छात्रों को बराबर लाकर खडा कर दिया जाता है। यानि दोनों ही छात्र बी.एड के हकदार हो जाते हैं आप ही बताइए इसे क्या शिक्षा का स्तर बढ़ सकता है? एक तरफ तो वो छात्र बी.एड कर रहा है। जिसके पी.टी.ई.टी परीक्षा में 70-75 प्रतिशत नम्बर आया है। और एक तरफ जो फैल हो गया वो उसके बराबर बी.एड कर रहा है। यह कौनसा न्याय है। ? यह तो फिर आगे से कौन मेहनत करके परीक्षा देगा सभी सिर्फ फार्म भरकर परीक्षा दे देगें उन्हें पता ता है ही कि अन्त में दूसरी या तीसरी लिस्ट में उनका नम्बर तो आना ही है। तो क्यों मेहनत करेगें अगर ऐसी ही हें तो फिर बेचारे कला वर्ग के छात्रों ने क्या बुरा किया हैं उन्हें भी विज्ञान वर्ग और वाणिजय वर्ग के समान ही सुविधा मिलकर बी.एड करने का हक दिया जाना चाहिए
अब आप ही बताइये कि एक फैल विद्यार्थी जो पास मार्क नहीं ला सका वह क्या बी.एड कर पायेगा और कर भी लेगा तो वह क्या आगें का कम्पीटीशन लड पायेगा और क्या वह भविष्य में बच्चों को पढ़ा पायेगा ? जो विद्यार्थी अपने बुते पर पास नहीं हो सकता उसे बी.एड करवाकर एक आदर्श शिक्षा की बुनियाद रखी जा रही हैं सरकार द्वारा यह कहा तक सही हैं कहां तक गलत ये तो आप लोग ही बता सकते है। 
इस से तो एसा अनुमान लगाया जा सकता हैं कि आज विश्वविद्यालय द्वारा बी.एड के नाम पर बी.एड कॉलेजों की पोकेट भरने के अलावा और कुछ नहीं कर रहें उनका मानना हैं कि किसी की बी.एड कॉलेज की सिटें खाली नहीं रहनी चाहिए भले ही फैल को भी बी.एड करवानी पड़े और करवा भी रहें है। क्यों नही करवायेगें लगभग 25 हजार रूपये जो मिल रहें हैं उस विद्यार्थी द्वारा फिस के रूप में आगे चलकर चाहे वो अध्यापक बने या न बने हमें तो सिर्फ उसे डिग्री देनी है। आज गांव गांव में  आपको बी.एड कॉलेज जनरल स्टोर की तरफ खुली हुई मिल जायेगी।अगर पी.टी.ई.टी को एक अयोग्य विद्यार्थी को ही योगय बनाना हैं तो फिर कम्पीटीशन करवाने की क्या जरूरत है। वैसे भी तो बुलाया जा सकता है। सरकार चाहती हैं कि  बी.एड कॉलेजों की सिटें खाली नहीं रहनी चाहिए बाकि चाहे कुछ भी होता रहें बस फिस के पैसे आने चाहिए केसे भी..कोई फैल विद्यार्थी बी.एड करे या पास इससे उन्हें कोई मतलब नहीं लगता है। इसे शिक्षा का स्तर गिरता हैं या उठता कोई मायने नहीं रखता उनके लिए  इस काउंसलिंग के बाद बीएड महाविद्यालयों में 10763 सीटें खाली रह गई है। इन रिक्त सीटों पर प्रवेश की क्या प्रक्रिया अपनाई जाए, इसके लिए गुरूवार को ही सरकार को पत्र भेजा दिया गया।और मेरे अन्दाज से सरकार क्या करेगी  यह तो आप सब और हम जानते ही हे। और घटा दी जाये कट आफ कला वर्ग की भी  यही ना  आपने सही अंन्दाज लगाया है। यही उतर आयेगा भई सिटें भरकर फिस जो बटोरनी है। नहीं तो बेचारे महाविद्यालयों वालों का क्या हाल होगा उन्हें आमदनी कहां से होगी! सरकार को लड़को के, शिक्षा के भविष्य की चिंता नहीं लग रही हैं उन्हें तो सिफ ...!!!!!
आब आप ही बताईये कि  हमारी सरकार या शिक्षा विभाग  कैसे शिक्षक तैयार कर रही हैं जो आने वाली पीढी के लिए बच्चों को क्या पढ़ा पायेगें यह आप अन्दाजा लगा सकते हें जो खुद पास नहीं हो सके वो ....
मेरा विचार/ आशय किसी आदमी विशेष के प्रति या किसी वर्ग विशेष के प्रति नहीं है। आगामी शिक्षा के भविष्य के प्रति उठे मन के विचार हैं जो मैने व्यक्त कर दिये
मेरे मन में कट आफ को देखकर विचार आय मैने लिख दिया आब आप विद्वान जन ही बताइए क्या क्या सही हैं और क्या गलत आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा



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चूहों की कुछ अनदेखी तस्वीरें.. फोटोग्राफर जीन लुइस क्लेन और मेरी हुबर्ट

जय मां नवदुर्गा सारा जग तेरे सहारे,तुझे मां मां प...

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साया
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Monday, October 11, 2010

कोई बड़ी बात नहीं है, भारत में

 भैया यह भारत है। यहां कुछ भी असंभव नहीं है। आपने कभी जुगाड़ शब्द सुना है। अगर हां तो हम आपको बता दें की इस काम में हमारा भारत बहुत आगे है। यहां हर काम जुगाड़ से हो जाता है फिर चाहे वह कुछ भी क्यों न हों। इन तस्वीरों को देखिए आप खुद ही समझ जाएंगे:-


भारत में गाड़ी से सवारी करने के लिए टीन के डिब्बे में लगे दो टायरों और पेट्रोल फूंकने की जरूरत नहीं पड़ती। यहां तो बस दो बांस के दण्डों को किसी के भी कंधे पर लाद कर भी घूमा जा सकता है।

कोई बड़ी बात नहीं है कि भारत में ट्रक पर ट्रेन के कोच जोड़ दिए जाएं।


यहां आपको ट्रकें भी रेलवे ट्रैक पर रेंगती नजर आ जाएंगी। इस तस्वीर को देख कर शायद आपको यकीन भी हो जाएगा।

यहां रहने को भले ही घर न हो और खाने को खाना भी न हो। लेकिन लोगों को सोने के लिए आलिशान बेड जरूर मिल जाता है। अब इन जनाब को ही देख ली जिए कैसे आराम फरमा रहे हैं।

कोलगेट का विज्ञापन देने के लिए सिर्फ स्माईल चाहिए दांत हो न हो क्या फर्क पड़ता है।

 भास्कर की साईट पर इधर उधर विचारण करते मुझे ये नई चीज दिखाई दी सोचा आपके साथ में शेयर कर आपको भी ये विचित्र चिज दिखा सकूं
साभार दैनिक भास्कर

Saturday, October 9, 2010

कभी फुरसत हो तो जगदम्बे निर्धन के घर भी आ जाना

लीजिए आज लखबीर सिंह लख्खा के कर्ण प्रिय स्वरों में सुनिये माता की भेंट।
"कभी फुरसत हो तो जगदम्बे निर्धन के घर भी आ जाना, जो रूखा सुखा दिया हमें मां उसका भोग लगा जाना..."
कितना भाव पूर्ण भजन है। आप भी देखे और बतायें



प्यारा सजा हैं दरबार भवानी.... 












श्री दुर्गा जी की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया श्यामा गोरी । तुमको निशि दिन ध्यावत,हरि ब्रह्माः शिवरी ।।
मांग सिंदूर विराजत,टीको मृगमद को । उज्जवल से दोऊ नैना,चन्द्रवदन नीको ।।
कनक समान कलेवर,रक्ताम्बर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ।।
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धरी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ।।
कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती । कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति ।।
शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर धाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ।।
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ।।
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमलारानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ।।
चैंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरू । बाज ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ।।
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
भुजा चार अति शेभित, वरमुद्र धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ।।
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत,कोटि रतन ज्योति ।।
अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावे ।।
देवी वन्दना
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । 

Friday, October 8, 2010

जय मां नवदुर्गा सारा जग तेरे सहारे,तुझे मां मां पुकारे

श्राद्ध पक्ष खत्म होने के बाद आज से ही मां दुर्गा के नौ रूपों की पुजा अर्चना का सौभाग्य हमें नवरात्रों के रूप में मिलता है।  नौ दिन तक हर किसी के मुख मण्डल से माता के जयकारे ही गुंजते सुनाई देते है। इन नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पुजा की जाती है। और उनसे शक्ति,सुख और समृद्धी जैसे अनेक मन वांच्छित वर (मन्नत)मांगे जाते है। वेदानुकूल तरीके  विधि से पूजा करने वाले भक्तों पर माता भगवती अपनी असीम कृपा कर उनके दुःख, भय, रोग, शोकादि दूर कर शक्ति और समृद्धि प्रदान मन वांच्छित वर प्रदान करती है।तथा अन्न धन के भण्डार भरती है।सभी देवी देवताओं की प्रार्थना और तीनों  महादेवों के अंश से प्रतिपादित  दुष्ट संहारक माता के  नौ रूपों को नव दुर्गा कहा गया जिनकी पुजा नवरात्र में की जाती है।


जिनके अलग -अलग नौ नाम है।
मेरे साथ आप भी करिये जगत पालक ,संहारक मां के नो रूपों के दर्शन
1 शैलपुत्री - जो हिमालय की तपस्या और प्रार्थना से प्रसन्न हो कृपापूर्वक उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुई, 




 


2 ब्रह्मचारिणी  - सच्चिदानन्दमय ब्रह्मस्वरूप की प्राप्ति कराना जिनका स्वभाव हो, वे ब्रह्मचारिणी कहलाई.





 



         3 चंद्रघंटा  - आल्हाद्कारी चन्द्रमा जिनकी घंटा में स्थित हो, उन देवी का नाम चंद्रघंटा है.



 
 



4  कूष्मांडा - त्रिविध तापयुक्त संसार जिनके उदार में स्थित हैं, वे भगवती कूष्मांडा कहलाई.




 




5 स्कंदमाता - भगवती शक्ति से उत्पन्न हुए सनत्कुमार का नाम स्कन्द है, उनकी माता होने से वे स्कंदमाता कहलाई.


 
 




6 कात्यायनी  -देवताओं के कार्यसिद्धि हेतु महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई, जिससे उनके द्वारा अपने पुत्री मानने से कात्यायनी नाम से प्रसिद्द हुई.


 



7 कालरात्रि - काल की भी रात्रि (विनाशिका) दुष्ट संहारक होने से उनका नाम कालरात्रि पड़ा ।




 



8 महागौरी - तपस्या के द्वारा महँ गौरवर्ण प्राप्त करने से महागौरी कहलाई।





 




9 सिद्धिदात्री - सिद्धि अर्थात सर्व सिद्ध कारिणी मोक्षदायिनी होने से सिद्धिदात्री कहलाती है।

अनेक प्रकार के  आभूषणों और रत्नों तथा अस्त्र शस्त्रों  से सुशोभित ये देवियाँ क्रोध से भरी हुई और और मन मोहक दिखाई देती हैं. ये शक्ति, त्रिशूल हल, मुसल, खेटक, तोमर,शंख, चक्र, गदा, परशु, पाश, कुंत, एवं उत्तम शांर्गधनुष आदि अस्त्र-शस्त्र अपने हाथों में धारण किए रहती हैं, जिसका उद्देश्य दुष्टों का नाश कर अपने भक्तों को अभयदान देते हुए उनकी रक्षा कर संसार  में शांति व्याप्त करना और मन वांच्छित वर, मुराद पुरी करना और अन्न धन के भण्डार भरती है। 

        माता के आशीर्वाद को पाने के लिए हमारा बगड़ नगर कैसे दूर रह सकता है। यहां भी दो जगह माता भगवती की मूर्ति स्थापित कर घट  स्थापना की गई है।एक तो बगड़ में मध्य बने मां दुर्गा के मन्दिर में जहां हर वर्ष बड़ी धुम धाम से नवराते मनाये जाते है। और दुसरी बगड़ के पश्चिम दिशा में फतेह सागर तालाब के पासदोनों ही जगह सेकड़ों माता भक्तों ने आज माता के दरबार में अपना मत्था टेक मां से अभयदान, सुख समृद्धि, और अमन- चैन  मुराद मांगी

  इसी के साथ आप सभी पाठको और ब्लोगर मालिको को हमारी तरफ से नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं मां आप सभी के अन्न धन के भण्डार भरे और आपके परिवार को सुख और समृद्धि प्रदान करे इन्हीं शुभकामनाओं के साथ  आगे नौ दिनों तक चलने वाले प्रोग्राम की सूचनाओं के  साथ आपके सामने फिर से हाजिर होंगें तब तक के लिए इजाजत...
जय मां शेरा वाली, जय मां दुर्गा, जय मां अम्बे

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एक छोरी काळती हमेशा जीव बाळती

साया
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