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Wednesday, October 26, 2011

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं,बगड़ बाजार की रौनक के साथ


 सभी देशवासियों, ब्लॉगर मित्रों, पाठकों व उनके परिवार जनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
 आज दीपावली  हैं आज बगड़ नगर का बाजार भी अन्य शहरों की तरह ही अपने ग्राहको को लुभाने के लिए सज धज कर तैयार खड़ा है। 
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 यहां प्रत्येक दुकानदार अपनी दुकान को अपने नये अंदाज में सजये हुए है। कोई पेड़ पोधें की सजाई वाटिका में फल व सब्जियां बेच रहा हैं तो कोई टेन्ट के नीचे  मिठाईयां बेच रहा हैं  यहां के बाजार का दृश्य बाजार वास्तव में देखने लायक सजाय हुआ है।
 इस वर्ष हमारी दुकानों के आगे का हिस्सा भी सजावट से युक्त हैं जिसको सजाने में सहयोग किया साथी दुकानदार उमेश फ्लावर डेकोरटर्स के मालीक उमेश सेनी जिसने अपनी गैलरी व फुलों से सजावट कर दुकानों की शान और भी बढ़ा दी हैं मार्केट का माहोल शादी के माफिक लग रहा है।
 हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पीरामल गेट जहाँ हमारी दुकान हैं का क्षेत्र तो पुरा का पुरा ही सजावट से शुक्त है। यहा मिश्रित दुकाने है। सब्जी ,मिठाईयां लाईट क्रोकरी,जनरल स्टोर  किराणा व अन्य जिनकी सजावट देखने लायक है।
 रात की रोशनी में जगमगाता पीरामल गेट के पास का मार्केट
 ये  वाटिका  से सजी दुकाने बी.एल चोक के पास पास  मघा राम सैनी की दुकान हैं और एक मक्खन लाला कुमावत की फल व सब्जी की दुकान  बड़े ही कलात्मक ढ़ग से सजाई गई है।

 बी एल चैक के पास सजाई गई कलात्मक दुकान
 वहीं बगड़ के एक मौहल्ले जाटाबास में भी दीपावली की रोनक देखने लायक हैं योगी ब्रदर्स की दुकाने
 बगड़ सब्जी मंडी में भी लोगों का ताता लगा हुआ है। सब्जी मंडी का दृश्य देखने लायक लग रहा है।

 टेन्ट के नीचे  मिठाईयां बेच रहा है।

















आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

जहां आज भी लोग समय निकालकर आते हैं, प्रसिद्ध रामलीला, बगड़

 झांकी, नाचते- गाते किया विर्षजन,बगड़

 प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, बगड़

 

Thursday, October 20, 2011

स्टेज की कला के समतुल्य हैं, सड़क की कला

"हां यह बात सत्य हैं कि स्टेज की कला के समतुल्य है सड़कों पर दिखाइ जाने वाली कला बस फर्क सिर्फ इसे पहचानने का हैं "
आज जब मैने अपनी दुकान खोली तो कुछ समय बाद  इन्होने हमारी दुकान पीरामल गेट के पास आकर जब आपना सामाना लगाना शुरू किया तो मैन और सभी दुकानदारों ने सोचा की होगा कोई साधारण सा खेल दिखाकर हमेशा की तरह अपनी दवा- दारू बेचने वाला मदारी लेकिन 10 -15 मिनट के बाद जब हमारे कानों मे कर्ण प्रिया आवाज पहुची तो हम अपनी अपनी दुकानों से निकलकर बाहर देखने के लिए मजबुर हो गये और फिर देखी इनकी कला, मधुर संगीत पर नृत्य व सर्कस की कला दिखाते छोटे छोटे बच्चे वास्वत में प्रसशा के काबिल खेल दिखा रहें थे
अगर आप भी यह कला देखते तो आपके मुह से भी अनायास ही यह निकल पड़ता कि अगर ये कला अच्छे साज बाज के साथ अगर स्टेज पर दिखाई जाती तो यह पार्टी वास्तव में कलाकार कहलाने लायक थी आरकेस्ट्रा पार्टी का मुकाबला करने वाली होती या फिर कोई सर्कस के कलाकार से तो बिलकुल भी कम नहीं होती  पर इनका दुर्भाग्य कि इनके हिस्से में आया रोड़ पर खेल दिखाना क्योकि ये बेचारे गरीब ये खेल दिखा कर ही अपना पेट पालते हैं ये पाटी या यूं कहे खेल दिखाने वाले इलाबाद के रहने वाले एक ही रिवार के 8 सदसय हैं  हैं इसके परिवार के मुखिया का नाम गोविन्दा हैं  जो ये खेल दिखाकर अपना गुजारा चलाता हैं शहर दर शहर अपना ये छोटा सर्कस का खेल दिखा कर अपना गुजारा चलाता हैं
 इनके पास अपना खुद का इंस्टोमेंटल यानि साज बाज हैं जिसमें ढ़ोलकएबेटरी से चलने वाला पियानों, स्पीकर ,डेक,,माईक, आटोपैड की जगह स्टील की थाली ने ले रखी थी  और गाने की इनकी खुद की आवाज तो कमाल की थी
ये छोटी सी लड़की भांति भांति  के करतब दिखा कर लोगों का मन मोह रही थी  इस बच्ची के करतब देखकर लोगों ने अपनी फुरसतानुसार 10- 20 रू इसे दिये आप फोटो में देख सकते हैं ये लड़की बैच पर पड़ी अंगुठी अपने मुंह से उठा रही हैं वो भी इनता पीछे की तरफ घुम कर

कुल मिलाकर जिस किसी के मुह से भी यही आवाज निकल रही थी कि कला बहुत ही अच्छी हैं अगर यही कला स्टेज पर प्रस्तुत की जाती तो यह प्रटार्ह 10 - 15 हजार रूपये की पर्टी कहलाती पर इनका नसीब की ये लोग सिर्फ 10 -20 रूपये के लिए ही सड़क किनारे खेल दिखा कर अपनी आजीविका चला रहें हैं

 ये छोटा सा लड़का  पियानों बजाने साथ साथ अपनी मधुर आवाज में गीत भी गा रहा था 
पियानों पर इसकी अंगुलिय ऐसे चल रही थी मानों कई सदियों से ये पियानों बजा रहा हो ,और पास सुटकेश में पड़ा इनका म्यूजिक सिस्टम तथा लाईट बेट्री
और ये छोटा सा लड़का थाली इस प्रकार बजा रहा था मोनों आटो पैड (वाद्ययंत्र)  बजा रहा हों वास्तव में बहुत ही अच्छी आवाज निकल रही थी और पियोनों वादक और ढ़ोलक वादका के तो कहने ही क्या
इस मण्डली का संचालक गोविन्दा नाम का यह इलाबाद का रहने वाला कला कार जो ढ़ोलक बजा कर तथा खेल दिखा कर अपनी आ जीविका चला रहा है।
इनका प्रोग्राम मुझे अच्छा लगा मुझे ही क्या सभी देखने वालों को अच्छा लगा ना तो कोई दवा दारू बेचा और ना की किसी चिज का प्रचार किया मात्र अपने बच्चों द्वारा कला दिखा कर आपनी आजीविका के लिए कुछ रूपये बटोर और चल दिया अगले नुक्कड़ की और वाह रे जिन्दगी क्या कदर हैं, कला की एक तरफ जहां  स्टेज सजाकर बैठने के लिए कलाकारों के लिए गदृदे सजाये जाते हैं लाईट के लिए जनरेटर चलाया जाता हैं पंखे चलाये जाते हैं वही दुसरी तरफ ऐसे कलाकारों के लिए सड़क किनारे एक चटाई ही नसीब नही हो पाती हैं और उन्हें लोग अपने नाम को बड़ करने के लिए 100- 500 रू बतोर इनाम दे देते हैं तथा पार्टी के नाम पर उन्हें 20- 25 हजार रूपये भी दे देत हैं ओर उनकी आव भगत होती हैं वो अलग से। और इन बेचारों को 10 रूपये देने से ही कतराते हैं वाह रे कला!


खेल देखने के लिए जमा भीड़











आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

झांकी, नाचते- गाते किया विर्षजन,बगड़

 प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, बगड़

 गणेश महोत्सव विसर्जन झांकी के मन मोहक दृश्य पीरामल गेट ,बगड़

    जहां आकर मन को शान्ति मिले ,दुर्गाष्टमी पर बगड़ में सजा मां दुर्गे का दरबार

 

Wednesday, October 12, 2011

जहां आज भी लोग समय निकालकर आते हैं, प्रसिद्ध रामलीला, बगड़

आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं
बगड़ की प्रसिद्ध रामलीला के कुछ दृश्य

 दशहरे का अवसर पर आपको हर जगह गांव- गांव ढ़ाणी- ढ़ाणी में आपको इन दिनों रामलीला का मंचन होता नजर आ जायेगा।तों मैं भी आपको हमारे नजदीक की रामलीलाओं के अभीनय से अवगत करा रहा हूं , बगड़ की  रामलीला  श्री श्याम मण्डल प्रबंध समिति द्वारा चलायी जाती है। 
  यह रामलीला कितनी प्रसिद्ध रही हैं इसके बारे में मैं अपनी पहले की पोस्ट में बता चुका हूं

प्रसिद्ध हैं बगड़ की रामलीला



और इस के अभिनय का विडियों भी मैं पिछे की पोस्ट में दिखा चुका हूं (बगड़ की रामलीला चलचित्र
विभिषण का रोल अदा कर रहे हमारे मित्र  रोताश जी सैनी आंचल स्टूडियों

तथा श्री राम को रोल अदा कर रहे अशोक जी
आज भी  इस रामलीला का अभिनय वास्तव में दर्शको को  3 घंटे तक बैठने के लिए विवश किये रखता हैं ,पुरा रामलीला मैदान  दर्शकों से खचाखच भरा रहता हैं
जब मैं वहा पहुचा तो दृश्य चल रहा था 
"रावण द्वारा प्रताडित होकर विभिषण का रामादल में आना और श्रीराम जी द्वारा उन्हें गले लगाकर आराम से बैठाना तथा सब कुशलता के समाचार जानना और प्रेम भाव से उसे रामादल में शामील करना
और उधर रावण द्वारा मनोरजन के लिए नाच गान का प्रोग्रम करवाना"
रावण का  रोल अदा कर रहें शिवभगवान शर्मा जी





रावण  का बोलने का अलग ही अंदाज जो दातों तले अंगुली दबाने पर मजबुर कर देता हैं






ध्यान मग्न होकर रामलीला  देखते दर्शक



सभी दर्शक प्रेम भाव से ध्यान मग्न होकर रामलीला देख रहें थे









अगली पोस्ट में बगड़ के निकट रेखा वाली ढ़ाणी में चल रही रामलीला के कुछ दृश्य लेकर फिर हाजीर होता हूं तब तक के लिए इजाजत ......


आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, बगड़

 गणेश महोत्सव विसर्जन झांकी के मन मोहक दृश्य पीरामल गेट ,बगड़

 एक शाम गणपति बप्पा के नाम पीरामल गेट बगड़

  जहां आकर मन को शान्ति मिले ,दुर्गाष्टमी पर बगड़ में सजा मां दुर्गे का दरबार

 

Saturday, October 8, 2011

झांकी, नाचते- गाते किया विर्षजन,बगड़

 आपको व आपके परिवार सहित सभी देसवासियों को विजय दशमी ( दशहरा) की हार्दिक शुभकामनाएं
 फतेह सागर तालाब पर चले नो दिवसिय नवरात्रा महौत्सव में कल वहां पर स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा का विर्षजन भव्य झांकी के साथ नाचते गाते हुए
  पुरे बगड़ बाजार का चक्कर लगाते हुए फतेह सागर तालाब में ले जाकर किया गया ।झांकी में भक्त जनों की भारी भीड़ देखने को मिली  और
 नाचते गाते व मां के जयकारे लगाते भक्तजन
फतेह सागर तालाब में प्रतिमा का विर्षजन करते भक्तजन
 राह चलते भक्तजनों ने भी माता के दर्शनों का लाभ उठाते हुए प्रसाद ग्रहण किया ।































आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

गणेश महोत्सव विसर्जन झांकी के मन मोहक दृश्य पीरामल गेट ,बगड़

 एक शाम गणपति बप्पा के नाम पीरामल गेट बगड़

 गणेश चतुर्थी महोत्सव शुरू, पीरामल गेट,बगड़

 

जहां आकर मन को शान्ति मिले ,दुर्गाष्टमी पर बगड़ में सजा मां दुर्गे का दरबार

 

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