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Monday, October 1, 2012

वाघा (बाघा) बार्डर परेड,अमृतसर

 मां वैष्णो देवी यात्रा के दौरान अब हमारा अगला दर्शन स्थल था,वाघा (बाघा) बार्डर परेड,अमृतसर
हम स्वर्ण मन्दिर के दर्शन करने बाद अपनी बस में बैठकर अपने अगले दर्शन स्थल बाघा बोर्डर की तरफ बढ़ लिये  ये अमृतसर से 30 किमी दूर  भारत पाकिस्तान सीमा पर है। वहां पर हम तकरीबन 2.30 बजे पहुच गये वहा पुछने पर पता चला कि परेड  देखने के लिऐ इंन्ट्री 5 बजे से शुरू होगी हमारे पास काफी समय था
 इधर उधर घुमने के लिये पर वहा घुमते भी तो कहा ? एक तो दोपहर का समय दुसरा बॉडर का इलाका और सारा इलाका आर्मी इलाका था और चारो तरफ सीमा रेखा के चारो तरफ कंटीले तार ही तार दिखाई दे रहे थे  इसलिये इस इलाके में घुम तो सकते ही नहीं थे फिर भी मुख्य गेट से 500 मीटर पहले  दुकाने लगी हुई थी हम भी वहां पर अपना टाईम पास करने चले गये  आर्मी इलाका था
 इसलिये सड़क के दोनों तरफ काफी छायादार वृक्ष लगे हुये थे सो छाया की कोई दिक्कत नहीं आई, इधर उधर दुकानो पर घुमकर छोटी मोटी जानकारिया इक्ट्ठी की और यह भी पता चला सांय 6 बजे से 7 बजे तक परेड चलती हैं हमारी बस के यात्रियो ने यहा एक ढ़ाबा देखकर वहां जलपान गृहण किया और हमने भी थोड़ा बहुत नास्ता गृहण किया यहां सड़क के दोनो किनारो पर ठण्डे पेय पदार्थ और चाट फल वगैरह की स्टाले और रेहडिया लगी हुई थी हमने खिल्ली, अमरूद सलाद, भुट्टे वगैरह खाये और वहा थोड़ा बहुत घुमकर आनन्द लेते हुऐ अपना समय व्यतीत किया इस प्रकार समय बीतता गया और 4.30 बजे लोग लाइन में लगना शुरू हुये और देखते ही देखते वहाँ खासी भीड़ इकट्ठा होने लगी हमने भी अपने साथ आई महिला यात्रियों को लाइन मे लगाया और हमने बाद में पीछे से चलने का मानष बनाया क्योंकि सड़क पर धूप बहुत तेज थी इसलिए हमने सोचा जब भीड़ कम हो जायेगी तब चले चलेगें
 वहां प्रवेश द्वारा पर काफी धक्का मुक्की हुई आर्मी जवानों ने सबको लाईन से आने के निर्देश दिये और व्यवस्था को बनाये रखने के लिये डराया धमकाया भी अन्तः भीड़ कुछ कम हुई सो अब हम भी चल दिये स्वर्ण जयन्ती द्वार (बाघा बोर्डर) द्वार की तरफ परेड का अन्नद लेने के लिये।
 इस द्वारा के अन्दर की तरफ दोनों और सिढ़ीनुमा स्डेडियम बना हुआ है। जहां कई हजारो की सख्या में लोग बैठ सकते है। और वैसा ही स्टेडियम पाकिस्तान द्वारा की समने भी बना हुआ है।  देखते ही देखते पुरा स्टेडियम खचाखच भर गया।  हम बाद में पहुचे थे इसलिये हमें उपर वाली सिढ़ियो पर जगह मिली काफी तेज धुप थी  सामने पाकिस्तान की तरफ से भी पाकिस्तानी लोग (दर्शक) पधारने लगे और अपने देश के स्टेडियम में बैठ कर कुछ ही देर में होने वाली परेड का आनन्द लेने के लिये आतुर होने लगे।
 भारत की तरफ का पुरा स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था, तभी वहां के परेड आर्मी कमाण्डर ने तेज साउड के साथ देश भक्ति गीत बजाने शुरू किये तो स्टेडियम में भारत जिन्दाबाद, भारत माता की जय हो के जयकारे लगने लगे और सिटिया बजने लगी उस मसय का माहौल ऐसा था की कि शरीर का  रोम रोम खड़ा हो रहा था,  जयकारे पर जयकारे लग रहे थे, पुरे इलाके में जयकारे ही जयकारे गुंजने लगे सामने पाकिस्तान के स्टेडियम से भी जय-जयकार की आवाज गुंजने लगी पर उनकी तादाद कम थी इसलिए उनका  स्वर दब रहा था
 फिर माहैल को और सोमाचित बनाने कि लिये  परेड आफिसर (जो वहां परेड करवा रहा था) उसने हमारे देश का झण्डा तिरंगा हमारी तरफ से वहां देखने पधारी कुछेक लड़कियों जो आगे कि पक्ति में बैठी थी उनको हाथों में देकर मुख्य द्वारा की तरफ दोड़ाया गया तो जयकारों और सिटियों की आवाज और भी तेज गुंजने लगी फिर देश भक्ति धुन और गानों पर शुरू हुआ नाचने झुमने का दौर वैसे ये परेड का हिस्सा नहीं हैं लेकिन वहां के माहौल को रंगीन और और भी मनमोहक बनाने के लिये वे लोग ऐसा करते हैं आगे की लाइनों में बैठी लडिकियों  औरतों जो भी देश भक्ति गीतो पर नृतय कर सके उनको आगे बुलाते है और नृतय करवाते हैं ऐसा पहले नहीं होता था लेकिन आजकल होने लगा हैं शायद ये सब परेड़ देखने आये लोगों के मनोरंजन के लिये होने लगा है। देखते ही देखते सभी लोग देश भक्ति गानो पर रोमाचिंत होकर थिरकने लगे और यहां तक की अंग्रेज दर्शक भी इन गानो पर नाचने के लिये मजबुर हो गयें वहां का पुरा वातावरण देशभक्ति मय हो गया और ऐसा लग रहा था जैसे वहां बैठे लोगों में वीर रस उत्तपन हो गया हो चारो तरफ जयकारे ही जयकारे गुंजते रहे  ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा फिर शुरू हुई परेड जिसको वास्तव में पुरे देश से लोग देखने के लिये इतनी दुर आते हैं  यहां के आर्मी जवानों की परेड वास्तव में देखने लायक है। वो भारतीय आर्मी परेड गणवेश धारण किये हुये 6 फुटे जवान जयकारे और परेड मार्च की आवाज के साथ परेड शुरू करते हैं और मुख्य सीमा द्वारा की तरफ चलकर परेड का पदर्शन करते हैं उनके चलने का एक पंक्ति-बद्ध ढ़ग बहुत ही सुन्दर लगता हैं अबौर सबसे अच्छा उनका परेड के दौरान अपने सर के उपर तक जाता पैर बहुत ही अच्छा और तालिया बजाने पर मजबुर करने वाला करतब है।
 और सामने से पाकिस्तानी जवान भी परेड के लिये सीमा द्वारा तक आते हैं और दोनो तरु के जावान एक साथ परेड करते हैं और फिर कुछ समय के लिये सीमा द्वारा को खाला जाता हैं। और दोनो देशों के जवान हाथ मिलाते हैं और फिर गेट बंद कर दिया जाता हैं और सुबह और सांय की परेड के दौरान ही इस गेट को कुछ समय के लिये खोला जाता हैं बाकी समय ये गेट बंद ही रहता हैं और अंत में परेड कमाण्डर उदघोषणा करता हैं कि अब देश का राष्ट्रीय ध्वज उतारा जायेगा सो सभी लोग उसके सम्मान में अपनी अपनी जगह खड़े हो जाये  वहां उपस्थित सभी लोग खड़े हो जाते हैं और धीरे धीरे देस का झण्डा उतार लिया जाता हैं और जयकारे के साथ परेड़  खत्म की घोषणा कर दी जाती हैं और चारो तरफ जयकारे की आवजे गुंजने लगती है। और सभी लोग वापस अपने अपने गन्तव्य स्थान की तरफ चले जाते हैं कुल मिलाकर हमें यहाँ का कार्यक्रम विशेषकर परेड का कार्यक्रम बहुत ही अच्छा और मन मोहक लगा । वहां के दुकानदारो से पुछने पर ये जानकारी मिली कि -
 बाघा बोर्डर पर हर शाम भारत की सीमा सुरक्षा बल और पाकिस्तान रेंजर्स की सैनिक टुकडियां इकट्ठी होती है। विशेष मौकों पर मुख्य रूप से 14 अगस्त के दिन जब पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस समाप्त होता है और भारत के स्वतंत्रता दिवस की सुबह होती है उस शाम वहां पर शांति के लिए रात्रि जागरण किया जाता है। उस रात वहां लोगों को एक-दुसरे से मिलने की अनुमति भी दी जाती है। इसके अलावा वहां पर पूरे साल कंटिली तारें, सुरक्षाकर्मी और मुख्य द्वार के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता।
 अब हमें भी अपने गन्तव्य स्थान की तरफ जाना था साम हो चुकी थी सो हम भी अपनी बस की तरफ बढ़ लिये सभी यात्री जब बस के पास पहुच गये तब बस वहां से मां वैष्णो देवी के दरबार कटरा के लिये रवाना हुई  अब आपको अपनी अगली पोस्ट में माता के दरबार के दर्शन करवाएंगे, "प्रेम से बोलो जय माता दी" तब तक के लिए इजाज़त

क्रमशः



आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

घुमंत् फिरत चलो मां वैष्णो देवी के दरबार

अन्दाज अपना-अपना (मानव जाति के शौकीन आधुनिक पूर्वज)

स्वतंत्रता दिवस और भारत देश ??? स्वतंत्रता ???

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Monday, September 24, 2012

अमृतसर, स्वर्ण मंदिर दर्शन

मां वैष्णो देवी यात्रा के दौरान अब हमारा अगला दर्शन स्थल था अमृत सर स्वर्ण मन्दिर, जैसा की मैने अपनी पहली पोस्ट में बताया था, जलिया वाले बाग को देखने के बाद हम स्वर्ण मन्दिर के दर्शन करने के लिऐ पहुचे
स्वर्ण मन्दिर वास्तव में अपने आप में  अद्वितीय मन्दिर है यहां आकर मन को बहुत ही शान्ति मिलती है।
 यहा आकर हमने यहां बने विशाल सरोवरके शीतल जल में स्नान किया और दरबार साहिब के सामने अपना मत्था टेका तथा फिर यहा के वास्तुकला का घुमकर निरीक्षण किया और वहां सिढ़ियों तथा सिलाओ पर लिखे यहां के इतिहास और समय समय पर हुई गतिविधयों की जानकारी ली,  यहाँ रोजाना हजारों श्रृद्धालु दर्शनार्थ आते है।
लगभग 400 साल पुराने इस गुरुद्वारे का नक्शा खुद अर्जुन देव ने तैयार किया था। यह गुरुद्वारा शिल्प सौंदर्य की अनूठी मिसाल है। इस  मन्दिर में गुरु-ग्रंथ-साहिब ग्रंथ रखा हुआ है और हर समय गुरू वाणी की स्वर लहरी गुंजती रहती हैं
जिसे सुनकर दुखी से दुखी मन को शान्ति मिलती है यहाँ आकर और इस सरोवर के बीच बना ये मन्दिर सोने से जड़ा हुआ है इसी करण इसका नाम स्वर्ण मन्दिर पड़ा जिसके चारो तरफ सरोवर के पानी में लाईटे लगाई हुइ है। जिनकी रोशनी इसकी सुन्दरता में चार चांद लगा देती है। सरोवर से मन्दिर तक जाने के लिये एक पुल बना हुआ है जिसे होकर श्रृद्धालु अन्दर जाते है है।
कुल मिलाकर हमने यहां लगभग 1 घंटे तक घुमकर बहुत आनन्द उठाया  यहां पर सिखों की सेवा भावना देखने लायक है यहां हर समय लंगर चलता रहता है। और इस मन्दिर के बारे में आप सब जानते ही होगें फिर भी में अपको इसके सक्षिप्त इतिहास के बारे में थोड़ा सा बता ही देता हूं।
 श्री हरमंदिर साहिब (पंजाबी भाषा: ਹਰਿਮੰਦਰ ਸਾਹਿਬ; हरिमंदर साहिब), जिसे दरबार साहिब या स्वर्ण मन्दिर, भी कहा जाता है गोल्डन टेंपल के नाम से भी जाना जाता है
स्वर्ण मंदिर को हरमंदिर साहिब या दरबार साहिब भी कहा जाता है। इसके आस पास के सुंदर परिवेश और स्वर्ण की पर्त के कारण ही इसे स्वर्ण मंदिर कहते हैं। यह अमृतसर (पंजाब) में स्थित सिक्खों का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता हैसन 1589 ने गुरु अर्जुन देव के एक शिष्य शेखमियां मीर ने सरोवर के बीच में स्थित वर्तमान स्वर्ण-मन्दिर की नींव डाली। मन्दिर के चारों ओर चार दरवाज़ों का प्रबन्ध किया गया था। यह गुरु नानक के उदार धार्मिक विचारों का प्रतीक समझा गया। मन्दिर में गुरु-ग्रंथ-साहिब की, जिसका संग्रह गुरु अर्जुन देव ने किया था, स्थापना की गई थी। सरोवर को गहरा करवाने और परिवर्धित करने का कार्य बाबू बूढ़ा नामक व्यक्ति को सौंपा गया था और इन्हें ही ग्रंथ-साहब का प्रथम ग्रंथी बनाया गया।
गुरु अर्जुन साहिब, पांचवें नानक, ने सिक्खों की पूजा के एक केन्द्रीय स्थल के सृजन की कल्पना की और उन्होंने स्वयं श्री हरमंदिर साहिब की वास्तुकला की संरचना की। पहले इसमें एक पवित्र तालाब (अमृतसर या अमृत सरोवर) बनाने की योजना गुरु अमरदास साहिब द्वारा बनाई गई थी, जो तीसरे नानक कहे जाते हैं किन्तु गुरु रामदास साहिब ने इसे बाबा बुद्ध जी के पर्यवेक्षण में निष्पादित किया। इस स्थल की भूमि मूल गांवों के जमींदारों से मुफ़्त या भुगतान के आधार पर पूर्व गुरु साहिबों द्वारा अर्जित की गई थी। यहाँ एक कस्बा स्थापित करने की योजना भी बनाई गई थी। अत: सरोवर पर निर्माण कार्य के साथ कस्बों का निर्माण भी इसी के साथ 1570 ई. में शुरू हुआ। दोनों परियोजनाओं का कार्य 1577 ई. में पूरा हुआ था।
गुरु अर्जन साहिब ने लाहौर के मुस्लिम संत हजरत मियां मीर जी द्वारा इसकी आधारशिला रखवाई जो दिसम्बर 1588 में रखी गई।
स्वर्ण मंदिर का निर्माण कार्य सितंबर 1604 में पूरा हुआ। गुरु अर्जन साहिब ने नव सृजित गुरु ग्रंथ साहिब (सिक्ख धर्म की पवित्र पुस्तक) की स्थापना श्री हरमंदिर साहिब में की तथा बाबा बुद्ध जी को इसका प्रथम ग्रंथी अर्थात गुरु ग्रंथ साहिब का वाचक नियुक्त किया।यह मंदिर अपने आप में 40.5 वर्ग फीट है।
इसके दरवाज़ों पर कलात्‍मक शैली में सजावट की गई है। यह एक रास्‍ते पर खुलता है जो श्री हरमंदिर साहिब के मुख्‍य भवन तक जाता है। यह 202 फीट लंबा और 21 फीट चौड़ा है। इसका छोटा सा पुल 13 फीट चौड़े प्रदक्षिणा (गोलाकार मार्ग या परिक्रमा) से जोड़ा है। यह मुख्‍य मंदिर के चारों ओर घूमते हुए "हर की पौड़ी" तक जाता है। "हर की पौड़ी" के प्रथम तल पर गुरु ग्रंथ साहिब की सूक्तियां पढ़ी जा सकती हैं। वैस ये जानकारी वहां पर जगह जगह लिखी हुई है मैने पन्ने पर लिखी भी थी,पर मैंने पर लिखने और अशुद्धियों से बचने की दृष्टि से विकीपिडिया से ली है।

  इस सरोवर में तैरती रंग-बिरंगी मछलियां इस मन्दिर में आने वाले दर्शको के आकर्षक का केन्द्र बनती हैं इस शीतल व पवित्र जल में तैरती ये मछलियां बहुत ही सुन्दर लगती है।

यहाँ पर घूमने के बद हम निर्धारित समयानुसार अपनी बस के पास पहुँचें और जब सभी यात्री आ गये तब बस में बैठकर बाघा बार्डर की तरफ चल दिये क्योंकि हमारा अगला दर्शन स्थल था बाघा बार्डर जो पाकिस्तान और भारत की सीमा पर स्थित हैं
बाघा बार्डर पर होने वाली परेड और वहा के सचित्र दृश्यों के साथ अगली पोस्ट के साथ फिर हाजिर होता हू। तब तक के लिये इजाज़त.... क्रमशः


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