सूचना

यह वेब पेज इन्टरनेट एक्सप्लोरर 6 में ठीक से दिखाई नहीं देता है तो इसे मोजिला फायर फॉक्स 3 या IE 7 या उससे ऊपर का वर्जन काम में लेवें
Showing posts with label श्री कृष्ण जन्माष्टमी. Show all posts
Showing posts with label श्री कृष्ण जन्माष्टमी. Show all posts

Saturday, August 24, 2019

कानजी एकर फेर पाछा आज्यो,सब कुछ बदलग्यो

सभी देशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
एक राजस्थानी  कविता पढ़ने को मिली भाव बहुत ही मार्मिक ओर समय परक है थे भी पढज्यो

आठ तो पटराण्यां थारे
राधा रुकमणं राणीं।
अठै एक इक्कीस बरोबर
दिनभर खेंचाताणीं।

आप तो माखण मिसरी खांता
म्हैं खावां हां मेगी।
थारा मन री पूरी होगी अर
म्हारे मन में रेगी।

मात जसोदा मिक्सी लेली
नहीं माखण नहीं मटका।
आप तो लूट लूट कर खांता
म्हांनें आवे भटका।

नहीं रिया अब ऊंखल मूसल
नहीं रिया अब छींका।
दरसण दुरलभ होग्या असली
दूध दही अर घी का।

गोपियां मोडर्न होयगी
नहीं सुणे बे बंशी।
राजनिती में घुसबा लाग्या
थारा यादव वंशी।

आज थारी गायां रा बछडा
बूचडखानां जावे।
ब्रह्माजी नें केजो आंनें
ब्रह्मलोक ले जावे।

नहीं मांगे बो चांद खिलोणों
नहीं माखणं अर रोटी।
आज कन्हैयो नहीं केवे है
कबहुं बढेगी चोटी।

न तनसुख है न मनसुख है
सब धनसुख नें है चावे।
नवलख धेनु बेच नंदजी
डेरी अबै चलावे।

कुंजन वन मैदान होयग्या
नहीं कदम री छायां।
प्लास्टिक री थेल्यां चाबे
नंदगांव री गायां।

कृष्ण कानजी भारत मे थे एकर पाछा आज्यो।
मुरली मधुर बजाकर कान्हां
गीता रो ग्यान सुणाज्यो।

Sunday, September 1, 2013

भक्तों के आगे झुमें (नाचे) भगवान कन्हैया और भोले शंकर,श्याम मन्दिर बगड़

 जी हां इस कल युग में भी भक्तों ने भगवान को नाच नचा ही दिया यह आपको इन तस्वीरों को देखकर विश्वास हो जायेगा की यह बात सत्य हैं , यह बात है श्री कृष्ण जन्माष्टमी की रात्री की यानि  28 अगस्त 2013 बुधवार की रात्री की हालाँकि  कारणवश पोस्ट लिखने में देरी हो गई इसके लिए क्षमा चाहता हूं।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बगड़ में स्थित श्याम मन्दिर के उपर आयोजित किये गये भव्य कार्यक्रम में खुद भगवान शंकर व भगवान श्री कृष्ण ने अपनी  प्रेयसी राधा के संग अलग भजनों पर ठुमके लगाये और अपने भक्तों का मन मोह लिया एक तो सतयुग में भक्तों को भगवान को मन मोहने उसे रिझाने के लिए भांति भांति के जतन करने पड़ते थे और आज भगवान ने खुद भांति भांति का नृत्य करे अपने भक्तो के मन को प्रफुल्लित किया
और श्रृद्धालुओं को 4 घंटे तक अपने मोह में फांसे रखा और आश्चर्य चकित करने वाले करतबों से आनंदित किया 
कार्यक्रम इतना मनमोहक व अच्छा था जिसकी तुलना और व्याख्या के लिए मेरे पास अल्फाज ही नहीं बन पा रहें हैं इस कार्यक्रम को देखने के लिए बगड़ की जनता के साथ साथ आप पास के  गांवे के कई लोग भी आये और भाव विभोर होकर इस रसमयी गंगा में गोते लगाये। 
प्रोग्राम अलग अलग झांकियो के रूप में हुआ जिसमें  श्रीमहादेव आर्ट सिरसा व रामू राजस्थानी की पार्टियों ने अपनी अपनी मण्डली द्वारा कई अचंभित करने वाली झांकिया प्रस्तुत की 
जिनमें राधा कृष्ण नृत्यए शिव काली ताण्डव नृत्य कृष्ण सुदामा का दृश्य, शेषनांग  पर नृत्य , बाल कृष्ण की विभिन्न लीलाएं  आदि अनेक प्रकार की झांकियो द्वारा दृश्को का मन मोह लिया और  ये झांकिया साक्षत प्रत्यक्ष जैसी ही लग रही थी इन कलाकारों को देखकर ऐसा लग रहा थे कि वास्तव में ये कलाकार अगर इनको कोई अच्छा ट्रेनर मिल जाये तो ये बड़े पर्दे के लायक कलाकार है।
सबसे अचंभित करने वाली झांकी भगवान भोले शंकर की थी शंकर बने कलाकार जो वास्तव में भगवान शंकर के प्रत्यक्ष रूप लग रहे थे
 इन्होने भगवान की तरह सांप यानी शेष नाग भी बिलकुल असली की अपने मस्तक पर लिपटा रखा था  
जब वो वहां बने शिव.लिंग से निकलकर नाचते हुए स्टेज पर आये तो दृश्को ने अपने दातों तले अुगंली दबा ली उनकी वो मनोरम वेशभुषा वो नृत्य का ढ़ग वास्तव में मन मोहक लग रहा था उपर से गले में असली सर्प को देखकर जनता के रोंगटे खड़े हो  गये 
 और पानी में शेषनाग की क्षत्र छाया में बैठे भगवान विष्णु बहुत ही सुन्दर लग रहें थैं  लोग उनके इस रूप का देखकर अपने आप को धन्य मान रहें थे। इनका 4 घंटे तक पानी में बैठे रहना काबिले तारीफ ही था  नन्हें राधा कृष्ण की लीलाऐ भी मन मोहक थी

 और अंन्त में कृष्ण जन्म की लीला के साथ ही कार्यक्रम की समाप्ति की घोषण हुई और सभी श्रृद्धलु भक्तो को प्रसाद वितरण कर घर भेजा गया और चारो तरफ श्री कृष्ण  भगवान के जयकारे लगने लगें।

श्रद्धालुओं  में सबेस ज्यादा संख्या यहां औरतो की देखने को मिली




आज के लिए बस इतना ही फिर मिलते है गोगा जी के मेले में हुई कुस्ती की पोस्ट के साथ....






आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

रक्षाबंधन त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाएं,बधाईयां

 स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं 

ले ल्यो पट्टी बरतो पढ़णों जरूर है,लक्ष्य का स्कूल

श्री डेयरी वाला बालाजी मन्दिर के पूर्व पुजारी की पुण्य तिथि पर मूर्ति स्थापना,बगड़

 

लक्ष्य

Wednesday, August 28, 2013

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व बनाम/ (केसरिया)

 सबसे पहले आप सभी  देशवासियों, दोस्तों,ब्लॉग जगत के सभी पाठकों ,ब्लॉग मालिको को हमारी तरफ से देश भर में आज मनाये जा रहे जन्माष्टमी पर्व की हार्दिक बधाईयां
 वैसे गावों में यह त्यौहार "केसरिया" नाम से मनाया व जाना जाता है, इस दिन खिर चुरमें का भोग लगाकर केसरिये की पुजा की जाती है। केसरिये के दिन केसरिये के रूप में गांव के लोग खेजड़ी (जांटी) की हरि झड़ी(डाली) को केसरिया मानकर उसकी पूजा करते है। इसके बारे में एक कहावत है कि जब  गोगापीर के जन्म के पहले गेरू गोरख.नाथ जी पाताल लोक से गूगल लाने के लिए गये थे और वहां गुरू गोरख नाथ जी ने अपनी माया के चक्र में डालकर पाताल लोक के नाग राज को प्रसन्न किया और वहां से गूगल लेकर आये जब पिछे पिछे पाताल लोक के  नाग-राज और उनकी रानी गोरख-नाथ जी का पीछा करते करते भूमि लोक पर आ गये तो उस गूगल को उनसे छुपाने के लिए  गोरख नाथ जी ने उस गुगल को जांटी (खेजड़ी) में बनी खोखर में  और गोगापीर के जन्म की  कहानी बताकर इस गुगल की  रक्षा करने और इसकी खुशबू नाग.राज तक न पहुचने देने की प्रार्थना जाटी से की थी और जांटी ने उस समय ऐसा बताया जाता है कि उस गूगल को जाटीं ने अपने अन्दर समाहित कर लिया था तथा उसकी खुशबू तक बाहर नहीं जाने दी और जब नाग.राज ने गोरख नाथ की तलाशी ली तो उनके पास वो गुगल नहीं मिली तथा उन्हे बिना गुगल के वापिस पाताल लोक लौटना पड़ा था तथा फिर गोरख नाथ  जी ने जाटी से वो गुगल वापिस मांगी तो जांटी ने उसे गुरू गौरख नाथ जी को अपने पेट से निकाल कर दिया था इस इस प्रकार उस गुगल की रक्षा करने पर गुरू गोरख नाथ जी ने जाटी को यह वरदान दिया था कि तेरी पूजा गोगापीर के जन्म से 1 दिन पहले की जायेगी और फिर गोगा जी की पूजा की जायेगी। क्योकि गोगाजी के गुगल का जन्म सबसे पहले जांटी की कोख से हुआ था उसके बाद उनकी माता की कोख से हुआ  इस लिए इसी कथा के आधार पर गावों के लोग गोगा पीर के इस त्योहार से 1 दिन पहले ये कसरिया का त्यौहार इसी रूप में मनाते आ रहे है।
 और इसके अगले दिन गौगानवमी यानि गोगापीर जी का त्यौहार "गुगा" मनाया जाता हैं जगह जगह गोगाजी की मेडी यानि (गोगाजी  देव स्थान) पर मेला भरता है जहां आस पास के गांव के लोग आकर गोगाजी के मेडी पर धोक लगाते है और मेले का भरपूर आनन्द लेते  है ।सबसे बड़ी बात ये की गोगाजी के इस त्यौहार को हिन्दु और मुसलमान दोनो ही धर्म के लोग मानते है। तथा पुजते भी है। 

हमारे गांव में भी गोगा जी की तीन मेडिया है। दो गांव के दोनो तरफ एक पूर्व में तथा एक पश्चिम में  और एक गांव के बीच में है। 
मेरे गांव की पश्चिम दिशा वाली गोगा मेडी
जिनके बारे में मैने अपने गांव की पिछे की पोस्टों में लिखा बताया हुआ हे।  इस गोगा  नवमी के दिन पश्चिम दिशा वाली मेडी पर गोगापीर का विशाल मेला भरता हैं जहां हमारे गांव सहित आस पास के के हजारों श्रद्धालु भक्त अपनी श्रद्धा के साथ गोगाजी के दर्शन कर अपना माथा टेक अपने परिवार के कल्याण की कामना करते है और मेले का अनन्द लेते हैं और मेले में कुस्ती का आयोजन भी किया जाता है हर विजेता को नगद इनाम से नवाजा जाता है। पहले तो कुस्ती के अलावा कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते थे लेकिन आजकल गांव में भी राजनैतिकरण हो गया और बाकि सब रश्में बन्द हाने लग गई है बस कुस्ती बाकि हैं
अगर अबकी बार मुनासिब हुआ तो आपको कुस्ती की फोटो व आगे की जानकारी से रूबरू करवाऊगां तब तक के लिए इजाज़त...

आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

 स्वतंत्रता दिवस और भारत देश ??? स्वतंत्रता ???

ले ल्यो पट्टी बरतो पढ़णों जरूर है,लक्ष्य का स्कूल

श्री डेयरी वाला बालाजी मन्दिर के पूर्व पुजारी की पुण्य तिथि पर मूर्ति स्थापना,बगड़

 

लक्ष्य

Friday, August 10, 2012

छोटो सो प्यारो सो म्हारो मदन-गोपाल,जन्माष्टमी


आप सभी  देशवासियों, दोस्तों,ब्लॉग जगत के सभी पाठकों ,ब्लॉग मालिको को हमारी तरफ से जन्माष्टमी की   
हार्दिक बधाईयां


हमारे नगर बगड़ में भी पीरामल गेट के पास  आज कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही हैं





मौहल्ले के बच्चे बड़े हर्षोल्लास से यह त्योहार मना रहें हैं और रात्रि को भजन व कीर्तन होगा। 


















आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

मायड़ भाषा राजस्थानी री शान बढ़ावण हाळा ब्लॉग

सावन की पहली झमाझम मानसूनी वर्षा

रोज सुबह की मस्ती खरगोश के बच्चों के साथ, लक्ष्य

 

चलायें अपनी मर्जी से अपने कम्प्यूटर की विन्डोज

  सोनू की जिद और नाहरगढ़ दर्शन,जयपुर

मेरे बाप पहले आप( लक्ष्य का बाल हट )

लक्ष्य

अन्य महत्वपूर्ण लिंक

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...