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Tuesday, September 5, 2017

क्या आज का शिक्षक गुरु कहलाने लायक है? शिक्षक दिवस

आज  हम आये दिन न्यूज़ में देखते है फलां स्कूल में फलां शिक्षक ने स्कूल की छात्रा केसाथ किया  शर्मनाक ,गलत काम गाव वालो ने की पिटाई या शिक्षक लापता आये दिन ऐसे भेड़ियों की तस्वीरे शोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है  इनके बारे में क्या लिखूं इनकी चर्चा करते हुए भी शर्म आती है ये पूरे गुरु समाज को कलंक लगते है बेचारे भले गुरुवो को भी शर्म आती है इनके करतूत देख कर ओर शिक्षा के मामले में ये कितने विद्वान है ये भी आपको बताने की जरूरत नही है आप इनके इंटरवयू के वीडियो फेस बुक ओर व्हाट्सअप पर देखते ही है इनको देश की राजधानी का नाम तक मालूम नही ओर तो कइयों को तो अपने मुख्यमंत्री का नाम तक नही मालूम लिखने में तो इनका कोई जबाब नही इनको ABCD की स्पेलिंग तक नही लिखनी आती शुद्ध पढ़ना तक नही आता और ये सरकार से  तनख्वा लेते है 30 हजार लानत है ऐसी सरकार पर जो रिश्वत ले कर ऐसे शिक्षक भर्ती कर लेती है  अगर इन गन्दे भेडियो के सबूत चाहिए तो मेरे से मांग लेना मेरे पास पिछले दिनों आये सभी वीडियो और फोटोज ऑडियो मैजूद है पर मै यहां डाल नही रहा क्योकि आप सभी ने वो देखे भी है और मैं ऐसे गन्दे लोगो के लिए अपना स्पेश अपना ब्लॉग गन्दा नही रखना चाहता अगर किसी को चाहिए तो प्रशनल ले सकता है इन्हें हटाना ओर सजा दें सरकार की ज़िमेदारी है पर वो छूट पुट सजा देकर फिर बहाल दक देती है
खैर मैं भी कहा इन भेडियो के चक्कर मे सुबह सुबह अपना दिमाक खराब कर रहा हु
अब बात करते है उन शिक्षकों को जो आज भी सही मायने में गुरु शब्द की महिमा बनाये रखे हुए है चाहये तादाद में कम ही ही पर है तो सही और आज 5 सितम्बर है शिक्षक दिवस है मेरी तरफ से मेरे उन सभी गुरुजनो को चरणवन्दन
गुरु की वंदना में उन महान संत कबीर दास जी के कुछ दोहे याद आ गए जिन्होंने आज से कई सालों पहले गुरु की महिमा को चित्रित किया था गुरु को सर्वश्रेष्ट का दर्जा दिया था हालांकि आज कल कुछ गुरु समाज और गुरु नाम पर कंलक लगा रहे है मेरा उनसे अनुरोध है सुधर जावो ओर गुरु शब्द की महिमा को समझो कि गुरु क्या है?

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः
गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः
गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।
गुरू बिन ज्ञान न उपजै, गुरू बिन मिलै न मोष।
गुरू बिन लखै न सत्य को गुरू बिन मिटै न दोष।।
गुरू पारस को अन्तरो, जानत हैं सब संत।
वह लोहा कंचन करे, ये करि लेय महंत।।
गुरू कुम्हार शिष कुंभ है, गढि़ गढि़ काढ़ै खोट।
अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट।।
शिक्षक दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाये

आपके पढ़ने लायक यहां भी है। 

कानो सुनी को होते देख लिया बुंदिया बाबा बगड़

लोकदेवता जाहरवीर गोगाजी महाराज

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लक्ष्य

Tuesday, August 22, 2017

कानो सुनी को होते देख लिया बुंदिया बाबा बगड़




बगड़
सुना था आज होते देख लिया इसे चमत्कार कहू या लोगों की आस्था
बगड़ में चंद्रनाथ जी आश्रम के पीछे मनियरो की कब्रो में एक बाबा का दरबार है जिनको बगड़ वासी बुंदिया बाबा के नाम से ही जानते है वैसे इनका नाम अलिशहीद बाबा है इनका इतिहास कई सौ सालो पुराना बताया जाता है वो एक सिद्ध पुरुष  फकीर बाबा थे उनकी कही सब बातें सच होती थी उनका देहांत हुवा ओर उनकी समाधि या मज़ार उसी कब्रगाह में  बनी हुई है। लोगों का ऐसा मानना है जब पुराने जमाने मे बारीश नही होती थी तो गाव के लोग इकट्ठा होकर बाबा की मजार पर खिचड़ा ओर मीठे चावल बनाकर बाटते थे ऐसा बताया जाता है जब तक वो कड़ाई खत्म होती यानी लोग खीचड़ा या चावल खाते उससे पहले पहले बरसात आ जाती थी और लोग हाथ ओर चलु उस बरसात से ही धोते ओर करते थे ऐसे सिद्ध पुरुष थे बाबा कालांतर में वह मीठे चावल बाटे जाने लगे और बाबा को बुंदिये बहुत पसंद  थे इसलिए बाद में बुंदिये बाटे जाने लगे। अब तो काफी सालो से सब कुछ बन्द ही था।लोग जैसे उन्हें भूल ही गए थे।
इन दिनों बारिश न होने की वजह से बगड़ ओर आस पास के इलाके की फसलें नष्ट हो रही थी तो मार्किट में बैठे बैठे यू ही बारिश की  चर्चा चल रही थी तो मुझे उनके चमत्कार के बारे में पता चला मैन सोचा नेकी ओर पूछ पूछ क्यो न बाबा को ही याद किया जाए ताकि सुख रही व  बर्बाद हो रही फ़सलो को बचाया जा सके और बाबा के चमत्कार की आजमाइस भी हो जाये तो मैंने मार्केट में प्रपोजल रख दिया और तुरन्त 11 किलो लड्डू बाबा के दरबार मे चढ़ा कर बाजार में बाटे ओर शाम को ही हल्की बूंदा बांदी हुई मुझे विश्वास होने लगा कुछ लोगो ने कहा लड्डू नही बाबा को बुंदिये ज्यादा पसंद है तो हम मार्केट वालो ने फिर से पैसे इकट्ठा करके 22 किलो बुंदिये बनवाये ओर बाबा के दरबार मे जाकर मैंने अपने हाथों से बाबा को भोग लगाया और बाबा से अरदास की की है बाबा जल्दी बारिश करवा फ़स्लो को नष्ट होने से बचा ओर आज भी तेरे होने का सुबूत दे।मेरे साथ पुरुषोत्तम जागिड़ कालू बुंदेला ,धर्मेंद्र बुंदेला ,सीताराम, रजनीश सैनी भी बाबा के दरबार गए थे दोस्तो आज बाबा ने अपने होने का सबूत दे दिया है आज बगड़ में 10-15 अगुल बारिश हो गई जो फ़सल दो बूंदो के लिए तरस रही थी वो आज तरबतर हो है।आप मानो या न मानो ये मेरा खुद का आजमाया हुवा चमत्कार है ।कल ही बुंदिये बाटे ओर आज जोरदार बारिश हो गई हालांकि तुरन्त बरसात वाला काम तो नही बना शायद ये कलयुग का प्रभाव हो सकता है या काफी दिनों तक बाबा को याद

न करने पर बाबा की नाराज़गी हो सकती है आज दूसरे दिन बारिश जरूर हुई है अब आप विश्वास करो न करो मुझे विश्वास है मेने आजमा के देख लिया है।
अब आपको बाबा की मज़ार के दर्शन करवा देता हूं
 



प्रेम से बोलो बुंदिया बाबा उर्फ अलिशहीद बाबा की जय
By :-
Surendra Singh Bhamboo   सुरेन्द्र सिंह भाम्बू

आपके पढ़ने लायक यहां भी है। 


लोकदेवता जाहरवीर गोगाजी महाराज

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