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Tuesday, June 15, 2010

कुदरत का कमाल चूहे के कांटेदार बाल

मेरे द्वारा हाथ लगाये जाने पर अपनी कोटेदार त्वचा के कांटे खडै किये


दोस्तों शेखावाटी क्षेत्र में प्रायः पाया जाने वाला काँटेदार चूहा (झाऊ चूहा) यह जन्तु अपने पुरे शरीर पर नुकीले कांटे लिए होता है इसका मुँह छोटा सा नुकीला होता है छोटे - छोटे कान होते है। दो छोटे छोटे पंजे होते है।   
अपना मुँह दिखाता हुआ और चलता हुआ
एक शाम मैं अपनी दुकान से घर को जा रहा जब मैं घर पहुंचा तो मैने कुछ चिक.चिक. सूँ. सूँ. का शोर सुना मैने बाईक रोक कर देखा तो एक जन्तु सांप से लड़ रहा हैं और उसने सर्प को लगभग घायल ही कर दिया था मैं जैसे ही पास गया तो पता चला वह और कोई नहीं यही जन्तु झाऊ चूहा था, जिसके शरीर पर नुकीले कांटे थे। मेरे पास जाने पर वह छुपने के लिए दौड़ा तब जाकर सांप की जान छुटी और जब तक मैं लकडी या कोई वस्तु सर्प को मारने के लिए लाता सर्प भी गायब हो चुका था लेकिन यह चूहा ज्यादा दूर नही जा सका क्योंकि यह ज्यादा तेज नहीं दोड़ता मनुष्य या किसी भी जानवर जिसका उसे डर होता है उसकी आहट या आवाज सुनकर जहां होता है वहां से पांच चार फिट दूर जाकर दुबक कर बैठ जाता है। उसने भी वैसे ही किया मेरे घर की दिवार से सटक कर दुबक गया जब मैंने उसको हाथ लगाया तो उसने अपने  नुकीले कांटे खड़े कर दिये जो मेरे हाथों में चुभने लगे। फिर मैने बैग में  से अपना कैमरा निकाला (जी हां मैं एक फोटो ग्राफर का कार्य करता हूं बगड़ में मेरी स्टूडियों की दूकान ‘‘श्री नेशनल कम्प्यूटर आर्ट एण्ड डिजिटल स्टूडियो के नाम से है) और उसके फोटो उतार लिये।  (दोस्तों मुझे दुःख होगा कि मैं सर्प और झाऊ चूहे की लडाई की तस्वीरे नहीं ले सका) दोस्तो इस जानवर से किसी भी प्राणी को डर नहीं है क्योकि यह किसी को काटता नहीं है। अपना जीवन यापन इधर उधर घुमफिर करके छोटे मोटे किड़े मकोड़े खाकर अपना पेट भर लेता है।  और खतरनाक जानवर सर्प, नेवला जैसे जानवरों से बचाव के लिए क़ुदरत ने इसके शरीर पर  नुकीले कांटेदार त्वचा दी है। जिससे यह विपत्ति के समय अपनी रक्षा कर सके यह विपत्ती के समय अपना छोटा सा मुँह और पंजे जैसा कि फोटो में दिखाया गया है
अपने मुहँ को व पंजों को छुपाता हुआ
   पनी त्वचा में छिपा लेता है, और बाकी बचतें है, कांटे जिनको किसी का डर नहीं। यह सर्प को मार डालता है वह ऐसे कि  यह छुपकर सर्प के उपर लुढ़कने लगता है और कांटे सर्प के शरीर में चुभने से खुन बहने लगता हे। और जब सर्प गुस्से में आकर अपना फन या मुह उसे काटने के लिए उसके शरीर पर मारता है तो उसका मुँह नुकीले कांटों से कट जाता है और अन्तः उसे हारकर अपने प्राण गंवाने पड़ते है।  ऐसे यह जन्तु सर्प,नेवले जैसे खतरनाक जंतुओं से अपनी रक्षा करते हुए लड़ भी सकता है और उन्हें मार भी सकता है।
   आजकल यह जन्तु प्रायः लुप्त सा होता जा रहा है। गांवों में लोग इसके बारे में एक कहावत कहते और करते भी है वे या तो इसे मार कर या अपने आप मरे हुए झाऊ चूहे के शरीर की कांटेदार त्वचा की धुनी (उसे किसी पात्र में जलाकर जलने से उठ ते हुए धुएँ ) को अपने खेत में सब्जी बगैर की क्यारियों में घुमाते है कहते उससे सब्जी के पौधों में पैदावार या फल अच्छे लगेंगे।  
   

5 comments:

  1. सुरेन्द्र जी इसको हिन्दी में सेही के नाम से जाना जाता है | यह अब लुप्त प्राय हो गया है |

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  2. ham ise saahi kahte hain...pahle iske baalon se kalam bhi ban jaati thi...
    ab nazar nahi aata...
    aapka aabhar..

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  3. http://en.wikipedia.org/wiki/Hedgehog
    ya hedgehog to naheen ?

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