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Wednesday, May 2, 2018

राजस्थान का मेवा फल सांगरी स्वाद बे मिशाल

 राजस्थान के  कल्प वृक्ष को कौन नही जानता? खेजड़ी ये राजस्थान  का  राज्य वृक्ष भी है। जिसके बारे में और इससे होने वाले लाभ व फायदो के बारे में मैं  अपनी पहले की पेास्ट में लिख चुका हूं इसका व्यापारिक नाम कांडी है अंग्रेज़ी में यह प्रोसोपिस सिनेरेरिया नाम से भी  जाना  जाता है। इसके जो फूल  लगता  है उसे मींझर कहते  है।तथा इसका फल   को सांगरी कहते  है। जिसकी सब्जी बनाई जाती है। इसका फल सुखने पर खोखा कहलाता है।  जो सूखा मेवा है
 आज मै आपको बताने जा रहा हूं इस वृक्ष से मिलने वाले राजस्थान में ही नहीं बल्की पुरे देश, विश्व में सबसे प्रसिद्ध  फल  सुखे मेवे के नाम से प्रसिद्ध फल सांगरी के बारे में जो खेजड़ी वृक्ष की उत्पपन करता  है।

आप सभी ने राजस्थान में खेजड़ी वृक्ष पर लगने वाले मेवे फल जिसको सांगरी कहा जाता है उसकी सब्जी और कढ़ी का स्वाद तो लिया ही होगा ,शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने इसका स्वाद नही चखा होगा,ओर जिसने नही चखा वो दुर्भाग्यशाली भी कहा जाता सकता है इसकी सब्जी और कढ़ी अति स्वादिष्ठ जिसका नाम सुनते ही मुह में पानी आ जाता है ये फल आजकल गर्मियो में राजस्थान में प्रचुर मात्रा में लगता है हालांकि आजकल कम होती जा रही है पर गावो में बहुतायत मिल जाती है इसको सूखे मेवे के नाम से भी जाना जाता है इस हरी सांगरी सब्जी बनाई जाती है कढ़ी बनाई जाती है जिसका स्वाद बेमिशाल होता है और हरी सांगरी को पानी मे उबाल कर धूप से सुखाया जाता है और उससे उसकी सुकेडी बन जाती है जिसको बाद में कभी भी उबाल कर सब्जी या कढ़ी बनाई जा सकती है इसलिए आजकल इसको तोड़कर इकठ्ठा कर लिया जाता है
इसकी सब्जी विश्व में भी प्रसिद्ध  है। इसकी सब्जी में अगर कैर (टिटियां) और मिला दिया जाये तो क्या कहना  वो कैर सांगरी की सब्जी कहलाती है। 
आजकल शादी विवाह में भी कैर सांगरी की सब्जी बेड़ चाव से बनाई जाती  है।।
हमारे खेत में भी कई खेजड़ी वृक्ष के पेड़ो के इस साल सांगरी लगी हुई है तो  इसके स्वाद को लेने के लिए मैने  भी  आज मेरे खेत मे लगी सांगरी को तोड़ के इकट्ठा कर लिया है दो चार दिन तो इसकी हरि सब्जी और कढ़ी का लुफ्त उठाया जाएगा फिर इसको सूखा लिया जाएगा फिर जब भी  इच्छा  हो तो इसकी सब्जी  बना  ली जायेगी। 


वैसे कई कई साल  इस फल  को भी रोग लग जाता जिससे इसके फूल मिझर के   ठिडरे बन जाते है और सांगरी नहीं लगती पर इस साल ये अच्छी तरह लगी हई  है।




अगर किसी दोस्त ने इसका स्वाद नही चखा है तो मेरे घर आमंत्रित है सांगरी की सब्जी खाने के लिए
लीजिये खेजड़ी वृक्ष के मेवे का स्वाद।


कफी दिनों से कोई पोस्ट नहीं लिख पाया इसके लिए क्षमा चाहुगा खेत के काम और दुकान में काम में अति व्यस्त रहा
आज के लिए बस इतना ही आगे फिर कभी .......









 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

लक्ष्य



Thursday, March 30, 2017

खेजड़ी वृक्ष की महिमा जो आज खतरे में है

सभी क्षेत्रवासियों, मित्रों को को 30 मार्च राजस्थान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं  और आज  राजस्थान के लोक पर्व गणगौर  का त्यौहार है। तो आप सभी को गणगौर पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं  
मैने कुछ दिन पहले एक पोस्ट डाली थी की राजस्थान का कल्प वृक्ष  राज्य वृक्ष खेजड़ी आज खतरे में है। उसी पर आज नेट पर विचरण करते करते मेरे मित्र  जी आर ढ़ाका फतेहपुरिया की एक खेजड़ी पर रचना पढ़ने का मिली  अच्छी रचना है। रचना में दर्शाया गया है कि किस प्रकार ये वृक्ष खुद दुःख सहन करके भी दुसरो को यानि हमें सुख प्रदान करता  है।   मुझे अच्छी लगी और आपको कैसी लगती हैं  आप जाने

राज्य-वृक्ष खेजड़ी की महिमा

म्हारै मरूधर रो है सांचो,
सुख दुख रो साथी खेजड़लो।
तिसां मरै पण छायां करै है,
करड़ी छाती खेजड़लो।।
आसोजां रा तप्या तावड़ा,
काचा लोहा पिघळग्या,
पान फूल री बात करां के,
बै तो कद ही जळबळग्या,
सूरज बोल्यो छियां न छोडूं,
पण जबरो है खेजड़लो,
सरणै आय'र छियां पड़ी है,
आप बळै है खेजड़लो।।
सगळा आवै कह कर ज्यावै,
मरु रो खारो पाणी है,
पाणी क्यां रो ऐ तो आंसू,
खेजड़लै ही जाणी है,
आंसू पीकर जीणो सीख्यो,
एक जगत में खेजड़लो,
सै मिट ज्यासी अमर रवैलो,
एक बगत में खेजड़लो।।
गांव आंतरै नारा थकग्या,
और सतावै भूख घणी,
गाडी आळो खाथा हांकै,
नारां थां रो मरै धणी,
सिंझ्या पड़गी तारा निकळ्या,
पण है सा'रो खेजड़लो,
'आज्या' दे खोखां रो झालो,
बोल्यो प्यारो खेजड़लो।।
जेठ मास में धरती धोळी,
फूस पानड़ो मिलै नहीं,
भूखां मरता ऊंठ फिरै है,
ऐ तकलीफां झिलै नहीं,
इण मौकै भी उण ऊंठां नै,
डील चरावै खेजड़लो,
अंग-अंग में पीड़ भरी पण,
पेट भरावै खेजड़लो।।
म्हारै मुरधर रो है सांचो,
सुख दुख साथी खेजड़लो।
तिसां मरै पण छयां करै है,
करड़ी छाती खेजड़लो।।

 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

लक्ष्य


Thursday, December 22, 2016

राजस्थान का गौरव कल्प वृक्ष कहा जाने वाला वृक्ष खेजड़ी (जांटी) है खतरे में ??

 राजस्थान के राज्य वृक्ष  खेजड़ी (जांटी) शब्द और इस पेड़ से राजस्थान में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो  अपरिचित होगा ये हमारा सोभाग्य है कि ये वृक्ष मुख्यरूप से हमारी शेखावाटी क्षेत्र में अधिक मात्रा में पाया जाता है। 
इसे थार का कल्प वृक्ष या राजस्थान का कल्प  वृक्ष भी कहा जाता है। ये राजस्थान का गौरव जहां तक मेरा जानना है  सभी लोग इसके बारे में जानते है  ये  ऐसा वृक्ष है जिसे किसान का मित्र भी कहा जाता है। और इसे राजस्थान का कल्प वृक्ष भी कहते है। इससे हमें जलाने के लिए लकड़ीया मिलती है  तथा पशुओ के चारे के लिए लूंग मिलती है। मिट्टी का कटाव रोकता है। व मुख्या काम थके हारे किसान को ये बैठने के लिए ठंण्डी छाव देता है।इसका  वैज्ञानिक नाम "प्रोसेसिप-सिनेरेरिया" है। इसको 1983 में राज्य वृक्ष घोषित किया गया।ये पेड़ नागौर जिले में सर्वाधिक है। इस वृक्ष की पुजा विजयाशमी/दशहरे पर की जाती है। खेजड़ी के वृक्ष के निचे गोगाजी व झुंझार बाबा का बालाजी का मंदिर/थान बना होता है। खेजड़ी को पंजाबी व हरियाणावी में जांटी व तमिल भाषा में पेयमेय कन्नड़ भाषा में बन्ना-बन्नी, सिंधी भाषा में - धोकड़ा व बिश्नोई सम्प्रदाय के लोग 'शमी' के नाम से जानते है। स्थानीय भाषा में सीमलो कहते हैं।

खेजडी की हरी फली-सांगरी, सुखी फली- खोखा, व पत्तियों से बना चारा लुंग/लुम कहलाता है।
वैज्ञानिकों ने खेजड़ी के वृक्ष की कुल आयु 5000 वर्ष मानी है। राजस्थान में खेजड़ी के 1000 वर्ष पुराने 2 वृक्ष मिले है।(मांगलियावास गाँव, अजमेर में) ऐसा सुनने में आया है की
पाण्डुओं ने अज्ञातवास के समय अपने अस्त्र-शस्त्र खेजड़ी के वृक्ष पर छिपाये थे।खेजड़ी के लिए राज्य में सर्वप्रथम बलिदान अमृतादेवी के द्वारा सन 1730 में दिया गया। 12 सितम्बर को प्रत्येक वर्ष खेजड़ली दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रथम खेजड़ली दिवस 12 सितम्बर 1978 को मनाया गया था।
आॅपरेशन खेजड़ा की शुरूआत 1991 में हुई।इसका बाहय आवरण इसकी छाल छोड्डे बहुत ही मजबूत होते है जो इसकी जाड़े धूप आदि से रक्षा करते है। जो इसका सुरक्षा वकच है। बाकि आप सब इसके बार में जानते हैं तो इसके बारे में ज्यादा न बताकर मैं अल्प जानकारी देते हुए मैन समस्या पर आता हूं। 
 कमी के कारण सरकार ने इसकी कटाई पर रोक भी लगा  दी है।
इसका एक सबसे बड़ा शत्रु इंसान जो इसे  अपने लोभ वंश काट काट कर बेचता रहा है। पर उस पर तो सरकार ने पांबंदी लगा दी और कुछ मात्रा में इसकी कटाई में कमी भी आयी है। हालांकि लोग अब भी चोरी छीपे इसकी कटाई करते हैं और चोरी छीपे ही बेचते हैं   और आजकल इसका दूसरा और सबसे बड़ा दुश्मन है एक कीड़ा जो खेजड़ी ओ लगता है।इसका नाम सेलेस्ट्रेना(कीड़ा) व ग्लाइकोट्रमा(कवक) है तथा दीमक भी इस पेड़ को काफी नुकसान पहुचती है।
जब मै अपने खेत में बाजरे की फसल की लावणी( कटाई) करने गया तो जब वहा खेत मइ खड़े इन खेजड़ी के पेड़ो को देखा तो दंग रह गया ये क्या इनकी पेड़( तने) पर तो पूरी तरह से दीमक कीड़ा लगा हुआ  है और लगभग वृक्ष सूखने  के कगार  पर  है
ये हालात मेरे  खेत के ही नही  बल्कि आजकल अक्षर हर खेजड़ी  पेड़ पर देखने को मिल रहा है । अगर समय  रहते इसका कोई समुचित उपाय  ही किया गया तो वो दिन दूर नही होगा जब हमारा ये राज्य वृक्ष विलुप्त हो जायेगा। जैसा की फोटो में दिखाई दे रहा है ये दीमक और कीड़ा मेरे ही खेत में खड़ी खेजड़ी को लगा हुवा है और ऐसा ही हाल यहा के इलाके के सभी खेतो की खेजड़ी का है जो इस पेड़ की जड़ से लेकर  तनो तक फैला हुआ है इसकी वजह से इन वृक्षों ने फूटना छोड़ दिया है और सूखने लगे है जो एक चिंता का विषय है।
अब इस दीमक और कीड़े को कैसे रोका जाये ये समझ में ही आ रहा है
और न ही सरकार इस तरफ कोई ध्यान दे रही है
अगर एक मेरे खेत की ये हालत है तो सोचो राजस्थान के इस राज्य वृक्ष की अन्य जगहों पर क्या हालत होगी ये सोच कर मन विचलित हो रहा है कि क्या हमारा गोरव खेजड़ी वृक्ष  लुप्त हो जायेगा?? क्या सरकार की इडको बचाने के लिए कोई ज़िमेदारी नही बनती??
क्या इस दीमक का कोई इलाज नही किया जा सकता??





क्या ये पेड़ यु ही खोखले होते रहेगे और सूखते रहेगे???
क्या अमृता देवी का बलिदान यु ही नष्ट हो जायेगा???




ऐसे कई सवाल मन में आ रहे है। सोचा आपके साथ शेयर करलू आप ही इसका कोई उपाय बता सके और अपने इस गोरव को बचा सके।


वैसे में ये पोस्ट खेजड़ी दिवस 12 सितम्बर  पर ही लिखने वाला था पर समय की व्यस्तता के कारण नही लिख सका फोटो तो काफी समय पहले जब लावणी(बाजरे की फसल कटाई) चल रही तब ही खिच ली थी।

और आपके और सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा है? 
हमारे इस राज्य वृक्ष को कैसे बचाया जाये इस रोग से??
आप ही कोई समुचित उपाय सुझाये।

अपने राज्य वृक्ष को बचाए कैसे ? इन्सान से बचाया जा सकता है पर प्रकृति की मार से इसे कैसे बचाए??
जरा अपने सुझाव दे


आज के लिए बस इतना ही आगे आपके सुझाव की प्रतीक्षा में....


आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

कुछ दोस्त बहुत याद आते है..

  लुप्त होती भारतीय संस्कृति- इसे बचाये पर कैसे ?

लक्ष्य

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