शेखावाटी का प्रसिद्ध खाद्य फल पील..... पर उससे पहले कुछ गिले सिकवे ... नमस्कार दोस्तों काफी समय से ब्लॉग पर कुछ लिख ही नही पाया कारण आप सभी को पता है फैस बुक और व्हाटस् अप की बढ़ती महता ने ब्लाॅगरो की महत्ता कुछ हद कम कर दी हैं या यू कहें न के बराबर कर दी है।
आजकल देखा गया है कि ब्लॉग पर लोगों की आवाजाही बिलकुल कम होती जा रही है। इसलिए हमारा यानि ब्लाग् लिखने वालों का मन भी ब्लाग लिखने की बजाय इन्ही सोसल साईटस पर लिखने का ज्यादा करता है। या यू कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ! ब्लॉग पर लोगों की घटती नफरी और फैसबुक और व्हाटस् अप की तरफ लोगो का बढ़ता खिंचाव आरे हो भी कैसे नही जमाने के साथ जो चलना पड़ता है।
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| जाळ का फल पील |
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| जाळ का फल पील |
क्या आपने खाया है इसे कभी ? किस किस ने खाया है? मैंने तो बहुत बार खाया है और आज भी सुबह सुबह आनंद ले रहा हु इसका। अब इसके बारे में बतात हूं जितना मुझे पता हैं जो जानकारी मकुझे बडै बुढ़ो से मिली है उसी के हिसाब से बता रहा हूं
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| जाळ का फल पील |
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| जाळ का पेड़ |
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| को खाकर आनन्द लेते हुए मैं |
गांवों के बच्चे और औरते इसको पेड़ पर चढ़कर तोड़ते हैं और इसे इकट्ठा करने के लिए लोटे व केंतली का इस्तेमाल लिया जाता है। लोटे के मुह पर रस्सी बंधी जाती हैं और फिर लोटे व केंतली को गले में डाला कर पील तोड़ी जाती है।
सबसे अंन्त में इसे खाने का तरीका
इस मीठे रस भरे इस फल के खाने की सबसे बड़ी खासियत है
दोस्तो इसे खाने का तरीका भी अलग ही है इसे बहुत ही सावधानी के साथ खाना पड़ता है। अन्यथा आपकी जीभ कट सकती है जीभ पर फाले हो जाते है। इसे आप एक एक करके नहीं खा सकते अन्यथा अपकी जीभ छिल जाती है। इसे एक साथ आठ-दस दाने मुंह में डाल कर खाना पड़ता है। यानि एक फांका (कई सारे दाने) एक साथ खाना पड़ता है।
तो दोस्तो जब कभी आपको ये फल खाने को मिले सावधानी से खाये ,और आशा है आपको ये जानकारी रोचक लगी होगी ।आज के लिए इतना ही फिर मिलते है ब्रेक के बाद.....
आपके पढ़ने लायक यहां भी है।





