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Monday, May 22, 2017

शेखावाटी का प्रसिद्ध रसदार खाद्य फल,पील

     शेखावाटी का प्रसिद्ध खाद्य फल  पील.....  पर उससे पहले कुछ गिले सिकवे ... नमस्कार दोस्तों काफी समय से ब्लॉग पर कुछ लिख ही नही पाया कारण आप सभी को पता है फैस बुक और व्हाटस् अप की बढ़ती महता ने ब्लाॅगरो की महत्ता कुछ हद कम कर दी हैं या यू कहें न  के बराबर कर दी है। 
आजकल देखा गया है कि ब्लॉग पर लोगों की  आवाजाही बिलकुल कम होती जा रही  है। इसलिए हमारा यानि ब्लाग् लिखने वालों का मन भी ब्लाग लिखने की बजाय इन्ही सोसल साईटस पर लिखने का ज्यादा करता है। या यू कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ! ब्लॉग पर लोगों की  घटती नफरी और फैसबुक और व्हाटस् अप की तरफ लोगो का बढ़ता खिंचाव आरे हो भी कैसे नही जमाने के साथ जो चलना पड़ता है। 
जाळ का फल पील
 ये तो रही कई दिनों से  न लिख पाने की बात अब आज जो मै आपको बताने जा रहा हूं वो हैं
जाळ का फल पील
शेखावाटी का प्रसिद्ध खाद्य फल  पील, पीलू आदि अपने अपने ऐरिये के हिसाब से इसके नाम हैं पर हम तो इसको पील कहते है। जो सिर्फ गर्मी के मोसम में ही खाने को मिलता है जो लू से बचाने में मददगार है  लू अवरोधक है।
क्या आपने खाया है इसे कभी ? किस किस ने खाया है? मैंने तो बहुत बार खाया है और आज भी सुबह सुबह आनंद ले रहा हु इसका। अब  इसके बारे में बतात हूं जितना मुझे पता  हैं जो जानकारी मकुझे बडै बुढ़ो से मिली है उसी के हिसाब से बता रहा हूं
जाळ का फल पील
जाळ का पेड़
को खाकर आनन्द लेते हुए मैं
पील का पेड़  (जाळ) बहुत घना जटिल तरीके से फैला होता है।  इस कारण स्थानीय बोलचाल में इसे जाळ का नाम दिया गया है।ये पेड़  शेखावाटी क्षेत्र (पश्चिमि राजस्थान) में मुख्यतया पाया जाता है। इस गर्मी भरे मौसम में ये ही एक ऐसा पेड़ है जो कि हरा भरा रहता है। और मिठा फल देता  है। ये उमस भरी गर्मी में   शीतल छाव के साथ साथ खाने के लिए मिठे मिठे फल पील,पीलू भी देता  है। इसके लगने का समय अप्रैल माह से जून तक का है।  तेज गर्मी के शुरू होते ही  जाळ के पेड़ पर हरियाली छा जाती है और फल लगना शुरू हो जाते है।इसके फल चने के आकार के मीठे सरदार  होते है।   जिसको हम पील के नाम से जानते है। इसके कई रंग जैसे  लाल, पीले व बैगनी रंग के इन पीलों (फलों ) से एकदम मीठा रस निकलता है। हमारे  रेगिस्तान में इस फल को मेवे की उपमा दी गई है। है और  यह पौष्टिकता से भरपूर होता है और  बड़े बुजर्ग कहते है कि इसे खाने से लू नहीं लगती। साथ ही इसमें कई प्रकार केआर्युरवेदिक  औषधीय गुण भी बताये जाते है। इससेक कई प्रकार की इवाईयां भी बनाई जाती है।
गांवों के बच्चे और औरते इसको पेड़ पर चढ़कर तोड़ते हैं और इसे इकट्ठा करने के लिए लोटे  व केंतली का इस्तेमाल लिया जाता  है। लोटे के मुह पर रस्सी बंधी जाती हैं और फिर लोटे  व केंतली को गले में डाला कर पील तोड़ी जाती है। 
सबसे अंन्त में इसे खाने का तरीका
  इस  मीठे रस भरे इस फल के खाने की सबसे बड़ी खासियत है
दोस्तो इसे खाने का तरीका भी अलग ही है इसे बहुत ही सावधानी के साथ खाना पड़ता है। अन्यथा आपकी जीभ कट सकती है जीभ पर फाले हो जाते है।  इसे आप एक एक करके नहीं खा सकते  अन्यथा अपकी जीभ छिल जाती है। इसे एक साथ आठ-दस दाने मुंह में डाल कर खाना पड़ता है। यानि एक फांका (कई सारे दाने) एक साथ खाना पड़ता है।
 तो दोस्तो जब कभी आपको ये फल खाने को मिले सावधानी से खाये ,और  आशा है आपको ये जानकारी रोचक लगी होगी ।आज के लिए इतना ही फिर मिलते है ब्रेक के बाद.....

 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

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