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Monday, October 15, 2018

आये नवराते माता के,नव रात्री स्पेशल

काली माता मन्दिर
 या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । 

   "सदा भवानी दाहिनी सन्नमुख रहत गणेश, पांच देव रक्षा करें बह्मा, विष्णु, महेश" सबसे पहले सभी देशवासियों, पाठकों  को नव रात्री पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ,आपको व आपके परिवार को मां वैष्णो  देवी के पावन पर्व नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये मां दुर्गा आपकी हर मनोकामना पुर्ण करे

आप सबको मालुम है नवराता नौ दिन तक चलता हैं और इन नौ दिनों में माता के अलग अलग नौ रूपों की पूजा की जाती हैं जिसकी पोस्ट मै। पहले लिख चुका हुं।  इन  नौ दिनों में सभी माता भक्तों के मुंह पर माता के जयकारे रहते हैं और मन्दिरों के अलावा घर घर में माताएं बहने सभी नवरात्रा घट स्थापना करते हैं और नौ दिनों तक माता की पूजा अर्चना करते हैं तथा व्रत रखकर माता से मन मांगा वर पाते हैं


बगड़ नवरात्रि महोत्सव ,हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बगड़ में पांच जगह दुर्गा जी की मूर्ति स्थापना की गई है जहा रोजाना सुबह शाम आरती व पूजा अर्चना की जाती है और ये नो दिन तक चलती है नवे दिन विशाल झांकियों के साथ इन मूर्तियों का विषर्जन फतेहसागर तालाब में किया जाता है यहाँ हर पंडाल पर रोज हजारों श्रद्धालु माँ अम्बे की आरती ओर दर्शनों का लाभ उठाते है
ये पांच स्थान जहाँ दुर्गा पूजा व घट मूर्ति स्थापना की गई है।
1 दुर्गा मिन्दर बगड़
2 फतेहसागर तालाब के पास बगड़
3 कालीमाता मंदिर जगदम्बा कॉलोनी बगड़
4 खटीकान मोहल्ला चोक बगड़
5 निर्मल मोहल्ला बड़ के नीचे जाटाबास बगड़
आपको एक एक करके इन सभी जगहों के आरती के दर्शन लाइव करवाने का प्रयास किया जाएगा आशा है आपको पसंद आएगा


आज दुर्गा मंदिर बगड़ में मां अम्बे की आरती के दर्शन आपको करवा रहा हु आशा है आपको पसंद आएगा
लाइव आरती देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें  
आस पास की खबरे व चटपटी जानकारी के लिए इस लिंक पर इस चैनल SNCA BAGAR को सब्सक्राइब जरूर करें
SNCA BAGAR
 इसी तरह आपको हर रोज हर दरबार की अलग अलग आरती के  लाईव  दर्शनकरवाये जायेगें


आशा आपको पोस्ट पंसद आयेगी
आज के लिए इतना ही इन्तजार करें अगली पोस्ट का नई आरती दर्शन के लिए तब तक के लिए इजाज़त


 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके पढ़ने लायक यहां भी है।  

  आपा डोलर में हिडांगां आपा चकरी मैं बैठांगा मेला बगड़,लक्ष्य के इंजॉय के कुछ

 सावन सुरंगी आई तीज तीज की हार्दिक शुभकामनाएं

राजस्थान का मेवा फल सांगरी स्वाद बे मिशाल

राजस्थान का गौरव कल्प वृक्ष कहा जाने वाला वृक्ष खेजड़ी (जांटी) है खतरे में ??

शीतला सप्तमी क्यों मनाई जाती है एक दन्त कथा

लक्ष्य


Sunday, September 24, 2017

मां मेरे भी सर सर पे अपना हाथ रख दे

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
   "सदा भवानी दाहिनी सन्नमुख रहत गणेश, पांच देव रक्षा करें बह्मा, विष्णु, महेश"
 सबसे पहले सभी देशवासियों, पाठकों  को नव रात्री पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ।
आप सबको मालुम है नवराता नौ दिन तक चलता हैं और इन नौ दिनों में माता के अलग अलग नौ रूपों की पूजा की जाती हैं जिसकी पोस्ट मै। पहले लिख चुका हुं।  इन  नौ दिनों में सभी माता भक्तों के मुंह पर माता के जयकारे रहते हैं और मन्दिरों के अलावा घर घर में माताएं बहने सभी नवरात्रा घट स्थापना करते हैं और नौ दिनों तक माता की पूजा अर्चना करते हैं तथा व्रत रखकर माता से मन मांगा वर पाते हैं

हर वर्ष की भातिं इस वर्ष भी बगड़ नगर में माता भवानी के दरबार सजाये गयें है। वैसे तो लगभग हर घर में माता की घट स्थापना हो रही हैं लेकिन मुख्य रूप से बगड़ में अब की बार तीन के स्थान पर छः जगह मन्दिरों में माता के दरबार सजाये गये है। जिनमें दो पहले हर वर्ष सजाये जाते रहे हैं 1 तो बगड़ के पुराने दुर्गा मन्दिर,

 दुसरे फतेहसागर तालाब के पास और इस बार छटी बार  खटीकान मौहल्ला के  अलावा नई जगह  निर्मल मौहल्ला जाटाबास में भी मां भवानी का दरबार सजाया गया। पहले नवराते के दिन कलश यात्रा के द्वारा बगड़ में की गई घट और मां की मूर्ति स्थापना कलश यात्रा भव्य रैली में बगड़ की माताएं बहने अपने सर पर रंगोली से सुसज्जित कलश रखकर बगड़ की गलियों में चक्कर लगाकर माता के भजनों पर डीजे के साथ नाचते गाते घट स्थापना कर दरबार सजानें में चार चांद लगा रही हैं माता के आशीर्वाद को पाने के लिए हमारा बगड़ नगर कैसे दूर रह सकता है।  बगड़ के पश्चिम दिशा में फतेह सागर तालाब के पास भी माता का भव्य दरबार सजाया गया हैं और यहां नौ दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ साथ मृदुल भजन सध्या का आयोजन किया जायेगा। आज इन तीनों  ही जगह सेकड़ों माता भक्तों ने आज माता के दरबार में अपना मत्था टेक मां से अभयदान, सुख समृद्धि, और अमन- चैन  मुराद मांगी।
आरती के समय फतेह सागर तालाब पर स्थित दरबार में काफी संख्या में भक्त जन इकट्ठा होत  है।





दुर्गा माता के आरती कर्ता पुजारी जी के साथ माता का आशीर्वाद लेते हुए  
मैं मेरे मित्र शंकर लाल योगी के साथ माता के दर्शनों लाभ उठाने गया था
माता का प्रसाद गृहण करते हुए
  मैने भी इन जगह जाकर माता के भजनों व दर्शनों का अनुपम लाभ उठाया
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मुझे भी माता की आरती में जाने का सौभाग्य मिला  
मैने माता की आरती के फोटो औ आरती की विडियों बनाई जो आपके साथ शेयर कर रहा हूं। 

आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

कानो सुनी को होते देख लिया बुंदिया बाबा बगड़

वाघा (बाघा) बार्डर परेड,अमृतसर

अमृतसर, स्वर्ण मंदिर दर्शन

घुमंत् फिरत चलो मां वैष्णो देवी के दरबार

अन्दाज अपना-अपना (मानव जाति के शौकीन आधुनिक पूर्वज)

मायड़ भाषा राजस्थानी री शान बढ़ावण हाळा ब्लॉग

लक्ष्य

Tuesday, October 20, 2015

ओ मैयाअम्बे जगदम्बे रानी, हम सब उतारें तेरी आरती

सभी देशवासियों ब्लाग् जगत के मित्रों को सपरिवार नवरात्री पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 
बगड़ में नवरात्रों में  चार जगह दुर्गा पुजा के लिए मुर्ति स्थापना की गई है 1 फतेह सागर तालाब बगड़ 2 दुर्गा मन्दिर मैन मार्केट बगड़ 3 खटिकान मौहल्ला बगड़ 4 काली माता मन्दिर बगड़
 इन चारो जगह सुबह शांम आरती में बहुत ही ज्यादा संख्या में माता के भक्तजन आरती लेने व दर्शनों का लुफ्त उठाने के लिए इकटृठे होते है।
 सबसे ज्यादा भीड़ फतेह सागर तालाब के पास स्थापित मांँ भवानी के दरबार में इकट्ठी होती है।  हा इनकी आरती के विशेष बात ये है कि ये आरतिया चारों जगह अलग अलग समय पर होती है काली माता मन्दिर में 6.15 बजे खटीकान मौहल्ला में 6.30 बजे दुर्गा मन्दिर में 7.15 बजे फतेह सागर तालाब पर 8.15 बजे शुरू होती है इसलिए कल मेरा भी मन किया माता के दरबार में जाने का सो आपना कैमरा लिया अपने साथ और पहुच गया चारों जगह 

 चारो जगह की आरती ली तथा माता के दर्शनों का लाभ उठाया और मैने सोचा अपको भी हमारे बगड़ के मां भवानी के दरबार के दर्शन करवा ही दिये जाये सो  आपके साथ शेयर किया जा रहा है बगड़ के चारों धाम मां दुर्गा के दरबारों की एक झलक
 मेरे साथ आप भी किजीए चारों धामों की तरह बगड़ के मा अम्बें के चारों दरबारों के दर्शन



फतेह सागर तालाब ट्रस्ट की और से आयोजित दरबार में  अन्तिम नवराते के दिन हवन तथा कन्या भोज दिया जायेगा।  और सांम 4 बजे  से आतीश बाजी व 51 फिट के रावण का दहन किया जायेगा। आतीश बाजी श्याम मन्दिर के सामने बी.एल. स्कूल के ग्राउण्ड में किया जायेगा।






 आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

पहले ढंग से इन्सान तो बनो,हिंदुस्तान खतरे में है

 जमाना ले बैठ्या....

  अच्छे दिन कब आयेँगे...?

  छोटो सो प्यारो सो म्हारो मदन-गोपाल,जन्माष्टमी

  लुप्त होती भारतीय संस्कृति- इसे बचाये पर कैसे ?


ले ल्यो पट्टी बरतो पढ़णों जरूर है,लक्ष्य का स्कूल

 

लक्ष्य

Wednesday, October 14, 2015

नवरात्री पर्व की हार्दिक शुभकामनाये

सभी देश वासिओ मित्रो को नवरात्री पर्व की हार्दिक शुभ कामनाए
हर वर्ष की भाति इस वर्ष भी बगड़ में 3 जगह माँ दुर्गा जी की मूर्ति सजी एक फ़तेह सागर तालाब पर दूसरी दुर्गा मंदिर तीसरी खटिक मोहले में तीनो जगह बड़ी धूम धाम से सथापना की गई
सुबह कलस यात्रा के बाद घट सथापना की गई और साम को महा आरती हुई जिसमे हजारो की संख्या में भाग लिया
अब मै आपको माँ दुर्गा के नो रूपों के बारे में बताता हु
जिनके अलग -अलग नौ नाम है।
मेरे साथ आप भी करिये जगत पालक ,संहारक मां के नो रूपों के दर्शन
1 शैलपुत्री - जो हिमालय की तपस्या और प्रार्थना से प्रसन्न हो कृपापूर्वक उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुई,
2 ब्रह्मचारिणी  - सच्चिदानन्दमय ब्रह्मस्वरूप की प्राप्ति कराना जिनका स्वभाव हो, वे ब्रह्मचारिणी कहलाई
         3 चंद्रघंटा  - आल्हाद्कारी चन्द्रमा जिनकी घंटा में स्थित हो, उन देवी का नाम चंद्रघंटा है.
4  कूष्मांडा - त्रिविध तापयुक्त संसार जिनके उदार में स्थित हैं, वे भगवती कूष्मांडा कहलाई.
5 स्कंदमाता - भगवती शक्ति से उत्पन्न हुए सनत्कुमार का नाम स्कन्द है, उनकी माता होने से वे स्कंदमाता कहलाई.
6 कात्यायनी  -देवताओं के कार्यसिद्धि हेतु महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई, जिससे उनके द्वारा अपने पुत्री मानने से कात्यायनी नाम से प्रसिद्द हुई.
7 कालरात्रि - काल की भी रात्रि (विनाशिका) दुष्ट संहारक होने से उनका नाम कालरात्रि पड़ा ।
8 महागौरी - तपस्या के द्वारा महँ गौरवर्ण प्राप्त करने से महागौरी कहलाई।
9 सिद्धिदात्री - सिद्धि अर्थात सर्व सिद्ध कारिणी मोक्ष दायिनी होने से सिद्धिदात्री कहलाती है।
अनेक प्रकार के  आभूषणों और रत्नों तथा अस्त्र शस्त्रों  से सुशोभित ये देवियाँ क्रोध से भरी हुई और और मन मोहक दिखाई देती हैं. ये शक्ति, त्रिशूल हल, मुसल, खेटक, तोमर,शंख, चक्र, गदा, परशु, पाश, कुंत, एवं उत्तम शांर्गधनुष आदि अस्त्र-शस्त्र अपने हाथों में धारण किए रहती हैं, जिसका उद्देश्य दुष्टों का नाश कर अपने भक्तों को अभयदान देते हुए उनकी रक्षा कर संसार  में शांति व्याप्त करना और मन वांच्छित वर, मुराद पुरी करना और अन्न धन के भण्डार भरती है।
फिर मिलते है नई रिपोर्ट के साथ

 आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

जमाना ले बैठ्या....

 राजस्थानी (मारवाड़ी) लोक (गीत) गायन तेजा

अच्छे दिन कब आयेँगे...?

  छोटो सो प्यारो सो म्हारो मदन-गोपाल,जन्माष्टमी

  लुप्त होती भारतीय संस्कृति- इसे बचाये पर कैसे ?


ले ल्यो पट्टी बरतो पढ़णों जरूर है,लक्ष्य का स्कूल

 

लक्ष्य


Wednesday, October 16, 2013

जिले का सबसे बड़ा 51 फिट के रावण का दहन व आकर्षक आतिश बाजी,बगड़

झुन्झुनूं जिले के सबसे बड़े 51 फिट के रावण का दहन बगड़ में तिराहा बस स्टेण्ड, बगड़ के नजदीक बी.एल. ग्राउण्ड में  दुर्गा मूर्ति विसर्जन के बाद सांय 7 बजे श्री  नव दुर्गा मण्डल कमेटी, फतेह सागर तालाब बगड़ द्वारा  करवाया गया और मन को लुभाने वाली व आकर्षक आतिश बाजी व पटाखे बाजी का प्रदर्शन करवाया गया। 
जिसका भी मैंने लाईव प्रस्तुतिकरण केबल पर किया । 
 रावन की 51 फिट का पुतला श्री श्याम मन्दिर के सामने बी.एल. ग्राउण्ड में  खड़ी की गई 51 फिट का ये विशाल  रावण का पुतला दर्शकों के कोतुहल का विषय बन गई 
इस  खड़ा करने में काफी मसकत की गई तब जाकर ये खड़ी हो पाई और इसे लोहे के तारों द्वारा रोक कर खड़ा किया गया ।  मैं  आपको ये बता  दूं  इस  पूरी पटाखों से लेस रावण के पुतले का निर्माण अनवर हुसैन  जयपुर द्वारा किया गया
जिसे देखने काफी संख्या में लोग एकत्रित हुए। लोगों को 7 बजने का इंतजार था
और 7 बजते ही शुरू हुआ आकर्षक आतिश बाजी का दृश्य जो वहां उपस्थित हजारों  लोगों का मन मोह रही थी।
आतिश बाजी से आसमान रंग-बिरंग दिखाई दे रहा  था।

ये आतिशबाजी के करतब भी अनवर हुसेन द्वारा ही दिखाये गये। उन्होने ये पटाखे अपनी कला द्वारा खुद बनाये थे। उनकी सबसे प्रशंसा योग्य कला उनकी घुम चक्करी रहीं


उनकी घुमचक्री से बिखरी छटाएं ऐसे लग रही थी मानों कोई लाईटेड छोपड़ा हो या कोई वृक्ष लाईटेड कर दिया गया हो
पुरा आसमान पटाखों की आवाज व दहक से गुज रहा था
चारों तरफ वहां उपस्थित लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट  भी गुंज रही थी सभी लोग  आतिशबाजी के करतब देखकर आश्चर्य चकित थे।

उनके द्वारा बनाये फ्वारें भी आकर्ष के केन्द्र बने हुए थे।
ये कार्यक्रम लगभग आधे घंटे तक चला  सभी लोग मंत्र मुग्ध होकर उनकी कला देख रहें थे।

और तालियां बजा बजा कर कलाकार का उत्साह वर्द्धन कर रहे थे।
उनकी कला वास्तव में ही प्रशंसा योग्य थी।

और फिर अन्त में रावण दहन की बारी आई जिसको आग लगाकर दहन किया गया ।
 आग लगाते ही रावण की बॉडी  में लगे पटाखें व राकेटों से पुरा वातावरण गुज उठा और श्री रामचन्द्र जी महाराज की जय के जयकारें चारों तरफ गुज उठे
और कुछ ही पल में बुराई का प्रतीक रावण धू धू कर जल उठा और बुराई रूपी रावण का  अंत हो गया

और चारों तरफ  अच्छाई व सच्चाई व श्रीरामजी की जय जयकार हो रही थी। 
पलभर में ये पुतला जलकर राख हो गया और लोग अपने अपने घर को लोटने लगें 
इस प्रकार से हजारों लोगों ने इस आकर्षक आतिशबाजी व रावण दहन का आनन्द उठाया तो मै आपको इससे पीछे कैसे रहने दे सकता था  इसलिए मैंने आपके साथ शेयर कर दिया मुझे तो ये बहुत ही अच्छा लगा और आपको कैसा लगा 
अगर  समय मिला तों मै आपको उस आतिशबाजी व रावण दहन का विडियों भी दिखाउगा  इसी वादे के साथ इजाज़त.....



आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

नवरात्रा पूजा प्रारम्भ, आओ मां के द्वारे चलें..

 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति और शिविर का समापन

गायत्री परिवार की युग सैनिक निर्माण चेतना महारैली,बगड़

 5 दिवसीय शिविर व 24 कुण्डीय गायत्री महा यज्ञ का शुभारम्भ

ले ल्यो पट्टी बरतो पढ़णों जरूर है,लक्ष्य का स्कूल

 

लक्ष्य




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