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Thursday, October 4, 2018

सरकार ने तो पहले ही कर दिया,इस साल श्रृष्टि ने भी किया किसानों को निराश,मालीगांव

 सभी पाठको देशवासियों को मेरा नमस्कार
आजकल श्राद्ध पक्ष चल रहा है। जो काम धंधे के हिसाब से सबसे खराब टाईम माना गया है। आंचलिक भाषा में इन दिनों को  बळता जळता दिन भी कहा जाता है। ओर साथ ही काम काज चल रहा है लावणी का  फसल कटाई कढ़ाई का तो हम भी किसान होने के नाते अब इसी काम में लगें हुए हैं  क्योंकि दुकान तो इन दिनों चलनी नहीं हैं अर्थात इन दिनों सब लावणी के काम में लगें हुए है ओर दुकानदारी का काम काज फिका ही चल रहा है।
 अब बात आती इस साल इस सीजन की फसल की तो कुल मिलाकर इस साल की फसल किसानों को निराश करने वाली ही रही है।  पहले समय पर बारिश नहीं हुई फिर गायों ने फसल बर्बात कर दी और अन्त में आये आंधी भुचाल  तेज बारिश ने फसल को गला दिया जिससे फसल उग आई मोटे अनाज की फसल तो ज्यादा तर खराब ही हो गई
 और बाजरे की फसल आंधी तुफन तेज वर्षा से नीचे गर गई ओर खराब प्राय हो गई सरकार किसानों की तरफ आखें तक  नहीं खोल रहा हैं
  बे वक्त बारिश से खराब बाजरें की फसल
 और इन आवारा पशुओं गायों से सबसे ज्यादा किसान परेशान हैं सरकार इनके लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं कर रही है।
 न कोई गोशालाओं बनवा रही हैं न इन्हें पकड़ कर कोई सुनिश्चित जगह पर  इकट्ठा करवा रही हैं बस करते रहते है बेचारे किसानों की फसल को बर्बाद
 सर्दी, गर्मी, वर्शा अतिवृष्टि अनावृष्टि गाया सरकार आदी सभी की मार सहता हैं बेचारा किसान और अन्त में फसल का भाव कुछ नहीं मिला
 आ जाये तो कहा जाये बेचारा किसान ??



बे वक्त बारिश से खराब चुली की फसल
 इकट्ठा करके फसल निकलवाते हुए
 बाजरें कि फसल की कटाई शुरू
बाजरें के सिटो पर भी गोद (चेपा) लग गया है। और दाने काले काले (कोया)पड़ गया है।
 कुल मिलाकर ये कहना ठीक रहेगा कि इस साल किसान लाचार हैं सरकार  कुछ नहीं कर रही हैं न किसान को मुआवजा न ऋण  माफी
थेड़ बहुत पहले माफ किया वो भी कॉपरेटिव सोसाइटी वालों को उसमें भी घपला हो गया
किसी का माफ हुआ किसी का नहीं 30% किसान ही इस सोसाईटी से लॉन लेते है बाकि तो बैकों से ले रखे है निका एक रूपया भी माफ नहीं हुआ यो उनके साथ धोखा नहीं तो क्या है।


फिर भी ये सब सहन कर लेता हैं ये धरती पुत्र
मुझे फर्क हैं मेरे किसान होने पर क्योंकि मै अन्नदाता हूं

किसान अन्न-दाता हैं जो सबका पेट भरता हैं
जय किसान जय भारत 

आज के लिए इतना ही  नवरात्र पर्व की अग्रिम बधाई शुभकामनाएं










आपके पढ़ने लायक यहां भी है।  

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लक्ष्य

Thursday, December 21, 2017

आवारा पशुओ गायो से किसान परेशान, कहाँ से आयेगा अन्न-पूर्णा रसोई का धान??


 आवारा पशु गायों से परेशान किसान
 कहाँ से आयेगा अन्न-पूर्णा रसोई का धान
आजकल किसान आवारा गायो से बहुत परेशान है जो  लगातार किसान की फ़सलो को नुकसान पहुँचा रही है रात रात जागकर रखवाली करनी पड़ रही है न तो सरकार इनका कोई इंतजाम कर रही है और न कोई ओर संस्था।  रात को 40-50 गायो का झुंड आता है और पूरी फ़सलो को रौंद कर चला जाता है  अब किसान क्या करे ? ये प्राकृतिक आपदाओं के अलावा अलग से नई आपदा कहे या विपदा आ गई है किसान के सामने पर बेचारा किसान करे तो क्या करे? इन समस्याओं के चलते अगर किसान ने अन्ततः तग आकर खेती करना छोड़ दिया तो रसोई मे चूल्हा जलाने तक की नौबत आ जायेगी।  किसान जो दिनरात मेहनत करके फ़सल उगाता है उन्हें सींचता है उनकी देखभाल करता है जिसके लिए उसे चाहे सर्दियों की मार सहनी पड़े या गर्मियों की धूप या बारिश की बौछारें खानी पड़े पर हर हालत में वो अपनी फ़सलो की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करता है। इसके लिए न तो कोई सरकार उसे सुरक्षा मुहैया करवाती है और न ओर कोई बीमा कम्पनी उसे ये सब खुद सहन करना पड़ता है जबकि बैंक हर KCC कार्ड धारक की हर फसल की बीमा व्यक्तिगत खाते के हिसाब से करते है ओर हर फसल के 600-700 रुपये बीमा के जोड़ देते है लेकिन अगर किसी एक खाता धारक की फसल खराब या इन आपदाओं के कारण नष्ठ हो जाये तो उसे मुवावजा नही मिलता मुवाज़े के लिए पूरी पंचयात या पर हल्के की नुकसान होने की पटवारी  रिपोर्ट पर सरकार के निर्देशानुसार मुवावजा तय करके मिलता है है तो व्यक्तिगत फसल बीमा का क्या औचित्य हुवा??? एक तो महंगे भाव के खाद बीज लेने होते है और खरपतवार अलग से ओर सरकार तो सिचाई के लिए  फ्री लाइट देना तो अलग बात है 5-6घण्टे से ज्यादा लाइट किसानों को देती ही नही है। दूसरी तरफ कुवो में घटता जल स्तर भी किसान का दुश्मन बन हुवा है।साल दर साल जल स्तर तेजी से घटता जा रहा है  और ऊपर से ये विभाग के ये मनमर्जी के बिल चुकाने पड़ रहे है
मेरा मानना है कि अगर किसान इस सभी आपदाओं के चलते अगर तंग आकर फसलें उगाना छोड़ देगा तो क्या होगा? कभी इस पर विचार किया है ?



महारानी ने अन्नपूर्णा रसोई योजना चला कर जो  उपकार दिखाया है  वो अन्न किसानों की मेहनत है और उनके द्वारा ही उपजाया हुवा ही है अगर किसान अन्न उपजाना बन्द कर देंगे तो सरकारें कहा से ये रसोई चला पाएगी? कभी सोचा है? रसोई तो दूर उनके खुद के खाने के लाले पड़ जायेंगे । अतः मेरा सरकार से कहना है सम्भल जावो ओर किसान को सुविधाएं ओर सहूलियत देना शुरू कर दो ताकि तुम्हारी रसोई अनवरत चलती रही ओर किसान की मेहनत रंग लाती रहे। "कहि फिर पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत" वाली कहावत सच न साबित हो जाये।
जिस दिन किसान सही मायने में अपनी पे आ गया तो
न तो रसोई में बनाने की ओर न शौचालयों में जाने जरूत पड़ेगी। इन नेताओ की नेतागिरी धरी की धरी रह जायेगी।
नेता लोगो किसान को लूट के खाना और बहकना छोड़ दो नही....
सरकार आवारा गायो के लये कोई समुचित व्यस्था करवाये।
धरती पुत्र करे पुकार  इनकी भी सुने सरकार
जय जवान    जय किसान

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कानो सुनी को होते देख लिया बुंदिया बाबा बगड़

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अन्दाज अपना-अपना (मानव जाति के शौकीन आधुनिक पूर्वज)

मायड़ भाषा राजस्थानी री शान बढ़ावण हाळा ब्लॉग

लक्ष्य

Friday, August 11, 2017

चौली (चुली )की फ़सल का रख रखाव

मालीगांव  Maligaon
चुली की फ़सल के नाल तोड़ते हुए
क्या आप जानते है चुली की फसल में पैदावर ज्यादा कैसे बधाई जा सकती है ?? वो भी देशी नुख्से से!!!
चुली की फसल सबसे कम समय मे पक कर तैयार हो जाती है इसके पकने के समय 50 से 60 दिनों का माना जाता है  इसे न ज्यादा बरसात प्रभावित करती है न कम ये औसतन बारिश में भी अच्छी पैदावार देती है बस किसान को इसे बोन के बाद थोड़ा ध्यान देन होता है जब इस (चुली) फसल का पौधा अपने यौवन काल मे जब अपने नाल (लताये) फैलाने लगता है तो उसे ऊपर से तोड़ दिया जाना चाहये ताकि इसमे फल फलिया अच्छी आ सके। और पैदावार भी अच्छी हो।




इसी के चलते मै भी अपने खेत मे बोई गई चुली की फ़सल के नाल तोड़ने का काम आज कर रहा हु ताकि पैदावार बढ़ सके।
धन्यवाद
जय किसान
जय भारत




अगर ये नाल नही तोड़ेंगे तो ये आपस मे एक दूसरे के लिपट जायेगे ओर आपस मे गुत्था गुत्थी हो जायेगे ओर राजस्थनी भाषा मे गरफ़ान चढ़ जायेगे ओर फल (फलिया)कम लगेगी। ओर लावणी भी कठनाई से होगी।

चुली की फ़सल के नाल तोड़ते हुए विडियो
By :-
Surendra Singh Bhamboo   सुरेन्द्र सिंह भाम्बू

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खेजड़ी वृक्ष की महिमा जो आज खतरे में है....

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शेखावाटी का प्रसिद्ध रसदार खाद्य फल,पील

हीरा तो चमके बाळू रेत म।

 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

लक्ष्य

Thursday, January 12, 2017

आँगन (खेत)की दुल्हन(सरसों)को सर्दी (बर्फ)ने रोंदा

सरसों  रूपी दुल्हन के कोमलांगो को सर्दी कुचलने की तयारी में
सर्दी भरा शुभ प्रभात दोस्तों आजकल सरसों की फसल अपने पूर्ण योवन पर चल रही है। पूरा खेत फूलो की पिली चादर ओढ़े हुए है ऐसा लग रहा है जैसे कोई नव दुल्हन सज धज के खड़ी हो और उसके स्वर्ण आभूषण सूर्य की धुप में चमक रहे हो और ये नज़ारा सुबह सुबह बहुत ही सुंदर लगता है।


 परन्तु आजकल सर्दी भी अपने पूर्ण योवन चर्म पर चल रही है आज रात की सर्दी ने तो अपनी हद ही पार कर दी  इतनी तेज सर्दी थी रात को की बर्फ तक जम गई अब आप हो बतावो इस नव् कोमलांगी दुल्हन रूपी सरसों के पत्तो रूपी अंग पर जब सर्दी और बर्फ का कहर टूटेगा तो उस दुल्हन हो क्या महसूस होगा
 ये आप भी भली भाति जानते है यही हाल हुआ हमारे खेत आँगन की सरसों रूपी दुल्हन का जिसके अंगो पत्तो  पर रात से लेकर सुबह तक चिपकी रही बर्फ ।अब बेचारी अपनी गर्दन झुकाए खड़ी है करे भी तो क्या करे? इश्वर और प्रकृति की इच्छा के आगे किसकी चली है जो इसकी चलेगी।
लगातार दो दिन से पड़ रही है तेज सर्दी और उपर से मौसम विभाग ने अगले 4 दिन तक और भी तेल सर्दी पड़ने की घोषणा करदी है लगता है इस बार सरसों की फसल सर्दी की चपेट में आ ही जायेगी। 
अब देखते है कीहमारे आंगन की ये दुल्हन सर्दी सहन कर पाती है या नहीं  

बहुत ही सुन्दर आंचलिक कविता है दोस्तों आपको कैसी लगी?

 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

लक्ष्य

Wednesday, January 6, 2016

काफी इंतजार के बाद किसानो उम्मीद जगी छाया कोहरा

कई दिनों से किसान उम्मीद लगाये बैठे थे कि कब कोहरा आये और फ़सलो की जान में जान आये क्योकि ये फ़सल कोहरे और ठंड से ही अच्छी गुणवत्ता वाली पक पाती है आज किसानो की उम्मीद को चार चाँद लग गए जब आज छाया घना कोहरा । ये आपको मालूम है किसान के लिए उसकी फसल उसका माँ बाप ओलाद सब कुछ होती है। आज कोहरे की विजिबिलिटी रही 5 फिट आस पस की चीजे भी नहीं दे रही थी दिखाई सूरज भी दिख रहा था छोटे बल्ब की तरह।
कोहरे के आने से फ़सलो को मिली राहत अब गेहू,जो,सरसों की फसल में आएगी जान (करेगी घी का सा काम)





















 आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

 

प्यारी माँ दुनिया का सबसे अनमोल गहना

 

राजस्थानी तड़का कद नीपजेली टीबड़ी

 

लक्ष्य

Thursday, February 13, 2014

मेरे खेत का पांच फिट लम्बा पालक, मालीगांव

 आपने गेहूँ सरसों  आदि के पौधे की लम्बाई 5-6 फिट की देखी व सुनी होगी लेकिन अब आप देखिए पालक का पाँच फिट लम्बा पौधा जो मेरे घर पर एक क्यारी में लगा (उगा) हुआ है। आपको भी यह सुनकर व देखकर आश्चर्य होगा की पालक भी 5 फिट लम्बा हो सकता है।  जी हां मैने घर पर सब्जी वगैरह में मैंने एक क्यारी में पालक भी लगा रखा है।
 उसी क्यारी में से पांच- सात पौधे काफी लम्बें बढ़ रहें है जिनकी लम्बाई 5 फिट से उपर हैं जो मेरे लिए ही नहीं गांव के लोगों के लिए भी कोतुहल का विषय बना हुआ है। एक पालक के पौधे की  इतनी लम्बाई हमने इससे पहले कभी न ही देखी और न ही सुनी है। और इन पौधों का तना भी 2 से 2.5 इंची तक का मौटा है।

 लोग इस इन पौधों को देख कर आश्चर्य चकित हो रहें है।  अगर पालक को पौधा बीज भी देता है तो उसकी अमूमन् लम्बाई 2 से 2.5 फिट तक ही बढ़ सकती हैं इससे ज्यादा नहीं लेकिन इन पौधों ने तो हद ही पार कर दी।
और एक पौधे के उपर 15 बिस साट निकली हुई हैं उनकी लम्बाई भी इनके बराबर ही है। और तने पर बीज और पत्ते आये हुये है।
इसके पत्ते भी काफी चौड़े व लम्बें है।
   इस क्यारी में सिर्फ देशी गोबर की खाद ही डाली गई है।इसके अलावा अन्य कोई खाद नहीं डाली गई है, यानि ये  फूल आरगेनिक (देशी) खेती है। और इसके पत्तों की सब्जी भी बहुत स्वादिष्ट बनती है।
 ये तो हुई पालक के पौधों की बात और अब बात रही इस मौसम की अन्य फसलों की तो इस बार बारिश मावठ न होने की वजह से बाकी फसलें इतने रंग ढ़ग पर नहीं हैं चने की फसल तो बिलकुल खत्म हैं लोगों का बान बिज भी वापिस नहीं आने वाला है।  फिर भी कुल मिलाकर कुओं की फसल ठीक ठाक है। 
 सरसों की बड़ी (अगेती) फसल को सर्दी की कुछ चपेट आई और  छोटे वाली ( पछेती) सरसों की फसल ठीक ठाक है। सरसों के फूल झड़ने लगें हैं फलियां पकने लगी है।

गैहूं की फसल जौ  व मेथी की फसल इस समय परवान पर हैं और अच्छी खड़ी हुई है।
जौ की फसल पर  इस समय बाले आई हुई दाने आ रहें है।
यह है मालीगांव की खेती का हाल चाल फिर मिलते है नई खोज खबर के साथ तब तक के लिए इजाज़त...










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त्रिमूर्ति कल्ब नारनोद द्वारा फुटबाल प्रतियोगिता का आयोजन

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ले ल्यो पट्टी बरतो पढ़णों जरूर है,लक्ष्य का स्कूल

 

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