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Wednesday, January 14, 2015

तेज हवा ने ललचाया मन पर सर्दी ने किया निराश मकर संक्रांति

सभी देसवासियों को मकर.संक्रांति व लोहड़ी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 
 आज सबुह से ही काफी तेज व सर्द हवाएं चल रही है। इसलिए हवा को देखते हुए पंतगबाजी में उत्साह है लकिन सर्दी के कारण बढ़ी ठिठुरन से पंतंग बाजी का असर कम दिखाई पड़ रहा है। सभी देसवासियों को मकर-संक्रांति व लोहड़ी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं आज सुबह से ही तेज हवा चल रही है। इसलिए पतंगबाजो का मन ललचा उठा हवा को देखकर उनका मन पतंगबाजी के लिए उत्साहित हो उठा परन्तु उसके साथ ही ठंड इस कदर बढ़ी कि उनका मन निराश हो गया



 मेरा बेटा लक्ष्य छत पर पतंग उड़ाते हुए










आपके पढ़ने लायक यहां भी है।



 

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नव वर्ष मंगलमय हो, अब देखो 14 का कमाल

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 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति और शिविर का समापन 

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लक्ष्य

Tuesday, January 15, 2013

विदेशी सैलानियो के संग मकर संक्रांति की मस्ती,बगड़



 घर पर बेटे लक्ष्य के साथ पंतंग बाजी का आनन्द उठाने के बाद मैं बगड़ आ गया वहा आकर मैं पीरामल गेट के पास जहां मेरी दुकान है उसी के पास  अपने परम मित्र संजय चौधरी डायरेक्ट" द रॉक हैल्थ कल्ब एवं डांस अकेडमी"  के घर गया वहां पर मैने देखा पहले से ही काफी दोस्त लोग मुकेश, ओमी एंड पार्टी आदि जोरदार साउण्ड के साथ नाचते गाते पंतग बाजी का आनन्द उठा रहे थे। फिर क्या मै भी शामिल हो गया उनके साथ मजा उठाने और रंग गया उनके रंग में वे लोग पंतग बाजी के साथ साथ म्यूजिक पर डॉस भी कर रहे थे। जिसके चित्र मैने अपने केमरे में कैद किये है।

पीरामल गेट के आस पास चारो तरफ लोग छतो पर चढ़े हुऐ थे और सभी ने अपने अपने घरों की छत पर साउण्ड सिस्टम लगा रखा था, और म्यूजिक के साथ सभी लोग पंतग बाजी का अन्नद ले रहे थे। आकाश में ये मारा वो काटा,  वो गई ,ये आई का शोर गुंज रहा था, लड़के ही नही इस मौहल्ले की लड़किया भी जमकर पंतग बाजी का मजा उठा रही थी चारो तरफ एक तरह से प्रतियोगिता का सा माहौल बना हुआ था हर कोई एक दुसरे की पंतग काटने की होड़ में लगा हुआ था वहीं गलियो में कटी हुई पंतगों को लुटने के लिए भी भागदोड़ करते बच्चे और उनका शोर मचा हुआ था। कुल मिलाकर माहौल बहुत ही खुशी का हो रखा था।



 लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ भाड और आनन्द का माहौल हमारी वाली छत पर ही नजर आ रहा था इसका एक कारण तो ये था कि हमारा साउण्ड सिस्टम बहुत तेज था क्योकि हमने डी. जे. वाले स्पीकर लगा रखे थे और दुसरा ये की वहा पर हमारी मित्र मंडली पुरी इकट्ठा हो रखी थी।  तभी वहां कुछ विदेशी सैलानी (अंग्रेज) लोग घुमते हुए आ गये, क्योकि पीराम गेट के पास जहां हमारी पंतग बाजी हो रही थी उसी के पास पीरामल हवेली होटल हैं जो नीमराना होटल की एक शाखा है बगड़ में ये ही एक हेरिटेज होटल हैं जहा अक्सर विदेशी लोग आते रहते हैं आज भी कई विदेशी लोग इस हौटल में ठहरे हुऐ थे जो घुमते हुऐ हमारी गली की तरफ आ गये और उन्होने काफी भिड़ भाड़ व तेज साउण्ड देखकर उपर आकर लुफ्त उठाने का आग्रह किया और वो भी हमारे साथ उपर छत पर आ गये और जमकर पंतग बाजी का लुफ्त उठाने लगे।


 पहले तो वे हम लोगों के साथ पंतग उडाते रहे और फिर म्यूजिक पर डांस भी किया वे लोग इस पंतग बाजी से बहुत खुश लग रहे थे उन्ही से मिली जानकारी के अनुसार वे लोग  सिंगर (गायकार) थे जो यहां अपने  किसी एलबम की साउण्ड रिकोर्डिग के सिलसिले में इस होटल में ठहरे हुए थे।  उनके साथ बैंगलोर  के कई हिन्दुस्तानी लड़के भी थे जो उनके साथ म्यूजिसियन (वाद्य यंत्र बजाने) का कार्य करने के लिए साथ आये थे और बतोर गाईड का कार्य भी कर रहे थे। 





उन्होने हमारे दोस्त लोगों के साथ फोटो भी निकाले और जगकर पंतग बाजी का मजा उठाया और इस त्यौहार के बारे में जानकारी भी ली

 वे लोग काफी समय तक हमारे साथ रहे , लगभग 2 घंटे  हमारे साथ बिताये और इस दौरान पंतग बाजी करते हुए म्यूजिक पर डांस मस्ती भी की तथा बेहद खुशी का अनुभव किया और सबसे गले मिलकर बधाई देते हुए विदाई ली ।                               
और यहां का माहौल बहुत ही सुनदर व आकर्षक लग रहा था।



इसके बाद मुझे मेरे मित्र शंकर लाल योगी को फोन आया और मैं  वहां से उसके घर जो जाटाबास में हैं उसकी तरफ चला गया वहां पर भी नजारा देखने लायका था आकाश रंग बिरंगी पंतगों से सजी हुई थी ऐसा लग रहा था मानो किसी चुन्दड़ी में रंगीन नंग पिरो दिये गये हो और वो ही शोर- गुल ये काटा, वो मारा ,वो लुटा ,वो गया, ये ये आया, और वहां पर भी मैने काफी समय तक पंतग बाजी का लुफ्त उठाया ।
        और ये आनन्द लेते सूर्य भगवान कब अस्त होते चले गये पता ही नहीं चला जब अंधेरा सा छाने लगा तब देखा कि सूर्य भगवान अपनी लालिमा लिये निले अम्बर की गोद में सोने जा रहे हैं तब हमने सूर्य भगवान को गोद में जाते समय की लालिमा के साथ आपना फोटो निकाला और अपने घर को विदा ली।




                                                                                          

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  ड ड ड ड ड बावलिया बाबा की संदेश यात्रा,बगड़

ये लो फिर एक नया वर्ष हो मुबारक

  कटरा से मां वैष्णो देवी के दरबार तक

वाघा (बाघा) बार्डर परेड,अमृतसर

लक्ष्य



Saturday, January 14, 2012

ये काटा वो मारा के साथ बगड़ की मकर-संक्रांति

 सभी देसवासियों को मकर-संक्रांति व लोहड़ी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वैसे आपको पता हैं इस साल मकर-संक्रांति दो दिन मनाई जा रही हैं 14 व 15 जनवरी को तो लोगों के व बच्चों के लिए ये भी एक खुशखबरी हैं कि दो दिन तक उन्हें पतंग बाजी का आन्नद उठाने को मिलेगा।  सर्दी के इस मौसम में आज का दिन बहुत ही अच्छा निकाला आज प्रातःअच्छी धुप निकलने के साथ ही बच्चे  व जवान अपनी अपनी छतों पर चढ गये और आकाश में रंग बिरंगी पंतंगे उडने लगी और इसके साथ ही वातावरण में ये काटा वो मारा ये लूटा की आवजे भी गुजने लगी ये नजारा हैं बगड़ शहर जो हमारी नगरी हैं मैने इन क्षणों को केमरे में कैद किया और आपके सामने पेश कर दिया।
  मैने भी इस पर्व का पंतंगों के साथ बहुत लुफ्त उठाया ।
 वेसे मुझे इतनी  पंतंग उडानी नहीं आती हैं और न ही मुझे इतना शोख हैं पर फिर भी शोर गुल माहौल का आनन्द जरूर उठा लेता हूं।
आज  बगड़ की छतों का नजारा देखने लायका है।  क्या  बच्चे क्या बूढे सभी पतंगबाजी का जमकर मजा ले रहे हैं ।
 वैसे सबसे ज्यादा खुशी इस त्यौहार की बच्चों में देखी गई कई बच्चे तो लुटने के लिए बड़े बड़े छड़े (किलीया) लेकर दोड़ रहें और कुछ ताली बजा बजा कर आनन्द ले रहें हैं ।

 ये फोटो जाटाबसा जो बगड़ का एक मौहल्ला है से पुरे बगड़  का नजारा लिया गया हैं ।
 लोगों की पतंग खुब उचाई तक उड रही हैं और पुरा आसमान रगबिरंगी पंतों से भरा पड़ा हैं कुल मिलाकर मौसम और माहौल बहुत ही अच्छा हैं पुरा शकर आनन्द के हिलोरे ले रहा हैं ।
 पेचे होते दो पंतग जो  ऐसे लग रहें जैसे आपस में गले मिल रहें हों ।
मेरा भान्जा सोनू पंतंग उडाता हुआ ।

 साथ में मेरे दोस्त शंकर और मौहल्ले के बच्चे भी हैं

 चरखी ले कर पंतग उछा कर झुमता मेरे दोस्त शंकर का बच्चा
 दुसरे की पंतक काट कर मजा उठाता शंकर

दुसरे की पंतक काट कर मजा उठाता शंकर

 कुछ लोग दुकान जिसके बारे में मैं आपको पहले भी बता चुका हूं श्री अन्नपूर्णा मिष्टान भण्डार जिसकी प्रसिद्ध मिठाया ले रहें हैं










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मेरे बाप पहले आप( लक्ष्य का बाल हट )

कड़ाके दार सर्दी घने कोहरे के साथ,मालीगांव



 

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