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Sunday, February 23, 2020

फाल्गुन मास,होली और धमाल,मोज़ मस्ती कहाँ गए वो दिन?सब कुछ बदल गया

नमस्कार दोस्तो 10 फरवरी  से ही लग चुका है फाल्गुन मास ओर फाल्गुन मास में ही आता है रंगों मोज़ मस्ती, हर्ष उल्लास का त्यौहार  होली  ।और फाल्गुन मास का नाम सुने ओर मौज मस्ती और धमाल न हो तो फाल्गुन अधूरा है ।हालांकि आजकल त्योहार फीके पड़ते जा रहे हैं उतना उल्लास आजकल त्योहारों में देखने को नही मिलता। एक पहले का समय था जब फाल्गुन लगते ही रोपा जाता था होली का डांडा ओर चारो तरफ सुनाई पड़ती थी धमलो , ढपो ,चंगो  बयार।एक महीने तक चलती थी मौज मस्ती गाँवो की चौपालों में रात 8 बजे से रात 12-1बजे तक बजता था ढप ओर  गाये जाते थे होली धमाल निकाले जाते स्वांग। गाँव के बूढ़े,बड़े, बच्चे, ओर औरते सब आकर जमा हो जाते थे गांव की चौपाल में ओर लुफ्त उठाते थे। ओर एक महीने तक रोज शाम महिलाएं घर के चौक में इकट्ठी होकर होली के लोग गीत गाती थी।आजकल ये सब कलाएं लुप्त होती जा रही है कारण क्या है ये तो आप ही बताए? मेरे अंदाज़ से तो लोगो का धार्मिक रूप से धर्म से कम होता रुझान,आपसी मेलजोल का कम होना लोगो की धर्म पे प्रति कम होती रूचि,टीवी,मोबाइल,शोशल मीडिया, आदि के कारण ये खत्म होते जा रहे है




ये वो समय था जब हम बच्चे भी जाते थे अपने बड़ो के साथ गाँव की चौपाल में ओर सुनते थे धमाल ओर देखते यह उस समय का मनोरंजन का एक मात्र साधन स्वांग।स्वगों में गाव के ही लोगो की आवाज व नकल की जाती थी और जनता हो हँसाया जाता था उस समय चाहे किसी की भी नकल कर हँसाया जाए कोई नाराज़ नही होता था अब ये मुमकिन नही लो छोटी छोटी बातों पर झगड़ने लगते है।शायद ये भी एक कारण है जिससे कि ये कलाये लुप्त हो गई है । उस समय मन को लुभाने वाले सुरीले मीठे धमाल ढप के साथ सुनने को मिल जाते थे आजकल ये सिर्फ फोन और होम थिएटर पर ही सुनने को मिलते है चौपालों में नही इर सही माने तो आजकल बहुत कम लोग ही बचे है जिन्हें ढप बजाना ओर धमाल गाना आता है ।ये भी एक कला है ढप बजाना और उस पर धमाल गाना ओर चंग बांसुरी बजाना
आज ये सब खत्म प्रायः होता जा रहा है। कारण क्या है ये तो आप ही बता सकते है?
 तो उसी क्रम जो जीवित रखने के लिए मैं लेकर आया हु आपके सामने शेखावाटी के सुप्रसिद्ध चंग धमाल सुनिए ओर आनंद उठाइये
सुनिए ये धमाल

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पैसों प्यारो ऐ दुनिया मे पैसों जादू गारो ये, शेखावाटी का बहुत ही शानदार राजस्थान होली चंग धमाल 


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शेखावाटी का सुप्रसिद्ध चंग धमाल कटवादे_मेरा_श्याम_चंनण_बिडलो 


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मेरी छोटी सी उमरिया जुल्म करे, बहुत लोकप्रिय होली धमाल नगीना डांसर के नए अंदाज़ के साथ





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लक्ष्य


Friday, February 6, 2015

Tuesday, February 21, 2012

परण्या नाचण दे फागण मै काळजो बळ बळ गावे रे...

महाशिव रात्री की शुभकामनाएं फागण को महिनो है और होली का त्यौहार नजदीक हैं  इस महिने में चारों तरफ होली के धमाल ही धमाल सुनाई दे रहें है चाहे टैक्सी हो चाहे गाडी हो चाहे दुकान हो और म्यूजिक सेंटर पर तो इन्हीं  गानों की भर-मार हैं और हो भी कैसे नहीं ये गाने है ही मन को लुभावने एक बार जो सुन ले बार बार सुनने को मन करता हैं तो मेरा भी मन आपको होली के धमाल सुनाने को कर रहा हैं ये लोकगीत हमारी राजस्थानी संस्कृति से ओत-प्रोत और सुनने में बहुत ही कर्ण प्रिय है। 
 
तो आप भी सुनिये राजस्थानी धामल और आनन्द उठाईये!



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सोनू की जिद और नाहरगढ़ दर्शन,जयपुर

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

 

 

 

 

ये काटा वो मारा के साथ बगड़ की मकर-संक्रांति

 

 

 

नव वर्ष 2012 की हार्दिक शुभकामनाएं, मालीगांव

मेरे बाप पहले आप( लक्ष्य का बाल हट )

कड़ाके दार सर्दी घने कोहरे के साथ,मालीगांव



 


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