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Tuesday, June 16, 2020

मेरे गांव मालीगांव का इतिहास

भाम्बू गौत्र का इतिहास/और मेरे गांव की बसासत का इतिहास

(किस प्रकार से मेरा गांंव/ गोत्र विकसित हुए और जगह जगह बसासत करते करते मेरा गांव मालीगांव बसा ,बसासत का सफरनामा )

सभी भाम्बू गोत्र के बड़े बुढो को चरण स्पर्श छोटो को मेरा प्यार व हमउम्र भाइयों को नमस्ते
मैंने अपने भाम्बू गोत्र के इतिहास बारे में  कुछ जानकारियां इकट्ठी की है जो आपके सामने मय सबूत पेश (शेयर) कर रहा हु इसमें अगर कोई त्रुटि रह गई हो तो क्षमा करना और सुधार हेतु मेरे नम्बर 9829277798 पर व्हाट्सएप्प मय सबूत भेज सकते है उसे अपडेट कर दिया जाएगा
 भाम्बू गोत्र की उत्तपत्ति उद्धभव ओर विकास (बसासत)
1 जानकारी
बही भाट(जागा) बडुवा, कमेडिया,आदि से प्राप्त
वंश:- चंद्र 
(कुल 36 वंश बताए गए है जिनमें भाम्बू का वंश चन्द्र है)
तड़:- आनना (आण्णा) 
(जाटों में चार तड़ होती है 1 ऐजा 2 केजा 3 जतूनलिया 4 (आण्णा )आनना भाम्बू आण्णा तड़ के जाट है)
गोत्र :-आत्री
माता अनुसुईया
नख :-तंवर 
निकास :; हस्तनापुर दिल्ली से निकास
तंवर क्षत्रीय 
1पहला गाँव  हरियाणा में कुंजला खेड़ा बसाया 
2बाद में तेजरासर गाँव,
3बराला,
4 लडेरा खेड़ा 
यहां से जाकर हरिपुरा गाँव,भवानीपुर गाँव ,कुतकपुरा धीरासर गाँव भामासी  गाँव बड़पालसर गाँव ,ढढार गाँव आदि गाँव बसाए
भाम्बू  ढुकिया(डूकिया),डोटासरा तीनो एक ही मा कि कोख़ से पैदा होने के कारण जात (दूध)भाई माने गये है इसीलिए इनमें आजतक आपस मे शादी विवाह का रिश्ता नही होता है
किस प्रकार अपने पूर्वजों को भाम्बू गोत्र मिला:-
तंवर क्षत्रिय वंश के राजा  बाघ सिंह था उसके 12 बेटा हुए उनमें से  9 वां बीटा बीरसेन हुवा जिनका विवाह पूनिया खेड़ा गाँव की  राजपाल जी पुत्री ओर हरसुख जी की पोती सदा बाई पुनणी ब्याही गई।
उसके तीन बेटे हुए 1भिवसिंह 2दोहट सिंह 3 देवीसिंह
जिन्होंने अपना धर्म (गोत्र) अपनाया विक्रमी सम्वत 1251 में कुतबुद्दीन बादशाह के राज के समय
दोहट सिंह जिनके डोटासरा जाट हुए
देवीसिंह जी के  ढुकिया जाट हुए 
(तीनो दुध भाई होने के कारण आज भी इनमें आपस मे शादी विवाह रिश्ता नही होता)
अतः जानकारी सामने आई भाम्बू गोत्र भीमसिंह जी ने चलाया जो 1251 में अस्तित्व में आया।
भीवसिंह जी की शादी असपाल जी गोदारा की लड़की तनसुख जी की पोती राजा  गोदारी के साथ हुई थी
भिवसिंह जी के दो पुत्र हुए थे 1 कुंजल जी 2 सिहोजी
कुंजल जी की शादी पाला जी की बेटी और जेताराम जी की पोती राधा बाई सहारण के साथ हुई।
1251 में दोनों ने अपने  पिता भिवसिंह की आज्ञा से  हस्तिनापुर छोड़ा
 कुंजल जी ने कुंजला खेडा गाव बसाया जहां के भाम्बू कुंजलिया भाम्बू कहलाये
सिहोजी ने सिंथलिया गाँव बसाया जहां के भाम्बू सिंथलिया भाम्बू कहलाये
यानी 1251 में ही भाम्बू दो भागों में बंट गए कुंजलिया ओर सिंथलिया 
कुंजल जी ने गाँव कुंजला खेड़ा में गायों के चरने के लिए 100 बीघा जोहड़ा (बणी) छोड़ा तथा गांव कुंजला खेड़ा में महादेव पार्वती का मंदिर बनवाया ओर कुल देवी कुंजला माता के देवरा (मंदिर) चिनवाय(बनवाया) ओर पूजा पाठ करवाया और ब्राह्मणों का दान दक्षिणा दिया बादशाह की नोकरी की तथा बादशाह ने खुश होकर कुंजला खेडा का 12 हजार बीघा का पट्टा बनाकर दिया तब सम्वत1253 कुतबुद्दीन के राज  में इस खुसी में कुंजल जी ने बही बाट जागा दीनदयाल जी पांच रुपये ओर एक ऊंट अनाज और पोशाख देकर बही में भी मंदिर देवरा ओर पट्टे की बाद दर्ज करवाई।
कुंजल जी के बेटा देहट जी और बेटी हरखू बाई थी
देहट जी की शादी  रामु जी की बेटी गजूजी की पोती हीरा बेनिवाल से हुई जिसके बेटा तेजराज व बेटी धापू,हेमी,सुखी हुई।
तेजराज जी शादी लादूराम जाखड़ जी बेटी धर्मा जाखड़ से हुई बेटे हुए मालसिंह,जसपाल सिंह,सुरपाल सिंह,ईशर सिंह बेटी हरबाई हुई
सुरपाल जी शादी जेसाजी की बेटी रुकमा ढाकी से हुई
बीटा गोपीनाथ ओर पहाड़ जी हुये
गोपीनाथ जी की शादी करमसिंह जी की बेटी धन्नी भाखर के साथ हुई बेटे अर्जुन ओर लोहट बेटी मणि हुई
ईशर जी की शादी करमसिंह की बेटी देबू बाई बेनीवाल से हुई
बेटा गोपाल,हरपाल,बेटी लिछमा,रुपा हुई। सम्वत 1260 में जागा बही भाट ओंकार जी थे
पटेल साहब तेजराज जी  कवर ईशर जी ने सम्वत 1271 में तेजरासर गाँव बसाया अलीशाह बादशाह के राज में जागा चन्द्रसेन आया
गोपाल राम की शादी धीरा जी की बेटि रामा बाई कसवी से हुई जिनके बेटा नरपाल,करमचंद, बेटी उमरी बाई हुई
नरपाल जी की शादी रणसिंह जी की बेटी बदामी स्योराण से हुई और दूसरी शादी जगसिह जी की पारा महली से हुई
बेटा धरमसिंह,कालूसिंह,नानग सिंह,बाहड़ सिंह,चोखा राम,माडू जी,चुहड,लोहटजी ,देहड़,ठाकरसिह,गिदोजी,बणपाल,गिलो जी 12 बेटे हुये  बेटी राही,रुकमा
नरपाल जी को  कालूजी की शादी दयाली से हुई जिनके बेटा कीरतो जी और बछराज जी बेटी नाथी,कडीया हुई।
बछराज जी की शादी हैमाराम की बेटी गंगा पुनिया से हुई और दूसरी  भिव जी की रामा बाई बलोदी  से हुई बेटा खेतो राम,हरका राम बेटी लीला,करमा बाई हुई
खेता राम जी की शादि सोलराम जी की बेटी हरिया खींचड़ बाई से हुई
सम्वत 1382 की साल में औरंगजेब बादशाह के राज में बही भाट जागा करनीराम था
संवत 1440 की साल में चौधरी  ईशर जी ,कालूराम जी के साथ गोपाल जी हरपाल जी ने तेजरासर गाँव छोड़कर भोड़की गाँव आये वहां के मीणा जाती के लोगो से झगड़ा करके कुएं की बाबत पर ओर फिर गाँव भोड़की छोड़ा और फिर सम्वत 1452 में गाँव लडेरा खेड़ा बसाया जो वर्तमान गाँव नारनोद ओर अलीपुर के बीच एक बड़े टीले भर पर था लडेरा खेड़ा गाँव मे फिरोजशाह बादशाह के राज में 11 हजार बीघा जमीन नाम कराई ओर  बसासत कर खेती करी जागा ओकर जी को ये सब बही में लिखवाया
चौधरी खेताराम राम जी के समय सम्वत 1507 मे बहलोल लोदी के राज में आया जागा,संवत1511 में गंगाराम जी और बछराज जी ने सोने की मुरका दी जागे को, संवत1535 में जागा आया गाय दान में दी , फिर सम्वत 1545 में आया लडेरा खेडा गाँव मे, ही चौधरी साजन राम जी घोड़ी दी दान में
सम्वत 1551 में ,चौधरी जीवन राम ने सवा मन अनाज दिया सम्वत 1576 की साल में लडेरा खेडा गाँव मे
खेताराम जी के  बेटे मेवाराम (भिवाराम) की शादी स्यामा जी की बेटी रुकमा देवी से हुई उसके बेटे साजन जी और सांगो जी हुये बेटी मीरा हुई। साजन जिनकी शादी पालाराम जी की बेटी हेमी महली से हुई जिनसे बेटा जीवनराम ओर धीराराम हुए
जीवनराम जी के सांगा जी की बेटी देबू बाई जाखड़ ब्याही गई
धीराराम जी के राजा श्योराण ब्याही गई जिनके बेटे  कुम्भाराम ओर लादूराम हुए बेटि हरकु बाई हुई
कुम्भाराम जी की शादी अजाड़ी गाँव की राजू जी की बेटी केसी महली से हुई 
लादूराम जी की शादी रामपाल जी की बेटी कमला बुडानिया से हुई
कुम्भाराम के बेटे कुंतल ओर पातल हुए
एक दिन सम्वत 1587 में लडेरा खेडा गाँव मे चौधरी कुम्भा राम जी की धर्म पत्नी केसी देवी को बादशाह हुमायु की फ़ौज पकड़कर मुसलमान बनाने लगी धर्म परिवर्तन करने लगे और साथ ले जाने लगी तब  कुम्भा राम जी और लादूराम जी तथा बेटे कुंतल पातल ने बादशाह की फ़ौज से लड़ाई करी गाँव के अन्य जाती के लोगो ने भी मदद की इस लड़ाई में चौधरी कुम्भा राम जिनका स्वर्ग वास हो गया पर फिर भी लड़ाई में विजय भाम्बूवो की हुई कई मुसलमानों को मार गिराया बादशाह की फ़ौज भाग खड़ी हुई ओर  विजय भाम्बू की हुई हुई ओर धर्म बचा । फिर चौधरी कुम्भा राम जी की  धर्मपत्नी  केसी देवी सती हुई 1587 की साल बैसाख सुदी दूज के दिन
चौधरी लादूराम ने इस युद्ध की याद में ओर भाई व भतीजे कुंतल पातल की वीरता तथा भाभी के सती होने की याद में जागा को  31 रुपया दो ऊंट सजावट सुधा  तलवार सुनहरी मुठ वाली दी अनाज ढाई मन दिया कामल ओर बेस मर्दानी पोशाख बही भाट जागा दीनदयाल जी को भाम्बू बही में  सम्वत 1590 में लिखवाया इसके बाद कुम्भा राम जी के बड़े बेटे कुंतल ने लडेरा खेड़ा गाँव को छोड़ कर नारनोद गाँव जो आज है बसाया ओर छोटे बेटे पातल ने अलीपुर गाँव जो आज है बसाया ओर 
चौधरी लादूराम जी ने मालीगांव गाँव बसाया
तीनो गाँव एक ही दिन बसे सम्वत 1638 में बसे थे मालुखा पठान के राज में बसे है ये तीनो गाँव।
फिर लादूराम जी के लखमी चंद उनके रुडाराम ओर उनके कालू,धामा,जोधा ओर इस प्रकार हमारा पूरा गांव यानी मेरे पूर्वज बने और  बढ़ते गए जो आज 400 घरों की बस्ती है यहां से कई लोग दूसरे गावो में भी जाकर बस जैसे भोड़की, चंदवा का बास, बुडानिया,जखोड़ा ,साखन ताल,आदि की जगह बसे।
नोट:-
ये जानकारी बही भाट जागा की बही से ली गई है फोटो भी साथ संलग्न है जिनमे ये साफ साफ लिखा है और साथ मे वीडियो का लिंक भी दिया हुवा है जिसमे वर्तमान जागा राव रूपसिंह इन जानकारी कों पढकर सुना रहा है।
इसमें कोई सुझाव हो तो  आप आमंत्रित है कॉमेंट में लिखे अगर सही लगा तो अपडेट कर दिया जाएगा
इस सामग्री को चुराना, कही अन्यत्र लगाना अपराध है अगर कोई ऐसा करता ही तो उसके खिलाफ कॉपीराइट के तहत कार्यवाही की जाएगी


आज भाम्बू गोत्र एक स्वतंत्र गोत्र है जिसे आज भाम्बू,बाम्भू,बामू,बामूं,बांभू,भामु आदि कई नामों से बोलते और लिखते है
आगे की जानकारी आते ही अपडेट कर दी जायेगी ...
video link
https://youtu.be/EGg08HqS8c4
मै आपका अपना
सुरेन्द्र सिंह भाम्बू
Vpo मालीगांव
जिला झुन्झुनू राजस्थान
9829277798




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लक्ष्य

Saturday, May 8, 2010

बगड़ एक नजर में ....

बगड़ का वह गढ़ (महल) जो नवाबो ने बनवाया था
  • आज शिक्षा की नगरी बगड़ जहां बैठकर मैं यह ब्लॉग लिख रहा हूं उस नगर के बारे में लिखना व जानना मेरे लिए एक बहुत ही गौरव की बात है।  
 बगड़ पीरामल गेट जो सन् 1928 में निर्मित हुआ
बगड़ का ऐतिहासिक उद्भव काल
 राजस्थान का एक भाग शेखावाटी के नाम से जाना जाता है। आमेर के शासक उदयकरण जी के पुत्र मोकल जी के एक पुत्र शेखा थे उन्होंने अपना अलग राज्य स्थपित किया जो उनके नाम से शखावाटी कहलाता है। उनके वंशजो ने सीकर,झुन्झुनूं,नरहड़,सिंघाना आदि क्षेत्रों पर अधिकार कर  शेखावाटी क्षेत्र का विस्तार किया। झुन्झुनूं शहर ‘इतिहास कारो के अनुसार’ 12 वीं शदी से पूर्व का माना जाता है। झुन्झुनूं  14 कि.मी दूरी पर बगड़ कस्बा बसा हुआ है।  ‘‘क्याम खां रासो’’ में लिखा है कि बगड़ में मोबत खां कायमखानी रहा था, जब क्यामखानियों से हिसार छुटा तब मोबत खां ने  झुन्झुनूं पर अधिकार कर लिया। विक्रम संवत 1503 के आसपास का समय था।
     वर्तमान बगड़  के जो अवशेष प्राप्त हुए है वे पठानों के समय के ही माने गये है। यहा की वर्तमान जातियों में गोदारा जाट सबसे प्राचीन है। जोअब जाटाबास,बगड़ में बसते है। इनका बगड़ में बसने का समय उनके ‘‘बही भाटो’’के अनुसार वि.स 1405 है। अतः वर्तमान बगड़ 15. वी शताब्दी का है। इतिहासकार
‘रघुनाथ सिंह शेखावत’ के अनुसार पुराना बगड़ वर्तमान बगउ़ से एक कि.मी.  दक्षिण पश्चिम में स्थित था। आजकल उस स्थान को ‘‘बुढ़लीभर’ कहा जाता है। बुढ़लीभर का अर्थ पुराने टीले से है  टीले पर ठिकरिया आदि अवशेष मिले है  यह टीला काफी जगह घेरे हुए है। पुरातत्व विभाग जयपुर के कला अधीक्षक श्री विजय  शंकर श्रीवास्तव ने इन अवशेषों को चैहान कालीन बताया है। चैहानों का समय 8 वीं शताब्दी से 12 वीं शताब्दी है। अतः  कहा जा सकता है कि उस समय यह बस्ती बसी हुई थी।   
    बगड़ को प्रमाणों व दन्त कथाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि वि.स. 1788 में शार्दूल सिंह शेखावत ने  नागड़ पठानों से नरहड़ व बगड़ (शेखावाटी)प्राप्त किया था।  बाद में यह (शेखावाटी क्षेत्र) जब शार्दुल सिंह के पाचं पुत्रों जोरावर सिंह, किशन सिंह,अख्यसिंह,नवल सिंह,और केशरी सिंह मे बराबर-बराबर में बांटा गया  यह ‘बटाई  ‘‘पांच पानों’’ के नाम से जानी जाती है।  पांचो पानों का यह बगड़ नगर शोखावाटी के प्राचीन नगरों में  एक है। इसके बाद जोरावर सिंह के पुत्र महासिंह को बगड़ का पंाचवा हिस्सा प्राप्त हुआ ये पहले नवाबों के गढ़ में आकर रहे। आज उनके बहुत से वंशज बगड़ में ही निवास करते है। नरहड़ के तीसरे नबाब अलाउद्दीन ने पीरबाबा के डर से नरहड़ छोड़ा और बगड़ में बसा। और उसने बगड़ को अपनी राजधानी बनाया। उसके पश्चात बगड़ में हसन खां ,बावन खां और कुतुब खां नबाब हुए।
    वि.सं. 1715 के आस पास दो चमत्कारी महापुरूष इन नगर में हुए थें एक का नाम था रूपादासजी व दूसरे थे इजेतुल्लेशाह। इन दोनों में काफी दोस्ती  थी। दोनो महापुरूष हिन्दुमुस्लिम  एकता के जीते जागते प्रतीक माने गये है।
    वि.सं. 1786 तक बगड़ पर नबाबी शासन था। 275 वर्षो तक यहां  पठान नबाबो का शासन (दबदबा) रहा। बडे़ बुजुर्गो स मुह से आज भी नबाबो द्वारा 52 पालकियां निकालने की बात सनने को लिती है। इन नबाबो ने अपने काल में बहुत से कुए, मस्जिदे, इमारते बनवाये थे  आज भी उनमें से कुछेक के अवशेष मात्र देखे जा सकते है। कहा जाता है कि उनके काल में 360 लाव चला करती थी अर्थात 360 कुए चला करते थे। उनमें से बहुत से हुए अब मिट्टी में दब चुके है।  कुछ जलदाय विभाग के काम आ रहे है कुछ मं पानी नही रहा, कुछ अवशेष मात्र है।
    वि.सं. 1840 में शुर्दल सिंह के पड़पौते मालिक सिंह (महासिंह) बगड़ आये और गढ़ का निर्माण करवाया वि.सं. 2004 तक  अतार्थ सन्1947 तक करीब 164 वर्षोतक बगड़ पर शासन उनके वंशज ही करते रहे। बाद में जयपुर रियासत के विलीनीकरण के साथ ही पंचपानों के इस बगड़ नगर को भी राजस्थान में मिला लिया गया।
     बगड़ कस्बे के पश्चिम मेंबने फतेहसागर तालाब का निर्माण आज से लगभग 123 वर्ष पूर्व वि.सं. 1934 में हुआ था इसका निर्माण फतेहचन्द औझा ने करवाया था। कहा जाता है कि इसका निर्माण आधा सेर मोठांे की मजदूरी देकर करवाया गया था। और इसके साथ बना शिवालय का निर्माण भी इसी समय हुआ । यह तालाब लगभग 10 हजार फुट क्षेत्रफल का है। तथा लगभग 60 फुट गहरा है। इसमें पुरूषो,महिलाओं,पशुओं के लिए अलग अलग घाट बने हुए है। जो आज भी मौजूद है।

    वर्तमान बगड़ नगर आज पिलानी के बाद शिक्षा की दृष्टि से दूसरा स्थान रखता है। इसका धरा नाम ‘‘ छोटी काशी’’ भी माना जा सकता है।
(उपरोक्त  आंकड़े सम्बन्धी जानकारी इतिहास कार रघुनाथ सिंह  शेखावत व मुकुन्द सिंह शेखावत की पुस्तकों के आधार पर है तथा कुछ बुजुर्गो द्वारा मिली है।)


                                ---- 
 

Friday, May 7, 2010

मेरे बारे में ..

Surendra Singh Bhamboo

 नाम                       - सुरेन्द्र सिंह भाम्बू
 पिता का नाम          - श्री जीवन सिंह भाम्बू
 गांव                         - मालीगांव
 तह.                         - चिड़ावा
 जिला                       - झुन्झुनूं
 राज्य                       - राजस्थान
 देस                         - भारत
 मो.                        - 9829277798



मेरे दादा के परिवार का परिचय
मेरे दादा का नाम स्व. चौ रामनाथ सिंह भाम्बू है।
मेरे परदादा का नाम  चौ. सुबेदार पिरानाराम भाम्बू है।
पिरानाराम जी के दो लड के हुए १ का नाम रामनाथ था और 2 का शिवनारायण था।
रामनाथ के 4 लड के है।
1.    मालसिंह भाम्बू
   2.    जीवन राम भाम्बू
   3.    विजयपाल भाम्बू
4.    मूलचन्द भाम्बू
और शिवनारायण के 1 लडका है।
1    हरिसिंह भाम्बू

मेरे ताउजी (बाबोजी)  श्री मालसिंह जी कैप्टन से रिटायरमेन्ट है।
मेरे पापाजी स्व. श्री जीवण राम जी एक किसान थे।
मेरे चाचाजी श्री विजयपाल जी  राजस्थान रोड़वेज में यू.डी.सी है। रोड़वेज
मेरे चाचाजी श्री मूलचन्द जी  शिक्षा विभाग में अध्यापक है।

माल सिंह के २ लड के है।
१ सहदेव सिंह भाम्बू
२. सत्यवीर सिंह भाम्बू
3 मेरे चाचा विजयपाल सिंह के 2 बच्चे    लड़की लड़का
1  डिम्पल
2  मनजीत
4. मेरे चाचाजी मूलचन्द जी के भी दो बच्चे  लड़का व लड़की
1. रविन्द्र जो आब डॉक्टर  है। (अस्थी रोग विशेषज्ञ)
2. सरोज 

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मेरे परिवार का परचिय
मेरी मम्मी का नाम श्रीमती किताब देवी है जिनका गांव हमीरवास (बजावा ) है।
मेरे पापा का नाम स्व. श्री जीवण राम जी भाम्बू
उनके चार बच्चे है। 3 लड़कीया 1 लड़का
सुरेन्द्र सिंह भाम्बू यानि मैं हूं।
मेरा जन्म  01 जून 1980 को मेरे पैतृक गांव मालीगांव में हुआ।
मैं एक किसान परिवार से हूं। मेरे पिताजी खेती का कार्य किया करते थे।
हमारे खेत में एक कुआ है। यही पर हम रहते है।

मेरी बहिने
मेरे परिवार में हम तीन बिहने क्रमशः 1. चन्द्रकला, 2 शारदा 3. सुमन और  इकलोता एक मैं उनका भाई हूं।
मेरी बहिनों की शादी
चन्द्रकला व शारदा की
भीर्र गांव जो बुहाना तहसील में पड़ता वहा हुई है।
क्रमशः श्रीमान विरेन्द्र सिंह जी मान
श्रीमान धर्मेन्द्र सिंह जी मान
 जो मुझ से छोटी है। सुमन की शादी
नांद का बास रो चुरू रोड़ पर रिजाणी के आगे है वहां हुई है।
श्रीमान विकास जी सिहाग के साथ
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मेरी पढ़ाई के बारे में 
  • मेरी प्राथमिक पढ़ाई मेरी ही ग्राम पंचायत के एक छोटे से गांव धीरा वाली ढ़ाणी में हुई जहां
  • मैने कक्षा 1 से कक्षा 5तक शिक्षा ग्रहण की  वहां मैं आपने चाचा जी जो वहां पर मास्टर थे जाता था।
  • कक्षा 6 से कक्षा 8 तक की शिक्षा मेरे ही गांव की सरकारी स्कूल राजकीय माध्यमिक विद्यालय मालीगांव नारनोद  में प्राप्त की।
  • कक्षा 9 और 10 वीं की पढ़ाई मैनें पाड़ोस के गांव कासिमपुरा के सरकारी विद्यालय से प्राप्त की।
  • मैने 10 वीं कक्षा सन्‌ 1995 में उत्तीर्ण कर ली थी। 42 प्रतिद्गात अंको सें।
  • फिर मेरी पढ़ाई बगड  कस्बे जो हमारे गांव से 5 कि.मी. दूर पडता है वहां के एक निजी स्कूल  सेठ पिरामल सी.सै. स्कूल वहां से प्राप्त की वहां से मैने कक्षा 11 व कक्षा 12  पास की विषय (आर्ट ) हिन्दी साहित्य, राजनैतिक विज्ञान,इतिहास विषयों से पास की।
  • मैने 12 वीं कक्षा सन्‌ 1997 में पास की  इस दौरान मैने कई बार सरकारी नौकरी फोज की भर्ति के लिए कौशिश भी की लैकिन नहीं हो सका ।
  • फिर मैने मेरी पढ़ाई को जारी रखते हुए बगड  के ही एक निजी कॉलेज सैठ भगवानदास शिवभगवान पटवारी कॉलेज से बी.ए. की डिग्री हासिल की ।
  • बी.ए. मैने सन्‌ 2000 में पास की थी 49  प्रतिशत अंको के साथ ।
  • सन्‌ 2008 मैं मैने बी.एड. की परिक्षा दी उसमें पास हाने के बाद मैने राजस्थान विश्ववद्यालय से बी.एड. की डिग्री भी प्राप्त कर ली बी.एड. में मैने 72 प्रतिशत अंक  प्राप्त किये।
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मेरी विशेषकर रूचि
उस समय मुझे कम्प्यूटर के बारे में थोड़ी सी जानकारी प्राप्त हुई मेरी इच्छा कम्प्यूटर पढ ने की हुई। मैने बगड  कस्बे में खुले एक सेंटर पेस  नामक संस्थान से कम्प्यूटर का प्राथमिक ज्ञान प्राप्त किया मेरी रूची कप्म्यूटर को सिखने के लिए बढ ती गई। मैने 2001में कम्प्यूटर का डिप्लोमा लिया और कई सेंटरो पर पढ़ाना शुरू किया। मुकुन्दगढ  कानोरिया कॉलेज में भी कम्प्यूटर पढ़ाया। बाद में मैने अपनी खुद की कम्प्यूटर की दुकान खोलने का निश्चय कर लिया। और वैसे तो मैने 1998 से ही कम्प्यूटर का कार्य जैसे कार्ड छपाई आदि का कार्य शुरू कर दिया था 
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मेरा सपना मेरी कम्प्यूटर की दूकान
 सन्‌ 2001 में मैने अपनी पर्सनल दुकान शुरू कर दी। जो बगड  में बी.एल. स्कूल और बैंक ऑफ बड़ोदा  के पास थी। जिसका नाम मैने श्री नेशनल कम्प्यूटर आर्ट  डिजीटल कलर लैब रखा जो आज भी उसी नाम से चला रहा हूं। मेरी दुकान के अन्दर आज स्टूडियो का कार्य, शादी विवाह के लिए व सभी प्रकार की छपाई का कार्य तथा कम्प्यूटर रिपेयर तथा कप्म्यूटर सिखलाई का कार्य करवाता हूं।
  2004 में मैने अपनी दुकान का स्थान परिवर्तन कर लिया जो बगड  के पूर्व क्षेत्र में आज पीरामल गेट के पास स्थित है। जब मैने दुकान प्रारम्भ की तब बगड  में कम्प्यूटर द्वारा छपाई करने वाला एक मात्र मैं ही दुकानदार था बगड  के अन्दर बिजनैस के परपज से कम्प्यूटर लाने वाला पहला मै ही एक दुकान दार था।

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मेरी जिन्दगी की सबसे दुःखद दिन      
  

स्व. श्री जीवण राम जी भाम्बू (पिताजी)

       इस दौरान मेरे साथ एक दुखद घटना घटित हुई मेरे  पिताजी  श्री जीवण राम जी का असाध्य रोग कैंसर सें निधन हो  गया उनका निधन 10 जनवरी 2009 शनिवार पोष शुक्ल तिथ (चौदस) को प्रातः 4.15 बजे हुआ। वो मेरी जिन्दगी का एक सबसे दुखद दिन था।












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मेरी शादी के बारे में 
15 जून 2009 को मेरी शादी चिड़ावा तहसिल के एक गांव जखोड़ा में श्री प्रभूराम जी की सुपुत्री अन्जू कुलरिया से हो गई।

 
लक्ष्य भाम्बू बड़ा बेटा

15 अप्रेल 2010  (15  अप्रैल  2010 )को मेरे घर एक पुत्र का जन्म हुआ।

 जिसका नाम मैने लक्ष्य भाम्बू रखा है।







पियूष भाम्बबू (छोटा बेटा)





3 दिसम्बर 2018  को मेरे घर दुसरे बेटे का जन्म हुआ जिसका नाम मैने पीयूष भाम्बू रखा है।




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मेरी जिंदगी का दूसरा  दुःखद दिन

स्व. श्रीमती किताब देवी भाम्बू (मां)

8 मई 2021
 बैशाख कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि वार शनिवार को प्रातः 9:15 बजे ईश्वर ने मेरी माताजी श्रीमती किताब देवी का ममत्व मेरे सर से छीन लिया मैं आज बिल्कुल अनाथ हो गया, माँ की ममता मेरे सर से जा चुकी थी। ये मेरी जिंदगी का दूसरा सबसे दुःखद दिन था

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मेरी अभिरूचियां
मेरा पसदिदा  खाना - सादा खाना मुंझे पंसद है।
कैरी की सब्जी,सांगरी की सब्जी,कढ़ी भिण्डी की सब्जी मुझे बहुत पंसद है।

मेरा पंसदिदा रंग क्रीम कलर है।
मेरा पंसदिदा  साबुन लायबॉय तथा लक्स है।
मैं सदाबाहर गाने सुनना पंसद करता हूं।
दौस्ती करना मुझे बहुत अच्छा लगता है।
समाज सैवा करने में मुझे खुंशी होती है।
बच्चो से मुझे बहुत प्यार है।
मुझे पालतु पशुओं से भी प्रेम है।
मेरी रूची फुटबॉल के गेम में है।
और ज्यादातर रूचि कम्प्यूटर पर कुछ नया खोजने व करने में रहती है।


'' हमारी जिन्दगी की तो बस यही एक छोटी सी कहानी है,
कुछ रब की कुछ यारों की मेहबानी है। ''
    
                                       एस. एस. भाम्बू


मेरा पता :-
सुरेन्द्र सिंह भाम्बू  पुत्र श्री जीवण सिंह भाम्बू
ग्राम/पो. - मालीगांव तह. चिड़ावा
जिला - झुन्झुनूं (राज.)
मो. 9829277798
SURENDRA SINGH BHAMBOO S/o SHRI JIWAN SINGH BHAMBOO
VPO- MALIGAON VIA- BAGAR
TEH. CHIRAWA DIST. JHUNJHUNU (RAJ.)
MOB. 9829277798

Thursday, July 23, 2009

गाँव का रहन सहन व् खान पान

गाँव के पुरूष धोती - कुरता पैंट -शर्ट आदि सामान्य वस्त्र पहनते हैं । बुढे सर पर पगड़ी बांधते हैं । महिलाए घाघरा ,ओढ़नी, कुर्ता,साड़ी और लड़किया सलवार शूट पहनती हैं। व्रत त्यौहार पर बढ़िया वस्त्र पहनती हैं . महिलाए आभूषण सोने और चांदी के बने पहनती हैं । गाँव का रहन सहन सामान्य है ।
खान पान भी सामान्य हैं गेंहू व् बाजरे के रोटी और ग्रामीण सब्जिया ( गंवार फली ,सरसों के पत्ते ,केर, सांगरी ,साटे का राइता,चुलाई का राइता) आदि प्रमुख हैं । व्रत त्यौहार पर बढ़िया पकवान भी बनाते हैं। ज्यादा तर लोग गाय व् भैंस का दूध पीते हैं । कुछ लोग शराब का सेवन भी करते हैं । बुजुर्ग लोग चिलम हुक्का बीडी आदि पीते हैं और कुछ लड़के बड़ी सिगरेट पीते हैं। सभी आपस में मिल जुल कर रहते हैं। सभी मिलजुल कर व्रत त्यौहार मानते हैं ।

Tuesday, July 21, 2009

गाँव की भोगोलिक सरंचना


मेरा गाँव एक टिल्ले पर बसा हुआ है ।
पुरे गाँव का बरसात का पानी गाँव की दक्षिन दिशा की तरफ निकलता है ।

 मेरे गाँव की जलवायु सामान्य हैं यहा की मिटटी उपजाऊ है । गाँव की एक तरफ मिटटी के बड़े बड़े टिल्ले हैं । खेतो के ज्यादा तर बुवाई ऊँटों से होती है तथा ट्रेक्टरो से भी खेती होती है\ मेरा गाँव सड़क मार्ग से बगड़ और अन्य गाँवो से जुडा हुआ है । 
गाँव में यातायात के साधन बस, जीप और टेंपो हैं गाँव के बिच में एक बड़ा चोक हैं जहा गाँव के चोपाल लगती है । लगभग खेती बरसात के पानी पर ही निर्भर है कुछ लोगों के पास सिचाई के कुए भी हैं । यहाँ रवि और खरीफ दोनों फसल बोई जाती हैं । रवि की फसल में बाजरा ,गंवार मुंग ,मोठ आदि बोए जाते हैं । तथा खरीफ की फसल में गेहूं ,चना,सरसों, जो, मेथी ,प्याज आदि बोए जाते हैं ।

गांव की बसासत तिसरी आंख ड्रोन केमरे की नजर से



Sunday, July 19, 2009

मेरे गाँव का परिचय



मेरे गाँव का नाम मालीगांव  Maligaon है, जो झुंझुनू जिले से 18 (अठारह )किलोमीटर उतर पूर्व में स्थित है जो बगड़ नगर से 5 (पॉँच ) किलोमीटर उतर दिशा में स्थित है इसकी  ग्राम पंचायत अलीपुर है
तथा तहसील और पंचायत समिति चिडावा है।

निकास :; हस्तनापुर दिल्ली से निकास
तंवर क्षत्रीय 
1पहला गाँव  हरियाणा में कुंजला खेड़ा बसाया 
2बाद में तेजरासर गाँव,
3बराला,
4 लडेरा खेड़ा 
यहां से जाकर हरिपुरा गाँव,भवानीपुर गाँव ,कुतकपुरा धीरासर गाँव भामासी  गाँव बड़पालसर गाँव ,ढढार गाँव आदि गाँव बसाए

    बही भाटों के अनुसार हमारा पुराणा (लडेरा खेड़ा) गांव लगभग 600-700 वर्ष पूर्व  का बसा हुआ है। उनके अनुसार हमार पूर्वज (भाम्बू ) यहा आने से पहले दिल्ली के पास  हरियाणा मेंकुंजला  खेडा गांव में रहते थे । वहा से उठकर कुछ लोग हमारे यहा आकर बसे थे , तीनो भाम्बूओं के गांव मालीगांव,नारनोद,अलीपुर के बीच एक उचे टिले पर बसा था सम्वत 1452 में गाँव लडेरा खेड़ा बसाया पहला भाम्बूओं का गांव।  ऐसा कहा जाता है कि यहा तीन भाई आये और फिर उन्होंने अलग अलग ये तीनों गांव बसाये  मालीगांव ,नारनोद,अलीपुर
तीनो गाँव एक ही दिन बसे सम्वत 1638 में बसे थे मालुखा पठान के राज में बसे है ये तीनो गाँव।
  कुम्भा राम जी के बड़े बेटे कुंतल ने लडेरा खेड़ा गाँव को छोड़ कर नारनोद गाँव बसायाजो आज है , और छोटे बेटे पातल ने अलीपुर गाँव बसाया जो आज है , और चौधरी लादूराम जी ने मालीगांव गाँव बसाया मालुखां पठान के राज में बसा इसलिए इसका नाम मालीगांव पड़ा
अतार्थ मेरा गांव मालीगांव 440 साल पहले बसा हुआ है।

 


मेरे गाँव में ३०० घर है, जिसमें ( हिंदू ,मुस्लमान ) दोनों धर्म के लोग रहते है , हिन्दुओ में (जाट,हरिजन धानक गुवारिया ,नाइ ) आदि जात के लोग रहतें हैं जाट लोगो का गोत्र भाम्बू
हैं मेरे गाँव की जनसँख्या लगभग २००० हैं और लिंगानुपात 1000 पर 930 हैं गाँव के 70 प्रतिशत लोगों का व्यवसाय खेती हैं , बाकि के 10 प्रतिशत लोग नोकरी करते हैं , तथा अन्य 10 प्रतिशत लोग अपना अलग अलग व्यवसाय करतें और 10 प्रतिशत लोग बेरोजगार है। 
गाँव की लगभग औरतें घर का कार्य करतीं हैं कुछ नोकरी भी करतीं हैं । गाँव में ३ मन्दिर गोगा जी के हैं १ गाँव के बीच में हैं , और २ गाँव के दोनों तरफ हैं जहा पर सांप के काटने पर भगतो द्वारा गोगा जी के कृपा से इलाज किया जाता हैं २ मन्दिर बालाजी के हैं

जहाँ रोज सुबह शाम आरती होती हैं । गाँव में एक मस्जित है जहाँ पैर मुस्लमान नवाज अदा करते हैं । गाँव के 8 प्रतिशत लोग खेतो में रहते हैं । 2 सरकारी विद्यालय हैं एक 10 वी तक का तथा

एक 5 वी तक की स्कूल हैं एक गेर सरकारी विद्यालय 10 वी तक का हैं ।

जहाँ पर लड़के व् लड़कियो के साथ पढने के सुविधा हैं गाँव में 3 सरकारी कुए हैं तथा १ पानी की बड़ी टंकी हैं तथा 3 टंकी छोटी हैं । गाँव के लगभग घर पक्के बने हुए हैं ।


गांव का बालाजी मन्दिर जहां शुरू से ही गांव की बारातें (जान) चढ़ती आई है और आज भी गांव के हर व्यक्ति की बारात इसी मन्दिर पर धोंक खाकर चढ़ती है।






मेरे गोत्र भाम्बू का इतिहास

 Village Name               -       Maligaon 
  Post Office Name       - Maligaon
  Gram Panchyat Name  - Alipur
  Tehsil Name               -  Chirawa 
  Via                             - Bagar
  Distt.                          -Jhunjhunu
  State                           - Rajasthan,  India
   Pin No.                      - 333023
   Maligaon

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