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Saturday, May 8, 2010

बगड़ एक नजर में ....

बगड़ का वह गढ़ (महल) जो नवाबो ने बनवाया था
  • आज शिक्षा की नगरी बगड़ जहां बैठकर मैं यह ब्लॉग लिख रहा हूं उस नगर के बारे में लिखना व जानना मेरे लिए एक बहुत ही गौरव की बात है।  
 बगड़ पीरामल गेट जो सन् 1928 में निर्मित हुआ
बगड़ का ऐतिहासिक उद्भव काल
 राजस्थान का एक भाग शेखावाटी के नाम से जाना जाता है। आमेर के शासक उदयकरण जी के पुत्र मोकल जी के एक पुत्र शेखा थे उन्होंने अपना अलग राज्य स्थपित किया जो उनके नाम से शखावाटी कहलाता है। उनके वंशजो ने सीकर,झुन्झुनूं,नरहड़,सिंघाना आदि क्षेत्रों पर अधिकार कर  शेखावाटी क्षेत्र का विस्तार किया। झुन्झुनूं शहर ‘इतिहास कारो के अनुसार’ 12 वीं शदी से पूर्व का माना जाता है। झुन्झुनूं  14 कि.मी दूरी पर बगड़ कस्बा बसा हुआ है।  ‘‘क्याम खां रासो’’ में लिखा है कि बगड़ में मोबत खां कायमखानी रहा था, जब क्यामखानियों से हिसार छुटा तब मोबत खां ने  झुन्झुनूं पर अधिकार कर लिया। विक्रम संवत 1503 के आसपास का समय था।
     वर्तमान बगड़  के जो अवशेष प्राप्त हुए है वे पठानों के समय के ही माने गये है। यहा की वर्तमान जातियों में गोदारा जाट सबसे प्राचीन है। जोअब जाटाबास,बगड़ में बसते है। इनका बगड़ में बसने का समय उनके ‘‘बही भाटो’’के अनुसार वि.स 1405 है। अतः वर्तमान बगड़ 15. वी शताब्दी का है। इतिहासकार
‘रघुनाथ सिंह शेखावत’ के अनुसार पुराना बगड़ वर्तमान बगउ़ से एक कि.मी.  दक्षिण पश्चिम में स्थित था। आजकल उस स्थान को ‘‘बुढ़लीभर’ कहा जाता है। बुढ़लीभर का अर्थ पुराने टीले से है  टीले पर ठिकरिया आदि अवशेष मिले है  यह टीला काफी जगह घेरे हुए है। पुरातत्व विभाग जयपुर के कला अधीक्षक श्री विजय  शंकर श्रीवास्तव ने इन अवशेषों को चैहान कालीन बताया है। चैहानों का समय 8 वीं शताब्दी से 12 वीं शताब्दी है। अतः  कहा जा सकता है कि उस समय यह बस्ती बसी हुई थी।   
    बगड़ को प्रमाणों व दन्त कथाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि वि.स. 1788 में शार्दूल सिंह शेखावत ने  नागड़ पठानों से नरहड़ व बगड़ (शेखावाटी)प्राप्त किया था।  बाद में यह (शेखावाटी क्षेत्र) जब शार्दुल सिंह के पाचं पुत्रों जोरावर सिंह, किशन सिंह,अख्यसिंह,नवल सिंह,और केशरी सिंह मे बराबर-बराबर में बांटा गया  यह ‘बटाई  ‘‘पांच पानों’’ के नाम से जानी जाती है।  पांचो पानों का यह बगड़ नगर शोखावाटी के प्राचीन नगरों में  एक है। इसके बाद जोरावर सिंह के पुत्र महासिंह को बगड़ का पंाचवा हिस्सा प्राप्त हुआ ये पहले नवाबों के गढ़ में आकर रहे। आज उनके बहुत से वंशज बगड़ में ही निवास करते है। नरहड़ के तीसरे नबाब अलाउद्दीन ने पीरबाबा के डर से नरहड़ छोड़ा और बगड़ में बसा। और उसने बगड़ को अपनी राजधानी बनाया। उसके पश्चात बगड़ में हसन खां ,बावन खां और कुतुब खां नबाब हुए।
    वि.सं. 1715 के आस पास दो चमत्कारी महापुरूष इन नगर में हुए थें एक का नाम था रूपादासजी व दूसरे थे इजेतुल्लेशाह। इन दोनों में काफी दोस्ती  थी। दोनो महापुरूष हिन्दुमुस्लिम  एकता के जीते जागते प्रतीक माने गये है।
    वि.सं. 1786 तक बगड़ पर नबाबी शासन था। 275 वर्षो तक यहां  पठान नबाबो का शासन (दबदबा) रहा। बडे़ बुजुर्गो स मुह से आज भी नबाबो द्वारा 52 पालकियां निकालने की बात सनने को लिती है। इन नबाबो ने अपने काल में बहुत से कुए, मस्जिदे, इमारते बनवाये थे  आज भी उनमें से कुछेक के अवशेष मात्र देखे जा सकते है। कहा जाता है कि उनके काल में 360 लाव चला करती थी अर्थात 360 कुए चला करते थे। उनमें से बहुत से हुए अब मिट्टी में दब चुके है।  कुछ जलदाय विभाग के काम आ रहे है कुछ मं पानी नही रहा, कुछ अवशेष मात्र है।
    वि.सं. 1840 में शुर्दल सिंह के पड़पौते मालिक सिंह (महासिंह) बगड़ आये और गढ़ का निर्माण करवाया वि.सं. 2004 तक  अतार्थ सन्1947 तक करीब 164 वर्षोतक बगड़ पर शासन उनके वंशज ही करते रहे। बाद में जयपुर रियासत के विलीनीकरण के साथ ही पंचपानों के इस बगड़ नगर को भी राजस्थान में मिला लिया गया।
     बगड़ कस्बे के पश्चिम मेंबने फतेहसागर तालाब का निर्माण आज से लगभग 123 वर्ष पूर्व वि.सं. 1934 में हुआ था इसका निर्माण फतेहचन्द औझा ने करवाया था। कहा जाता है कि इसका निर्माण आधा सेर मोठांे की मजदूरी देकर करवाया गया था। और इसके साथ बना शिवालय का निर्माण भी इसी समय हुआ । यह तालाब लगभग 10 हजार फुट क्षेत्रफल का है। तथा लगभग 60 फुट गहरा है। इसमें पुरूषो,महिलाओं,पशुओं के लिए अलग अलग घाट बने हुए है। जो आज भी मौजूद है।

    वर्तमान बगड़ नगर आज पिलानी के बाद शिक्षा की दृष्टि से दूसरा स्थान रखता है। इसका धरा नाम ‘‘ छोटी काशी’’ भी माना जा सकता है।
(उपरोक्त  आंकड़े सम्बन्धी जानकारी इतिहास कार रघुनाथ सिंह  शेखावत व मुकुन्द सिंह शेखावत की पुस्तकों के आधार पर है तथा कुछ बुजुर्गो द्वारा मिली है।)


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