सूचना

यह वेब पेज इन्टरनेट एक्सप्लोरर 6 में ठीक से दिखाई नहीं देता है तो इसे मोजिला फायर फॉक्स 3 या IE 7 या उससे ऊपर का वर्जन काम में लेवें
Showing posts with label अंधविश्वास. Show all posts
Showing posts with label अंधविश्वास. Show all posts

Saturday, July 15, 2017

21 वीं सदी में भी क्या संभंव हैं ये घटनाएं,क्यौ और कैसे ???...

एक तरफ जहां हम 21 वीं सदी में जी रहें है और विज्ञान अपनी उच्च प्राकाष्टा पर  है।जहां एक तरफ विज्ञान ने आत्मा का वजन तक माप लिया है,मृत व्यक्ति को विज्ञान कुछ घंटें बाद तक बुलवाने का दावा करती हैं । वहीं इस देश में अंधविश्वास भी साथ साथ अपने उतने ही पैर

फैलाऐ हुए है। भूत प्रेत, प्रेतआत्मा, चाौराहों पर सनख लगाना, टूडर टोटके आदि आदि  और ये सब सब गांवों में ही देखने को नही मिलता बल्की शहरों में इसका  प्रचलन प्रभुत्व ज्यादा देखने को मिलता  है।
जबकि शहरों में तो इसका उठाव प्रभुत्व कम होना चाहिए क्योकिे वहां तो शिक्षा का प्रभुत्व ज्यादा  होता हैं लेकिन इससे उल्टा हो रहा है। शहरोक से ज्यादा अफवाए पैदा होती है इसे क्या माना जाये? क्या आज  भी ये अंधविश्वास भुत प्रेत आम्ता जैसी चिजे हैं या विाान गलत है? सोचने पर मजबूर कर देता है। हम कहा जी रहें है? क्या ये बाते सच है  ? तो कैसे और नहीं है तो ये सब क्यों ? अगर है तो विाान क्यो गलत बता रही है। इन्ही सवालों के मध्य दिमाक चकरा जाता  है।

अब आप ही पढ़कर निर्णय करके बताये की सच क्या हैं विज्ञान या अंधविश्वास
राजस्थान में आजकल रात्री को सोते समय काटे जा रहें है महिलाओं बच्चों के बाल 
इसी विषय को लेकर आजकल एक अफवाह चल रही  है इसे अफवाह   कहूं या सच ये तो आप ही निर्णय करें मैं तो अफवाह ही कहूंगा क्योकि मैं इन सब में विश्वास नहीं करता हूं।
राजस्थान आजकल अखबारों के मुख्य पेज पर छााया हुआ है। और इलेक्टोनिक मिडिया सहित सोशल मिडिया में भी चर्चा का विषय बना हुआ  है।  एक तो विषय तो कुख्यात गैगस्टर आनन्दपाल चुरू का पुलिस द्वारा एनकाउटर जो प्रशासन के गले की हड्डी बना हुआ है। पर ये मेरा विषय नहीं है।
वहीं दुसरी और आजकल राजस्थान के लगभग गावों शहरों से खबरें सोशल मिडिया पर आ रहीं हैं कि  रात्री को सोते समय कुछेक लोग जानवरों का रूप धर कर घसर में प्रवेश करते हैं और रोती हुई महिलाओं के बाल चोटी काट  डालते है। और बच्चों के भी बाल काट लेते है। और अफवाह है कि जिस औरत या बचचे के बाल कटे है वो बेहोस हो जाता है और बाल काटने के तिन दिन बाद उसकी मृत्यु हो ताजी है।  और तो और बाल काटने वाला व्यक्ति दिखाई तक नहीं देता सिफ और सिर्फ बिल्ली या कुत्ता जैसे जानवर दिखाई देते हौ और बाल काटने वाला इंसान तुरंत बाद हवा बनकर गायब हो जाता बताया जाता है।
और बाल काटने के साथ साथ उस महिला या बच्चे के शरीर पर त्रिशुल का निशान छोड जाते है। इस प्रकार का डर  अंधविश्वास आजकल पुरे राजस्थान में हरेक ढ़ाणी हरेंक गांव शहर में व्याप्त है।



पुरा राजस्थान इस खौप में जी रहा  हे। लोग सांम होते ही घरों में कुण्डी लगाकर सो जाते हैं बाहर तक नहीं निकलते अब उन्हे कौन समझाये की आप 21 वीं सदी में जी रहें है। ये कुछ नहीं होता पर बस रोज रोज की घटनाऐ रोज रोज की खबरों ने उनके दिमाक में बस एक ही बात बैठा दी हैं कि ये वास्तम में हों  रहा  है।   इसके चलते पुलिस प्रशासन भी सकते में है।  पर पुलिस के हाथ ऐसा कोई असामाजिक तत्व या सुराग हाथ नहीं लगा है जिससे मामले का खुलासा हो सकें।
हा इतना जरूर है कि बाल कटे जरूर हैं वो खुद ने काटे है या किसी असामाजिक तत्वों ने काटे  है इस बात का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है।
हा इतना जरूर है कि बाल कटे जरूर हैं वो खुद ने काटे है या किसी असामाजिक तत्वों ने काटे  है इस बात का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। एक दो जगह से ये बाते सामने आई है कि कुछेक महिलाओं ने इस अफवाह के चलते घर के काम काज से तंग आकर खुद ही अपने बाल काट लिए और अफण्ड घड़ लिया
पर सभी ने तो एसा भी नहीं किया तो फिॅर ये क्या हैं ये अभी तक एक पहेली बनी हुई  है।


कुछेक जगहो से यूपी के कुछके लोगों का मारपीट कर गिरफ्दार भी किया गया है। ऐसी सूचनाएं भी सोशल मिडिया के माध्यम से प्राप्त हुंई है ये सही है या गलत ये भी नहीं पता और वो ऐसा कर रहे है तो क्यो उनको बल काटने से क्या हाशिल होता हैं हैं और कुछ हासिल भी होता है तो भी वे कुत्ता बिल्ली जैसा रूप कैसे  धारण कर लेते है। ये भी एक पहेली है।  क्या इस वैज्ञानिक युग में ऐसा हो पाना संभव है। कोई उन्हे यूपी के बसमाश बता रहा  है कोई बंगाल के काले जादूगर का नाम दे पा रहा है हकीकत क्या है ये कोई भी नहीं जान पा रहा है।
जबकि पुलिस प्रशान और अखबार वाले इसे कोई अफवाह बता रहें हैं कोई सबूत मिलना नहीं बता रहें हैं से घटनाऐ  झुन्झुनूं, जयपहाड़ी, बुडाना ,नरहड़, चिड़ावा,उदयपुर वाटी,पिलानी नोख, नागौर सहित कई गोवों में और शहरों में घटित हो चुकी है।

अब आप ही बताइऐ विज्ञान के इस युग में क्या बाते संभव है। अगर सभंव है तो कैसे
हा इतना जरूर है कि बाल तो कटे हैं वो काटे गये या कटे ये एक पहेली बनी हुई है। और काटे गये तो क्यों  ??
और आज भी ऐसा अंधविश्वास व्यापत है तो क्या हिन्दुस्तान आगें बढ़ पायेगा एक तरफ डिजीटल इंडिया और दुसरी तरफ कटती चोटीयां  कटेते बाल इंसान बिल्ली कत्तो का रूप धरते ये कहां तक सच है??
 क्या ये कोर्इ  नया डिजीटली करण् तो नहीं  ??


 ये एक सावाल  आप विद्यानों आगें है अब आप ही उत्तर दे   अंधविश्वास जिन्दा  है या विज्ञान?







 मुझे इन घटानों का सच मालुम हुआ तो फिर आपको जरूर बताउगां तब तक के लिए  इजाजत ...
आपका  अपना
                                                                       सुरेन्द्र सिंह  भाम्बू

 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

लक्ष्य



अन्य महत्वपूर्ण लिंक

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...