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Wednesday, February 5, 2020

सरसों की फ़सल परवान पर ,मालीगांव

सभी ब्लॉगर मित्रो को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
दोस्तों फ़ेसबुक ओर व्हाटसएप्प नई ब्लॉगर दुनिया को बहुत हद तक भुलवा सा दिया है काफी समय हो गया ब्लॉगर पर लिखे हुए इसके लिए क्षमा चाहता हु।आगे से लगातार ब्लॉगर पर बने रहने का प्रयास करूंगा
आज बात करते हैं इस दिनों परवान पर चढ़ी सरसों की फ़सल की
 गांव मालीगांव में इस समय सरसो, चना,गेहूं जौ आदि की फसल उगाई हुई है। आज जब देखा तो खेत मे खड़ी पीले फूलों से लथपथ सरसों की फसल एक नवयोवना दुल्हन की भांति सजी संवरी बहुत सुंदर लग रही है हमारी फसलें वास्तविक रूप से माने तो धरती का श्रृंगार ही है। धरती माता इन्ही फ़सलो के माध्यम से हर ऋतु के अनुसार अपना अलग अलग श्रंगार करती है और किसान को रोजी रोटी उपलब्ध करवाती है इस प्रकार से लहलहाती फसल को देखकर किसान को बहुत खुशी मिलती है। वास्तव में उसकी मेहनत रंग ला रही होती है इस बार प्रकृति ने भी कुछ हद तक किसान का साथ दिया है समय समय पर हल्की फुल्की बारिश होती रही और सर्दी भी ठीक ठाक ही पड़ी।
आज के लिए सिर्फ इतना ही मिलते ह नई पोस्ट के साथ तब तक के लिए नमस्कार

Monday, August 20, 2018

आपा डोलर में हिडांगां आपा चकरी मैं बैठांगा मेला बगड़,लक्ष्य के इंजॉय के कुछ

बगड़ व आस पास के गांवों के लोगो के लिए खुश खबरी बगड़ के श्याम मंदिर के सामने ग्राउंड में रक्षाबंधन ओर जन्माष्ठमी के त्योहारों को मध्यनजर रखते हुए मारवाड़ हैंडी क्राफ्ट एवं उधोग मेले का शुभ आरंभ आज शाम 7 बजे हो चुका है ये मेला 3 सितम्बर चलेगा ये मेला इंडियन मीडिया जर्नलिस्ट यूनियन झुंझुनू के तत्वावधान में लगाया गया है इसे लगवाने में सहयोग भाई विजेंद्र मेहता यूनियन के राजस्थान प्रदेश इकाई के प्रदेश सचिव तथा बलदेव जी सैनी का है इस मेले में आपको एक ही छत के नीचे कई प्रकार की वस्तुएं खरीदने व देखने को मिलेगी जिसमे घरेलू सामान ,चाट व खाने पीने का आइटम खासकर औरतों की जरूरत सम्बन्धी खरीदारी का समान बच्चों के खिलौने व उनके कपड़े आदि उपलब्ध रहेगा। मेले का विशेष आकर्षण बच्चों के कई प्रकार के छोटे बड़े झूले है जिनमे बच्चें झूलकर आनन्द ले सकते है

शहरों में वैसे तो ये झुले मेले आम हो गये हैं पर गांवों में इनका क्रेज अभी भी बाकी है। लोग बड़े चाव से मेला देखने आते हैं और बच्चों को झुले दिलवाने के लिए साथ लाते है। और गांव की औरते भी चकरी डोलर हिण्डे में हिडंने के लिए ललायत रहती है।



हेलिकाप्टर झुले का आनन्द लेते हुए बेटा लक्ष्य

बगड़ मेले में बेटा लक्ष्य विभिन्न प्रकार के झूलो में झूलते हुए ओर पानी मे बोट चलते हुए लक्ष्य के इंजॉय के कुछ पल।
आप घूमे की नही मेले में ??

हेलिकाप्टर झुले का आनन्द लेते हुए बेटा लक्ष्य 
हेलिकाप्टर झुले का आनन्द लेते हुए बेटा लक्ष्य

जीफ गाड़ी झुले का पर मस्ती करते हुए बेटा लक्ष्य

पानी में नाव /बोट चलाने का मजा लुटते हुए बेटा लक्ष्य
जीफ गाड़ी झुले का पर मस्ती करते हुए बेटा लक्ष्य


पानी में नाव /बोट चलाने का मजा लुटते हुए बेटा लक्ष्य
बाईक झुले का मजा लेते हुए















बाईक झुले का मजा लेते हुए
बाईक झुले का मजा लेते हुए
अतः आप सभी से अनुरोध है इस मेले में ज्यादा से ज्यादा पधार कर मेले का लाभ लेवें ओर बच्चों को झूलो का आनन्द दिलावे क्योकि अब आपको इस प्रकार के मेले ओर बड़े झूलो के लिये बड़े शहर 15- 20किमी दूर जाने की जरूरत नही सब कुछ आपके शहर बगड़ में ही उपलब्ध है इस मेले में ।
मेले का एक नज़ारा एक झलक पेश है


आज के लिए इतना ही मिलते है ब्रेक के बाद....



लक्ष्य


Monday, May 22, 2017

शेखावाटी का प्रसिद्ध रसदार खाद्य फल,पील

     शेखावाटी का प्रसिद्ध खाद्य फल  पील.....  पर उससे पहले कुछ गिले सिकवे ... नमस्कार दोस्तों काफी समय से ब्लॉग पर कुछ लिख ही नही पाया कारण आप सभी को पता है फैस बुक और व्हाटस् अप की बढ़ती महता ने ब्लाॅगरो की महत्ता कुछ हद कम कर दी हैं या यू कहें न  के बराबर कर दी है। 
आजकल देखा गया है कि ब्लॉग पर लोगों की  आवाजाही बिलकुल कम होती जा रही  है। इसलिए हमारा यानि ब्लाग् लिखने वालों का मन भी ब्लाग लिखने की बजाय इन्ही सोसल साईटस पर लिखने का ज्यादा करता है। या यू कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ! ब्लॉग पर लोगों की  घटती नफरी और फैसबुक और व्हाटस् अप की तरफ लोगो का बढ़ता खिंचाव आरे हो भी कैसे नही जमाने के साथ जो चलना पड़ता है। 
जाळ का फल पील
 ये तो रही कई दिनों से  न लिख पाने की बात अब आज जो मै आपको बताने जा रहा हूं वो हैं
जाळ का फल पील
शेखावाटी का प्रसिद्ध खाद्य फल  पील, पीलू आदि अपने अपने ऐरिये के हिसाब से इसके नाम हैं पर हम तो इसको पील कहते है। जो सिर्फ गर्मी के मोसम में ही खाने को मिलता है जो लू से बचाने में मददगार है  लू अवरोधक है।
क्या आपने खाया है इसे कभी ? किस किस ने खाया है? मैंने तो बहुत बार खाया है और आज भी सुबह सुबह आनंद ले रहा हु इसका। अब  इसके बारे में बतात हूं जितना मुझे पता  हैं जो जानकारी मकुझे बडै बुढ़ो से मिली है उसी के हिसाब से बता रहा हूं
जाळ का फल पील
जाळ का पेड़
को खाकर आनन्द लेते हुए मैं
पील का पेड़  (जाळ) बहुत घना जटिल तरीके से फैला होता है।  इस कारण स्थानीय बोलचाल में इसे जाळ का नाम दिया गया है।ये पेड़  शेखावाटी क्षेत्र (पश्चिमि राजस्थान) में मुख्यतया पाया जाता है। इस गर्मी भरे मौसम में ये ही एक ऐसा पेड़ है जो कि हरा भरा रहता है। और मिठा फल देता  है। ये उमस भरी गर्मी में   शीतल छाव के साथ साथ खाने के लिए मिठे मिठे फल पील,पीलू भी देता  है। इसके लगने का समय अप्रैल माह से जून तक का है।  तेज गर्मी के शुरू होते ही  जाळ के पेड़ पर हरियाली छा जाती है और फल लगना शुरू हो जाते है।इसके फल चने के आकार के मीठे सरदार  होते है।   जिसको हम पील के नाम से जानते है। इसके कई रंग जैसे  लाल, पीले व बैगनी रंग के इन पीलों (फलों ) से एकदम मीठा रस निकलता है। हमारे  रेगिस्तान में इस फल को मेवे की उपमा दी गई है। है और  यह पौष्टिकता से भरपूर होता है और  बड़े बुजर्ग कहते है कि इसे खाने से लू नहीं लगती। साथ ही इसमें कई प्रकार केआर्युरवेदिक  औषधीय गुण भी बताये जाते है। इससेक कई प्रकार की इवाईयां भी बनाई जाती है।
गांवों के बच्चे और औरते इसको पेड़ पर चढ़कर तोड़ते हैं और इसे इकट्ठा करने के लिए लोटे  व केंतली का इस्तेमाल लिया जाता  है। लोटे के मुह पर रस्सी बंधी जाती हैं और फिर लोटे  व केंतली को गले में डाला कर पील तोड़ी जाती है। 
सबसे अंन्त में इसे खाने का तरीका
  इस  मीठे रस भरे इस फल के खाने की सबसे बड़ी खासियत है
दोस्तो इसे खाने का तरीका भी अलग ही है इसे बहुत ही सावधानी के साथ खाना पड़ता है। अन्यथा आपकी जीभ कट सकती है जीभ पर फाले हो जाते है।  इसे आप एक एक करके नहीं खा सकते  अन्यथा अपकी जीभ छिल जाती है। इसे एक साथ आठ-दस दाने मुंह में डाल कर खाना पड़ता है। यानि एक फांका (कई सारे दाने) एक साथ खाना पड़ता है।
 तो दोस्तो जब कभी आपको ये फल खाने को मिले सावधानी से खाये ,और  आशा है आपको ये जानकारी रोचक लगी होगी ।आज के लिए इतना ही फिर मिलते है ब्रेक के बाद.....

 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

लक्ष्य





Thursday, January 5, 2017

गुली डंडा का खेल में ( एक आंचलिक कविता)

ब्लॉग जगत के  सभी पाठको,देशवासियों,  ब्लॉगर मालिको व सभी दोस्तों के परिवार जनों को मेरी तरफ से नव वर्ष 2017 की हार्दिक शुभकामनाए
बस बैठे यू ही बचपन की पुरानी बात यात आ जाती है कुछ बाते ऐसी होती है जो कभी भुलाई नही जाती स्वत: ही याद आ जाती है। वो बचपन का खेल.. कूद.... वो पुरे दिन की मोज- मस्ती...  जब यादआते है तो ऐसा लगता है मानों अब हम कहा फंस गये वो दिन बहुत ही अच्छे थे। 
मोबाईल उमें गेम के अलावा कुछ जानती ही नहीं और वो जानना भी नहीं चाहती कारण क्या है ??  ये तो मुझे मालूम नहीं पर ऐसा देखा गया है। हा हमारे समय के बचपन के खेल  और मस्ती के तरीको को किसी ने एक कविता में पिरोया जो मुझे तो बहुत अच्छी लगी सोचा आपके साथ शेयर करू
गुली डंडा का खेल में
लाला और कड़ा मांगता
चौमासा की बरसात म
खावण खातर गड़ा मांगता
डबक बिलाय म
आगला की कमर तोड़ देता
कुवा पर पानी की लड़ाई म
आगला को घड़ो फोड़ देता
और लड़ता भी तो क्यां खातर
मोरया की पांख खातर
बोरया की ढांक खातर
नीम्बू रास की फांक खातर
काकडी और मतीरा खातर
धोलो रंग क घुचर्या खातर
होल्या को धमाल
आथुणा बास म

  चंग कोस र ल्याबा
की चर्चा अगुणा बास म
छाती चौड़ी हु ज्याति
फागण आत्त्त जात्त्त सियाला म
जद कोई धोती आलो
उतरतो कबड्डी पाला म
समझ कम अकड़ घणी
हर एक यार म
सर झुकतो तो खाली
दूल्हा बाबा की सुंवार म
कुड़तो कोनी दाबता पेंट म
कठै लागेड़ी कारी दिख ज्याति
म चुप जद थारी दिख ज्याति
तू चुप जद म्हारी दिख ज्याति
छींक साट्ट पुग ज्याव
उडीकनाला कण उडीकदार
बे डाकिया न रहया अब
बे कागद हुया बेकार
दो ही आदमी होता काम आला
क फौजी क आसाम आला
न ल्याव आगरा क पेठा
न ल्याव कश्मीरी अंखरुट
न जांण कद आव आसामी
हर कद जाव रंगरूट
मिनख बदलग्या

मिनख चारो बदल गयो
मॉडर्न बनबा क चक्कर म
गाँव सारो बदल गयो
बेशक बदलनो वक़्त क सागे
के पासी जो भाग गया वक़्त क आगे
सीख दयूं सब न
इतरी समझ कोनी बीरा
हाँ अलख जगातो जे होतो
कोई साधु संत या फकीरा
  बहुत ही सुन्दर आंचलिक कविता है दोस्तों आपको कैसी लगी?

 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

लक्ष्य

Saturday, December 31, 2016

31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

साल की शुरूआत तो कुछ हद तक सही हुई पर बीच में क्या क्या हुआ उसकी मेरी नजर में  थोड़ी- थोड़ी समीक्षा कर रहा हूं  कहीं तेज गति से चलती रेल पट्टरी से उतरी कभी उरी हमला हुआ फिर  सर्जिकल स्ट्राईक हुई कही आंतकवादी मारे गये कही उनके मनसुबे नाकामयाब हुऐ किसी की मांग का सिंदूर उजड़ा किसी की गोद सुनी हुई किसी का बेटा शहीद हुआ तो किसी का भाई वीर गति को प्राप्त हुआ  झेलना पड़ा बेचारे भारत माता के जवानों को जो हमेशा से झेलते आ रहें है। इन राजनैताओं का क्या बीगड़ा वो ता फिर भी इनकी शहादत पर अपनी राजनिति की रोटिया सेकने लगें जैसे तैसे समय बीतता गया और काल चक्र चलता गया और फिर  हुआ इस साल का सबसे बड़ दुःख दायी ऐलान 8 नवम्बर की वो रात सबको याद है उसे कोई नहीं भूल सकता   नवम्बर का तो देव उठने की तैयारी के साथ शादी ब्याह सावे आदि की धूम मचने लगी  पर इसी बीच मोदी बाबा ने कर दी सबको चैकाने वाली घोषणा और सबको लगा दिया नये धन्धे (लाईनों में) ये 50-52 दिन कैसे गुजरे ये या तो वो लोग बता सकते है जो लाईनों में खडै रहे या वो जो पैसे के लिए तरस गये या वो जिनके घर कोई शादी ब्याह जैसेा प्रोग्राम था वो ही बात है जाके पैर न फटे बिवाई वो क्या जाने पीर (पीड़ा) पराई । नवम्बर से लेकर दिसम्बर तक के दिन यू ही 500 और  1000 की कस्मकश में बीत गये।  न किसी का धंधे सही तरीके से चले न कोई और काम लागों के चेजे भाठे का काम भी बन्द प्राय ही पड़ गया । 
और आज साल का आखरी दिन भी कैसा गुजरेगा लोग ये भी मोदी पर ही निर्भर करते है। लोग 31 दिसम्बर की पार्टी को भूल कर आज 7 बजे उनकी अगली घोषणा पर को सूनने के लिए ही  टीवी के आगे चिपके रहें गें क्या पता क्या नई घोषणा कर दे कहि फिर से लाईन में ...... नही.....  नहीं...... सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते है। 
इसलिए पार्टी की तरफ से ध्यान हटकर आज भी उनकी तरफ ही ध्यान है  इसे उनका डर कहें या उनके प्रशंसक कहे ये तो आप ही अंदाज लगा सकते है। इसे जन तंत्र कहे या तानाशाह राजतंत्र  ये फैसला भी मैं आप पर ही छोडता हूं और रही सही  कसर आखिर में यूपी में पूरी हो गई बेटा बाप का बागी बन बैठा  और बात ने बेटे को पार्टी से ही निकाल दिया एक मुख्यमंत्री को पार्टी से उसका ही बाप निष्कासित कर रहा हैं वाह रे राजनिति तुझे सलाम हैं ऐसे देश में क्या अच्छे दिन आ सकते है। मुझे तो नही लगता   और आपको ? ऐसे तो इतिहास में  पढ़ा और सुना था कि भाई भाई का दुश्मन बन बैठा और बेटा बाप का बागी हो गया और भाई ने भाई का कत्ल कर दिया वो भी कुर्सी के लिए पर वो बात समझ में आती  है कि वो जा राजतंत्र था तानाशाह शासन था पर आज  तो कहा जाने वाला जनतंत्र है आज भी ये सब क्यो ?  जनतंत्र में तो सारा खेल जनता के हाथ में है किर भी  ये लड़ाई क्यो  मतलब साफ है आज भी जनतंत्र सिर्फ कहने मात्र के लिए है जनता पंगू बनी हुई हैं और डोर आज भी बप बेटो की मुट्ठी मे है। या फिर मोदी जी की घोषणा में
किसका काला धन सफैद हुआ, कितना काला धन आया, कितना नष्ट हुआ किनके पास आज भी नये नोट जमा है और कौन आज भी दर दर की ठोकरे खाने के लिए बेबस है। कीसकी सफाई से ये काला धन सफेद हुआ कौन कौन से बैंको के कर्मचारीयों द्वारा ये नया धन किन किन को जमा करवाया गया  क्या ये कर्मचारी भारत सरकार के अधीन नहीं आते ?  तो फिर क्या कार्यवाही हुई उनके खिलाफ ...??  इन सब पर  कितनी भी चर्चा की जा सकती है पर आज साल का आखिरी दिन है सो ज्यादा न लिखते हुए आप पर ही छोडता हूं
आप सब बुद्धिजीवी है आप सब जानते हैं मैने तो साल भर की समिक्षा की बाकि आप सब जानते है क्या सही क्या गलत है ?
आज के लिए इतना ही मिलते है नई साल में इसलिए नई साल की अग्रीम शुभकामनाएं राम राम

आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

राजस्थान का गौरव कल्प वृक्ष कहा जाने वाला वृक्ष खेजड़ी (जांटी) है खतरे में ??

 कुछ दोस्त बहुत याद आते है..

  लुप्त होती भारतीय संस्कृति- इसे बचाये पर कैसे ?

लक्ष्य

Wednesday, March 2, 2016

मरवण रा बोल ....राजस्थानी कविता

म्हरा नाँजोगा भरतार
मदछकिया मरवण रा ढोला आ कांई कुबद कमाई
थारै लारै आय र रोटी कदै ही न ताती खाई
म्हारा मूंछ्यांला मोट्यार
ईयूं किकर पङैली पार
दिन भर फिरै भटकतौ छैलो
थौथी करै छैलांया जी
करेंई जावे बीकानेर करेंई जावे जयपुर
10-10 दिन ताणी घरें कोनी आवे
जद भी पूछूं आ ही केवे
अबके ओ लास्ट धरणू है
म्हारा नाजोगा भरतार
म्हारी कियां पङैली पार
मीठा बोल कदै ई ना सुणिया
बटका भरता बौलै
आई वसुंधरा सरकार
कूदण लाग्यो नौ नौ ताळ
भरस ऐक बीत गियौ, अब उपजी है आस
करम कमाई भूल गा साल दियो गुजार
म्हारी ऐक अरज सुणज्यौ वसुंधरा सरकार
म्हारा पिया जी ने दैवो नौकरी जणां पङैली पार
नीतर आँ छोटा - छोटा टाबरां की लागेली हाय

Thursday, October 8, 2015

पहले ढंग से इन्सान तो बनो,हिंदुस्तान खतरे में है

ना मुसलमान खतरे में है,
ना हिन्दू खतरे में है
धर्म और मज़हब से बँटता
इंसान खतरे में है।।

ना राम खतरे में है,
ना रहमान खतरे में है
सियासत की भेट चढ़ता
भाईचारा खतरे में है।।

ना कुरआन खतरे में है,
ना गीता खतरे में है
नफरत की दलीलों से
इन किताबो का ज्ञान खतरे में है।।

ना मस्जिद खतरे में है,
ना मंदिर खतरे में है
सत्ता के लालची हाथो,
इन दीवारो की बुनियाद खतरे में है।।

ना ईद खतरे में है,
ना दिवाली खतरे में है
गैर मुल्कों की नज़र लगी है,
हमारा सदभाव खतरे में है।।

धर्म और मज़हब का चश्मा
उतार कर देखो दोस्तों
अब तो हमारा
हिन्दुस्तान खतरे में है |

एक बनो, नेक बनो
ना हिन्दू बनो ना मुसलमान बनो,
अरे पहले ढंग से इंसान तो बनो।।

Friday, July 27, 2012

मायड़ भाषा राजस्थानी री शान बढ़ावण हाळा ब्लॉग

जिसूं पहचाने सब म्हाने आपांरी खास निशानी है
वा 10 करोड़ कण्ठां रमती मां भाषा राजस्थानी है।’’
‘‘भारत में 10 करोड़ लोग राजस्थानी भाषा बोलै है।  अर हमारी विडम्बना देखो आज भी  वो भाषा संवेधानिक मान्यता पाणे के खातर तरसै है।" 
आज नेट पर विचारण करता करतां राजस्थानी भाषा रा बे ब्लॉग मिला जो ठेठ राजस्थानी भाषा माय है और राजस्थानी भाषा का नाम मान सम्मान बढ़ावण लाग रया है। मैं उण सब ब्लॉग लिखण हाळा नै  घणो घणो धन्य वाद देऊं हूं कि  बे राजस्थानी भाषा न बढ़ावा दे रया है और नेट दुनिया मायं भी इह भाषा नें बढ़ावण लाग रया है। अर मैं थारे सामने पेश करणो चाउं हूं उण ब्लागा रा लिंक अर उण नैं लिखण हाळा मालिका का नाम
राजस्थानी रा रचनाकारां रा मं ब्लॉग म ओम पुरोहित 'कागद' रा 'कागद हो तो हर कोई बांचै' रामस्वरूप किसान,रामस्वरूप किसान री राजस्थानी कहानियों रो ब्लॉग
संदीप मील रो 'राजस्थानी हाईकू' अर 'बहती धारा'
 राव गुमानसिंह राठौड़ रा 'राजिया रा दूहा' अर, 'सुणतर संदेश' शिवराज भारतीय रो 'ओळूं' संग्राम सिंह राठौड़ रो 'स्व. चंद्रसिंह बिरकाळी री रचनावां' डॉ. मदनगोपाल लढ़ा रो 'मनवार' पूर्ण शर्मा 'पूरण' रो 'मायड़ भाषा'
 जितेन्द्र कुमार सोनी रो 'मुळकती माटी' ,कवि अमृतवाणी रो 'राजस्थानी कविता कोश',डॉ. नीरज दईया रा 'सांवर दईया', 'राजस्थानी कवितावां', 'नेगचार', 'राजस्थानी ब्लॉगर'अर 'अनुसिरजण', डॉ. दुष्यंत रो 'रेतराग', रवि पुरोहित रो 'राजस्थली, दीनदयाल शर्मा रो 'टाबर टोळी', राजेन्द्र स्वर्णकार रो 'शस्वरं, अंकिता पुरोहित रो 'कागदांश', किरण राजपुरोहित 'नितिला' रो ''सिणगार', 'भोर की पहली किरण', संतोष पारीक रो 'सांडवा', अजय परलीका रो 'भटनेर'अर राजस्थानी गीतों रो संग्रह 'बुगचो', दुलाराम सहारण रा 'हरावळ', 'साहित्यकार दर्शन', 'आगीवांण', 'हेलो' अर 'पोथीखानो', नंद भारद्वाज रो 'हथाई', पुखराज जांगिड़ रो 'जय रामधनी', मोनिका शर्मा रो 'तीज तैंवार' अर 'मेरी परवाज', शिवराज गूजर रो 'सिनेमा फेस्टिवल' अर'मेरी डायरी', हरीश बी. शर्मा रो 'मरूगंधा', अलबेला खत्री रो 'म्हारो प्यारो राजस्थान' , उम्मेद गोठवाळ रो 'अभिव्यक्ति' , कुमार गणेश रो 'रेजगार', चैनसिंह शेखावत रो 'मायड़ रो गोथळियो', जोगेश्वर गर्ग रो 'गूंगै रा गीत'  , सोहनलाल रांका रो 'कवि सहज' , डॉ. मदन सैनी रो, डॉ. मंगत बादल, राजूराम बिजारणियां, कविता किरण, राजेश चड्ढ़ा, अर कई लोगां नैं अपने अपणे नामां सूं भी ब्लॉग बणा राख्या है।, हरीश भादाणी, किशोर पारीक, कृष्णा कुमारी, चंद्र प्रकाश देवल, निशांत, पुरूषोत्तम यकीन , बिहारी शरण पारीक , मणि मधुकर, मनोज कुमार स्वामी , मालचंद तिवाड़ी , रामेश्वर गोदारा 'ग्रामीण' , लीटू कल्पनाकांत और भी कई इसां ब्लॉग होगा जिके बारे में मने जाणकारी कूनी है। 
इंटरनेट पर राजस्थानी भाषा री मूल रचनाएं
री  पत्रिकाओं में रोजाणा छपती रहवै है।  जिणमें है। - 'हिन्दी कविता कोश' , नरेश व्यास रा 'आखर कलश', प्रेमचंद गांधी रा 'प्रेम का दरिया', रविशंकर श्रीवास्तव रा 'रचनाकार' राजस्थानी भाषा री  मान्यता सूं  जुड़्योड़ा मुद्दा पर चर्चा रा ब्लॉग भी हैं। जिणमें- कुंवर हनवंतसिंह राजपुरोहित रा 'मरुवाणी' अर 'म्हारो मरुधर देश', विनोद सारस्वत रा 'मायड़ रो हेलो', सागरचंद नाहर रा 'राजस्थली', अजय कुमार सोनी रा 'मायड़ रा लाल',अर 'राजस्थानी रांधण', राजस्थानी गीत गायक प्रकाश गांधी अर जितेन्द्र कुमार सोनी रा भी राजस्थानी भाषा मांय ब्लॉग हैं।
राजस्थान र बारै में पुरी जानकारियों नं राजस्थानी भाषा मांय प्रस्तुत करने वाली प्रमुख वेब साईट- 'आपांणो राजस्थान' है, जिणने इसरो रो पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्र सिंह पोकरणा चलावै है। इंटरनेट पर कई गांवों का भी ब्लॉग हैं जो राजस्थानी में हैं- सत्य दीप
रो 'मेरो गाँव', रतन सिंह शेखावत रो 'मेरा गांव भगतपुरा' इंह ब्लाग क मायं राजस्थानी भाषा रा गीत अर विडियो गाणा है। अंकित बूबना जी रो फतेहपुर शेखावाटी रो ब्लॉग,इंह ब्लॉग मं फतेहपुर शहर री सगळी ताजा जानकारीया हिन्दी अर राजस्थानी में समय समय पर पुगती रहवै है।, जितेन्द्र कुमार सोनी "प्रयास" रो मुळकती मांटी, अजय कुमार सोनी रो बुगचो विनोद सारस्वत रो मायड़ रो हैलो रो अयाळका और भी भौत ब्लॉग लिख्या जा रया है। इण सारा ब्लागा रा लिंक मैने अजयकुमार सौनी र ब्लॉग  रांधण सं मिल्या है।
मेरी तरफ सूं इंण राजस्थानी भाषा की शांन बढ़ावण हाळा लेखका नै घणो घणे धन्यवाद


आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

रोज सुबह की मस्ती खरगोश के बच्चों के साथ, लक्ष्य

 

चलायें अपनी मर्जी से अपने कम्प्यूटर की विन्डोज

 बालाजी के आशीर्वाद के साथ लक्ष्य का दुसरा जन्म दिन

बेचारा जमींदार झेल रहा सर्दी और सरकार की मार

  सोनू की जिद और नाहरगढ़ दर्शन,जयपुर

मेरे बाप पहले आप( लक्ष्य का बाल हट )


Friday, March 30, 2012

बेचारा जमींदार झेल रहा सर्दी और सरकार की मार

आजकल लावनी (फसल कटाई) का समय चल रहा हैं पर इस बार बेचारा किसान जमींदार वर्ग मन मार कर (बेमन) से सरसों की फसल की कटाई का कार्य कर रहा हैं कारण है पिछले दिनों पड़ी सर्दी के कारण सरसों की फसल पूर्णतया बर्बाद हो गयी हैं सर्दी की मार इतनी तेज थी कि बड़े बड़े लगने वाले ये सरसों के खलियान बिलकुल अनाज सरसों से रहित है। इनमें कुछ भी नहीं निकल रहा है। सिवाय धोखे के और इस फसल को पालने के लिए बेचारे किसान ने दिन रात एक कर दिये और दो दिन की सर्दी ने पुरी पकी पकाई फसल को बर्बाद कर दिया किसान ने कितनी मेहन करके इस फसल की बुवाई की फिर इसे पानी से सिचा और अंत में भगवान ने ये अंजाम दिया पर वो कहावत सही हैं जब पालन हार ही रूठ जाता हैं तो कोई क्या कर सकता है। और इस सरसों को काटने के लिए मजदूरी देनी पड़ रही हैं सो अलग से। और कुछ तो सरकार ने बिजली सप्लाई घटा दी और फिर सर्दी का प्रकोप , सरकार को भी यह बात पुरी तरह पता हैं सरकार ने कहा गिरदावरी होगी और मुआवजा मिलेगा पर न तो गिरदावरी हुई और नही मुआवजा मिला बेचारा किसान वर्ग मन मार कर रह गया ।सरकार को को मुआवजा देना चाहिए था पर नहीं दिया भई सरकार हैं दे तो दे नहीं तो नहीं
अब इस वर्ग की निगाहे सिर्फ गेहूं की फसल पर टिकीं हैं कि कहीं वो बर्बाद नहीं हो जाये नहीं तो खाने के लाले पड़ सकते हैं 
वही बात हुई थाली में डालकर सामने से थाली छिन लेना भगवान की मर्जी के आगे किसकी चल सकती हैं

इस बार मावठ नहीं होने के कारण चने की फसल भी नहीं हुई हैं




सरसों के साथ साथ सर्दी की मार जौ के फसल को भी झेलनी पड़ी हैं कुछ प्रतिशत फसल जौ की भी बर्बाद हो गई है जो अब लावणी आयी हुई हैं 










आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

  परण्या नाचण दे फागण मै काळजो बळ बळ गावे रे...

सोनू की जिद और नाहरगढ़ दर्शन,जयपुर

   

 

ये काटा वो मारा के साथ बगड़ की मकर-संक्रांति

 

 

 

नव वर्ष 2012 की हार्दिक शुभकामनाएं, मालीगांव

मेरे बाप पहले आप( लक्ष्य का बाल हट )

कड़ाके दार सर्दी घने कोहरे के साथ,मालीगांव

 

 

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