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Wednesday, February 5, 2020
सरसों की फ़सल परवान पर ,मालीगांव
Monday, August 20, 2018
आपा डोलर में हिडांगां आपा चकरी मैं बैठांगा मेला बगड़,लक्ष्य के इंजॉय के कुछ

बगड़ व आस पास के गांवों के लोगो के लिए खुश खबरी बगड़ के श्याम मंदिर के
सामने ग्राउंड में रक्षाबंधन ओर जन्माष्ठमी के त्योहारों को मध्यनजर रखते
हुए मारवाड़ हैंडी क्राफ्ट एवं उधोग मेले का शुभ आरंभ आज शाम 7 बजे हो चुका
है ये मेला 3 सितम्बर चलेगा ये मेला इंडियन मीडिया जर्नलिस्ट यूनियन
झुंझुनू के तत्वावधान में लगाया गया है इसे लगवाने में सहयोग भाई विजेंद्र
मेहता यूनियन के राजस्थान प्रदेश इकाई के प्रदेश सचिव तथा बलदेव जी सैनी का
है इस मेले में आपको एक ही छत के नीचे कई प्रकार की वस्तुएं
खरीदने व देखने को मिलेगी जिसमे घरेलू सामान ,चाट व खाने पीने का आइटम
खासकर औरतों की जरूरत सम्बन्धी खरीदारी का समान बच्चों के खिलौने व उनके
कपड़े आदि उपलब्ध रहेगा। मेले का विशेष आकर्षण बच्चों के कई प्रकार के
छोटे बड़े झूले है जिनमे बच्चें झूलकर आनन्द ले सकते हैशहरों में वैसे तो ये झुले मेले आम हो गये हैं पर गांवों में इनका क्रेज अभी भी बाकी है। लोग बड़े चाव से मेला देखने आते हैं और बच्चों को झुले दिलवाने के लिए साथ लाते है। और गांव की औरते भी चकरी डोलर हिण्डे में हिडंने के लिए ललायत रहती है।
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| हेलिकाप्टर झुले का आनन्द लेते हुए बेटा लक्ष्य |
बगड़ मेले में बेटा लक्ष्य विभिन्न प्रकार के झूलो में झूलते हुए ओर पानी मे बोट चलते हुए लक्ष्य के इंजॉय के कुछ पल।
आप घूमे की नही मेले में ??
हेलिकाप्टर झुले का आनन्द लेते हुए बेटा लक्ष्य
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| हेलिकाप्टर झुले का आनन्द लेते हुए बेटा लक्ष्य |
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| जीफ गाड़ी झुले का पर मस्ती करते हुए बेटा लक्ष्य |
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| पानी में नाव /बोट चलाने का मजा लुटते हुए बेटा लक्ष्य |
पानी में नाव /बोट चलाने का मजा लुटते हुए बेटा लक्ष्य
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| बाईक झुले का मजा लेते हुए |
बाईक झुले का मजा लेते हुए
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| बाईक झुले का मजा लेते हुए |
मेले का एक नज़ारा एक झलक पेश है
सावन सुरंगी आई तीज तीज की हार्दिक शुभकामनाएं
राजस्थान का मेवा फल सांगरी स्वाद बे मिशाल
राजस्थान का गौरव कल्प वृक्ष कहा जाने वाला वृक्ष खेजड़ी (जांटी) है खतरे में ??
शीतला सप्तमी क्यों मनाई जाती है एक दन्त कथा
लक्ष्य
Monday, May 22, 2017
शेखावाटी का प्रसिद्ध रसदार खाद्य फल,पील
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| जाळ का फल पील |
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| जाळ का फल पील |
क्या आपने खाया है इसे कभी ? किस किस ने खाया है? मैंने तो बहुत बार खाया है और आज भी सुबह सुबह आनंद ले रहा हु इसका। अब इसके बारे में बतात हूं जितना मुझे पता हैं जो जानकारी मकुझे बडै बुढ़ो से मिली है उसी के हिसाब से बता रहा हूं
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| जाळ का फल पील |
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| जाळ का पेड़ |
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| को खाकर आनन्द लेते हुए मैं |
गांवों के बच्चे और औरते इसको पेड़ पर चढ़कर तोड़ते हैं और इसे इकट्ठा करने के लिए लोटे व केंतली का इस्तेमाल लिया जाता है। लोटे के मुह पर रस्सी बंधी जाती हैं और फिर लोटे व केंतली को गले में डाला कर पील तोड़ी जाती है।
सबसे अंन्त में इसे खाने का तरीका
इस मीठे रस भरे इस फल के खाने की सबसे बड़ी खासियत है
दोस्तो इसे खाने का तरीका भी अलग ही है इसे बहुत ही सावधानी के साथ खाना पड़ता है। अन्यथा आपकी जीभ कट सकती है जीभ पर फाले हो जाते है। इसे आप एक एक करके नहीं खा सकते अन्यथा अपकी जीभ छिल जाती है। इसे एक साथ आठ-दस दाने मुंह में डाल कर खाना पड़ता है। यानि एक फांका (कई सारे दाने) एक साथ खाना पड़ता है।
तो दोस्तो जब कभी आपको ये फल खाने को मिले सावधानी से खाये ,और आशा है आपको ये जानकारी रोचक लगी होगी ।आज के लिए इतना ही फिर मिलते है ब्रेक के बाद.....
खेजड़ी वृक्ष की महिमा जो आज खतरे में है....
राजस्थान का गौरव कल्प वृक्ष कहा जाने वाला वृक्ष खेजड़ी (जांटी) है खतरे में ??
शीतला सप्तमी क्यों मनाई जाती है एक दन्त कथा
गुली डंडा का खेल में ( एक आंचलिक कविता)
31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा
लक्ष्य
Thursday, January 5, 2017
गुली डंडा का खेल में ( एक आंचलिक कविता)
बस बैठे यू ही बचपन की पुरानी बात यात आ जाती है कुछ बाते ऐसी होती है जो कभी भुलाई नही जाती स्वत: ही याद आ जाती है। वो बचपन का खेल.. कूद.... वो पुरे दिन की मोज- मस्ती... जब यादआते है तो ऐसा लगता है मानों अब हम कहा फंस गये वो दिन बहुत ही अच्छे थे।
मोबाईल उमें गेम के अलावा कुछ जानती ही नहीं और वो जानना भी नहीं चाहती कारण क्या है ?? ये तो मुझे मालूम नहीं पर ऐसा देखा गया है। हा हमारे समय के बचपन के खेल और मस्ती के तरीको को किसी ने एक कविता में पिरोया जो मुझे तो बहुत अच्छी लगी सोचा आपके साथ शेयर करू
गुली डंडा का खेल में
लाला और कड़ा मांगता
चौमासा की बरसात म
खावण खातर गड़ा मांगता
डबक बिलाय म
आगला की कमर तोड़ देता
कुवा पर पानी की लड़ाई म
आगला को घड़ो फोड़ देता
और लड़ता भी तो क्यां खातर
मोरया की पांख खातर
बोरया की ढांक खातर
नीम्बू रास की फांक खातर
काकडी और मतीरा खातर
धोलो रंग क घुचर्या खातर
होल्या को धमाल
आथुणा बास म
चंग कोस र ल्याबा
की चर्चा अगुणा बास म
छाती चौड़ी हु ज्याति
फागण आत्त्त जात्त्त सियाला म
जद कोई धोती आलो
उतरतो कबड्डी पाला म
समझ कम अकड़ घणी
हर एक यार म
सर झुकतो तो खाली
दूल्हा बाबा की सुंवार म
कुड़तो कोनी दाबता पेंट म
कठै लागेड़ी कारी दिख ज्याति
म चुप जद थारी दिख ज्याति
तू चुप जद म्हारी दिख ज्याति
छींक साट्ट पुग ज्याव
उडीकनाला कण उडीकदार
बे डाकिया न रहया अब
बे कागद हुया बेकार
दो ही आदमी होता काम आला
क फौजी क आसाम आला
न ल्याव आगरा क पेठा
न ल्याव कश्मीरी अंखरुट
न जांण कद आव आसामी
हर कद जाव रंगरूट
मिनख बदलग्या
मिनख चारो बदल गयो
मॉडर्न बनबा क चक्कर म
गाँव सारो बदल गयो
बेशक बदलनो वक़्त क सागे
के पासी जो भाग गया वक़्त क आगे
सीख दयूं सब न
इतरी समझ कोनी बीरा
हाँ अलख जगातो जे होतो
कोई साधु संत या फकीरा
राजस्थान का गौरव कल्प वृक्ष कहा जाने वाला वृक्ष खेजड़ी (जांटी) है खतरे में ??
डरते डरते आ गया 2017! अब करो स्वागत और हटावो खतरा
31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा
लक्ष्य
Saturday, December 31, 2016
31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा
और आज साल का आखरी दिन भी कैसा गुजरेगा लोग ये भी मोदी पर ही निर्भर करते है। लोग 31 दिसम्बर की पार्टी को भूल कर आज 7 बजे उनकी अगली घोषणा पर को सूनने के लिए ही टीवी के आगे चिपके रहें गें क्या पता क्या नई घोषणा कर दे कहि फिर से लाईन में ...... नही..... नहीं...... सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते है।
इसलिए पार्टी की तरफ से ध्यान हटकर आज भी उनकी तरफ ही ध्यान है इसे उनका डर कहें या उनके प्रशंसक कहे ये तो आप ही अंदाज लगा सकते है। इसे जन तंत्र कहे या तानाशाह राजतंत्र ये फैसला भी मैं आप पर ही छोडता हूं और रही सही कसर आखिर में यूपी में पूरी हो गई बेटा बाप का बागी बन बैठा और बात ने बेटे को पार्टी से ही निकाल दिया एक मुख्यमंत्री को पार्टी से उसका ही बाप निष्कासित कर रहा हैं वाह रे राजनिति तुझे सलाम हैं ऐसे देश में क्या अच्छे दिन आ सकते है। मुझे तो नही लगता और आपको ? ऐसे तो इतिहास में पढ़ा और सुना था कि भाई भाई का दुश्मन बन बैठा और बेटा बाप का बागी हो गया और भाई ने भाई का कत्ल कर दिया वो भी कुर्सी के लिए पर वो बात समझ में आती है कि वो जा राजतंत्र था तानाशाह शासन था पर आज तो कहा जाने वाला जनतंत्र है आज भी ये सब क्यो ? जनतंत्र में तो सारा खेल जनता के हाथ में है किर भी ये लड़ाई क्यो मतलब साफ है आज भी जनतंत्र सिर्फ कहने मात्र के लिए है जनता पंगू बनी हुई हैं और डोर आज भी बप बेटो की मुट्ठी मे है। या फिर मोदी जी की घोषणा में
किसका काला धन सफैद हुआ, कितना काला धन आया, कितना नष्ट हुआ किनके पास आज भी नये नोट जमा है और कौन आज भी दर दर की ठोकरे खाने के लिए बेबस है। कीसकी सफाई से ये काला धन सफेद हुआ कौन कौन से बैंको के कर्मचारीयों द्वारा ये नया धन किन किन को जमा करवाया गया क्या ये कर्मचारी भारत सरकार के अधीन नहीं आते ? तो फिर क्या कार्यवाही हुई उनके खिलाफ ...?? इन सब पर कितनी भी चर्चा की जा सकती है पर आज साल का आखिरी दिन है सो ज्यादा न लिखते हुए आप पर ही छोडता हूं
आप सब बुद्धिजीवी है आप सब जानते हैं मैने तो साल भर की समिक्षा की बाकि आप सब जानते है क्या सही क्या गलत है ?
आज के लिए इतना ही मिलते है नई साल में इसलिए नई साल की अग्रीम शुभकामनाएं राम राम
राजस्थान का गौरव कल्प वृक्ष कहा जाने वाला वृक्ष खेजड़ी (जांटी) है खतरे में ??
कुछ दोस्त बहुत याद आते है..
लुप्त होती भारतीय संस्कृति- इसे बचाये पर कैसे ?
लक्ष्य
Wednesday, March 2, 2016
मरवण रा बोल ....राजस्थानी कविता
म्हरा नाँजोगा भरतार
मदछकिया मरवण रा ढोला आ कांई कुबद कमाई
थारै लारै आय र रोटी कदै ही न ताती खाई
म्हारा मूंछ्यांला मोट्यार
ईयूं किकर पङैली पार
दिन भर फिरै भटकतौ छैलो
थौथी करै छैलांया जी
करेंई जावे बीकानेर करेंई जावे जयपुर
10-10 दिन ताणी घरें कोनी आवे
जद भी पूछूं आ ही केवे
अबके ओ लास्ट धरणू है
म्हारा नाजोगा भरतार
म्हारी कियां पङैली पार
मीठा बोल कदै ई ना सुणिया
बटका भरता बौलै
आई वसुंधरा सरकार
कूदण लाग्यो नौ नौ ताळ
भरस ऐक बीत गियौ, अब उपजी है आस
करम कमाई भूल गा साल दियो गुजार
म्हारी ऐक अरज सुणज्यौ वसुंधरा सरकार
म्हारा पिया जी ने दैवो नौकरी जणां पङैली पार
नीतर आँ छोटा - छोटा टाबरां की लागेली हाय
Thursday, October 8, 2015
पहले ढंग से इन्सान तो बनो,हिंदुस्तान खतरे में है
ना मुसलमान खतरे में है,
ना हिन्दू खतरे में है
धर्म और मज़हब से बँटता
इंसान खतरे में है।।
ना राम खतरे में है,
ना रहमान खतरे में है
सियासत की भेट चढ़ता
भाईचारा खतरे में है।।
ना कुरआन खतरे में है,
ना गीता खतरे में है
नफरत की दलीलों से
इन किताबो का ज्ञान खतरे में है।।
ना मस्जिद खतरे में है,
ना मंदिर खतरे में है
सत्ता के लालची हाथो,
इन दीवारो की बुनियाद खतरे में है।।
ना ईद खतरे में है,
ना दिवाली खतरे में है
गैर मुल्कों की नज़र लगी है,
हमारा सदभाव खतरे में है।।
धर्म और मज़हब का चश्मा
उतार कर देखो दोस्तों
अब तो हमारा
हिन्दुस्तान खतरे में है |
एक बनो, नेक बनो
ना हिन्दू बनो ना मुसलमान बनो,
अरे पहले ढंग से इंसान तो बनो।।
Friday, July 27, 2012
मायड़ भाषा राजस्थानी री शान बढ़ावण हाळा ब्लॉग
राजस्थानी रा रचनाकारां रा मं ब्लॉग म ओम पुरोहित 'कागद' रा 'कागद हो तो हर कोई बांचै' रामस्वरूप किसान,रामस्वरूप किसान री राजस्थानी कहानियों रो ब्लॉग
संदीप मील रो 'राजस्थानी हाईकू' अर 'बहती धारा'
इंटरनेट पर राजस्थानी भाषा री मूल रचनाएं री पत्रिकाओं में रोजाणा छपती रहवै है। जिणमें है। - 'हिन्दी कविता कोश' , नरेश व्यास रा 'आखर कलश', प्रेमचंद गांधी रा 'प्रेम का दरिया', रविशंकर श्रीवास्तव रा 'रचनाकार' राजस्थानी भाषा री मान्यता सूं जुड़्योड़ा मुद्दा पर चर्चा रा ब्लॉग भी हैं। जिणमें- कुंवर हनवंतसिंह राजपुरोहित रा 'मरुवाणी' अर 'म्हारो मरुधर देश', विनोद सारस्वत रा 'मायड़ रो हेलो', सागरचंद नाहर रा 'राजस्थली', अजय कुमार सोनी रा 'मायड़ रा लाल',अर 'राजस्थानी रांधण', राजस्थानी गीत गायक प्रकाश गांधी अर जितेन्द्र कुमार सोनी रा भी राजस्थानी भाषा मांय ब्लॉग हैं।
राजस्थान र बारै में पुरी जानकारियों नं राजस्थानी भाषा मांय प्रस्तुत करने वाली प्रमुख वेब साईट- 'आपांणो राजस्थान' है, जिणने इसरो रो पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्र सिंह पोकरणा चलावै है। इंटरनेट पर कई गांवों का भी ब्लॉग हैं जो राजस्थानी में हैं- सत्य दीप रो 'मेरो गाँव', रतन सिंह शेखावत रो 'मेरा गांव भगतपुरा' इंह ब्लाग क मायं राजस्थानी भाषा रा गीत अर विडियो गाणा है। अंकित बूबना जी रो फतेहपुर शेखावाटी रो ब्लॉग,इंह ब्लॉग मं फतेहपुर शहर री सगळी ताजा जानकारीया हिन्दी अर राजस्थानी में समय समय पर पुगती रहवै है।, जितेन्द्र कुमार सोनी "प्रयास" रो मुळकती मांटी, अजय कुमार सोनी रो बुगचो विनोद सारस्वत रो मायड़ रो हैलो रो अयाळका और भी भौत ब्लॉग लिख्या जा रया है। इण सारा ब्लागा रा लिंक मैने अजयकुमार सौनी र ब्लॉग रांधण सं मिल्या है।

रोज सुबह की मस्ती खरगोश के बच्चों के साथ, लक्ष्य
चलायें अपनी मर्जी से अपने कम्प्यूटर की विन्डोज
बालाजी के आशीर्वाद के साथ लक्ष्य का दुसरा जन्म दिन
बेचारा जमींदार झेल रहा सर्दी और सरकार की मार
मेरे बाप पहले आप( लक्ष्य का बाल हट )
Friday, March 30, 2012
बेचारा जमींदार झेल रहा सर्दी और सरकार की मार

आजकल लावनी (फसल कटाई) का समय चल रहा हैं पर इस बार बेचारा किसान जमींदार वर्ग मन मार कर (बेमन) से सरसों की फसल की कटाई का कार्य कर रहा हैं कारण है पिछले दिनों पड़ी सर्दी के कारण सरसों की फसल पूर्णतया बर्बाद हो गयी हैं सर्दी की मार इतनी तेज थी कि बड़े बड़े लगने वाले ये सरसों के खलियान बिलकुल अनाज सरसों से रहित है। इनमें कुछ भी नहीं निकल रहा है। सिवाय धोखे के और इस फसल को पालने के लिए बेचारे किसान ने दिन रात एक कर दिये और दो दिन की सर्दी ने पुरी पकी पकाई फसल को बर्बाद कर दिया किसान ने कितनी मेहन करके इस फसल की बुवाई की फिर इसे पानी से सिचा और अंत में भगवान ने ये अंजाम दिया पर वो कहावत सही हैं जब पालन हार ही रूठ जाता हैं तो कोई क्या कर सकता है। और इस सरसों को काटने के लिए मजदूरी देनी पड़ रही हैं सो अलग से। और कुछ तो सरकार ने बिजली सप्लाई घटा दी और फिर सर्दी का प्रकोप , सरकार को भी यह बात पुरी तरह पता हैं सरकार ने कहा गिरदावरी होगी और मुआवजा मिलेगा पर न तो गिरदावरी हुई और नही मुआवजा मिला बेचारा किसान वर्ग मन मार कर रह गया
।सरकार को को मुआवजा देना चाहिए था पर नहीं दिया भई सरकार हैं दे तो दे नहीं तो नहींअब इस वर्ग की निगाहे सिर्फ गेहूं की फसल पर टिकीं हैं कि कहीं वो बर्बाद नहीं हो जाये नहीं तो खाने के लाले पड़ सकते हैं

सरसों के साथ साथ सर्दी की मार जौ के फसल को भी झेलनी पड़ी हैं कुछ प्रतिशत फसल जौ की भी बर्बाद हो गई है जो अब लावणी आयी हुई हैं






















