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Wednesday, May 12, 2010

राजस्थान रोड़वेज की लापरवाही कहें या भूल ?

पंचर टायर व बीना टूल के खड़ी बस
राजस्थान रोड़वेज की लापरवाही कहें या भूल ?

किसी ट्रक  चालक से टूल (रॉड़) मांगकर लाता रोड़वेज बस का चालक
हां दोस्तो एक आश्चर्य दिनांक 10 मई 2010 सोमवार मैं मेरे एक दोस्त मनोज को डिजिटल केमरा दिलवाने के लिए दिल्ली जा रहा था। हम दोनों प्रातः 4.25 बजे बगड़ कस्बे से राजस्थान रोड़वेज की दिल्ली जाने वाली एक बस में सवार हो गये। बस जब रेवाड़ी व धारूहेड़ा के बीच में पहुंची तो बस का टायर पंचर हो गया यह कोई आश्चर्य की बात नहीं अमुमन सफर में एसा हो जाता है आश्चर्य तो तब हुआ जब बस के परिचालक व चालक महोदय भी सभी सावारियों की तरह बस से नीचे उतर कर बैठ गये? पुछा गया तो बताया की बस में स्टेपनी व टायार खोलने के लिए टूल (रॉड वगैर) नहीं हैं। क्या करें? उनकी गल्ती भी क्या बेचारे बिना टूल के करते भी क्या यह तो रोड़वेज डिपार्टमेन्ट झुन्झुनूं की मेहरबानी है कि रूट 200-250 के लगभग लम्बा और स्टेपनी और टूल बस के साथ नहीं भेजते या भूल जाते है यह तो वे ही जाने फिर क्या था चालक महोदय ने दुसरे आने जाने वाले वाहनों के चालको को रूकवाने  और उनसे टायर खोलने  के टूल रॉड आदि मांगने की कोशिश शुरू कर दी लगभग आधा घंटे बाद एक ट्रक वाले ने अपना टूल रॉड वगैर रोड़वेज  डिपार्टमेन्ट के चालक को दी और तब जाकर टायर खुल पाया। परिचालक से पुछा कि आगे अब क्या होगा तो पता चला की उसी टायर को पेंचर लगवायेंगे और फिर दिल्ली जायेगे लगभग 2-3 घंटे तो लग ही जायेगें। तब सवारिया दुसरी बसो में एडजेस्ट हो कर चली गई थी। और हम भी एक पिदे से आई राजस्थान रोड़वेज बस की छत पर बैठ कर अपना सफर तय कर पाये। तब हमें आश्चर्य हुआ कि रोड़वेज डिपार्टमेंन्ट कितना भुलक्कड या लापरवाह है। इतने लम्बे सफर की बस में स्टेपनी और टूल नसीब नहीं? इसे आप अपनी राय में क्या कहेंगे भूल? या लापरवाही ? ये तो आप ही जाने ? 

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