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Tuesday, January 15, 2013

विदेशी सैलानियो के संग मकर संक्रांति की मस्ती,बगड़



 घर पर बेटे लक्ष्य के साथ पंतंग बाजी का आनन्द उठाने के बाद मैं बगड़ आ गया वहा आकर मैं पीरामल गेट के पास जहां मेरी दुकान है उसी के पास  अपने परम मित्र संजय चौधरी डायरेक्ट" द रॉक हैल्थ कल्ब एवं डांस अकेडमी"  के घर गया वहां पर मैने देखा पहले से ही काफी दोस्त लोग मुकेश, ओमी एंड पार्टी आदि जोरदार साउण्ड के साथ नाचते गाते पंतग बाजी का आनन्द उठा रहे थे। फिर क्या मै भी शामिल हो गया उनके साथ मजा उठाने और रंग गया उनके रंग में वे लोग पंतग बाजी के साथ साथ म्यूजिक पर डॉस भी कर रहे थे। जिसके चित्र मैने अपने केमरे में कैद किये है।

पीरामल गेट के आस पास चारो तरफ लोग छतो पर चढ़े हुऐ थे और सभी ने अपने अपने घरों की छत पर साउण्ड सिस्टम लगा रखा था, और म्यूजिक के साथ सभी लोग पंतग बाजी का अन्नद ले रहे थे। आकाश में ये मारा वो काटा,  वो गई ,ये आई का शोर गुंज रहा था, लड़के ही नही इस मौहल्ले की लड़किया भी जमकर पंतग बाजी का मजा उठा रही थी चारो तरफ एक तरह से प्रतियोगिता का सा माहौल बना हुआ था हर कोई एक दुसरे की पंतग काटने की होड़ में लगा हुआ था वहीं गलियो में कटी हुई पंतगों को लुटने के लिए भी भागदोड़ करते बच्चे और उनका शोर मचा हुआ था। कुल मिलाकर माहौल बहुत ही खुशी का हो रखा था।



 लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ भाड और आनन्द का माहौल हमारी वाली छत पर ही नजर आ रहा था इसका एक कारण तो ये था कि हमारा साउण्ड सिस्टम बहुत तेज था क्योकि हमने डी. जे. वाले स्पीकर लगा रखे थे और दुसरा ये की वहा पर हमारी मित्र मंडली पुरी इकट्ठा हो रखी थी।  तभी वहां कुछ विदेशी सैलानी (अंग्रेज) लोग घुमते हुए आ गये, क्योकि पीराम गेट के पास जहां हमारी पंतग बाजी हो रही थी उसी के पास पीरामल हवेली होटल हैं जो नीमराना होटल की एक शाखा है बगड़ में ये ही एक हेरिटेज होटल हैं जहा अक्सर विदेशी लोग आते रहते हैं आज भी कई विदेशी लोग इस हौटल में ठहरे हुऐ थे जो घुमते हुऐ हमारी गली की तरफ आ गये और उन्होने काफी भिड़ भाड़ व तेज साउण्ड देखकर उपर आकर लुफ्त उठाने का आग्रह किया और वो भी हमारे साथ उपर छत पर आ गये और जमकर पंतग बाजी का लुफ्त उठाने लगे।


 पहले तो वे हम लोगों के साथ पंतग उडाते रहे और फिर म्यूजिक पर डांस भी किया वे लोग इस पंतग बाजी से बहुत खुश लग रहे थे उन्ही से मिली जानकारी के अनुसार वे लोग  सिंगर (गायकार) थे जो यहां अपने  किसी एलबम की साउण्ड रिकोर्डिग के सिलसिले में इस होटल में ठहरे हुए थे।  उनके साथ बैंगलोर  के कई हिन्दुस्तानी लड़के भी थे जो उनके साथ म्यूजिसियन (वाद्य यंत्र बजाने) का कार्य करने के लिए साथ आये थे और बतोर गाईड का कार्य भी कर रहे थे। 





उन्होने हमारे दोस्त लोगों के साथ फोटो भी निकाले और जगकर पंतग बाजी का मजा उठाया और इस त्यौहार के बारे में जानकारी भी ली

 वे लोग काफी समय तक हमारे साथ रहे , लगभग 2 घंटे  हमारे साथ बिताये और इस दौरान पंतग बाजी करते हुए म्यूजिक पर डांस मस्ती भी की तथा बेहद खुशी का अनुभव किया और सबसे गले मिलकर बधाई देते हुए विदाई ली ।                               
और यहां का माहौल बहुत ही सुनदर व आकर्षक लग रहा था।



इसके बाद मुझे मेरे मित्र शंकर लाल योगी को फोन आया और मैं  वहां से उसके घर जो जाटाबास में हैं उसकी तरफ चला गया वहां पर भी नजारा देखने लायका था आकाश रंग बिरंगी पंतगों से सजी हुई थी ऐसा लग रहा था मानो किसी चुन्दड़ी में रंगीन नंग पिरो दिये गये हो और वो ही शोर- गुल ये काटा, वो मारा ,वो लुटा ,वो गया, ये ये आया, और वहां पर भी मैने काफी समय तक पंतग बाजी का लुफ्त उठाया ।
        और ये आनन्द लेते सूर्य भगवान कब अस्त होते चले गये पता ही नहीं चला जब अंधेरा सा छाने लगा तब देखा कि सूर्य भगवान अपनी लालिमा लिये निले अम्बर की गोद में सोने जा रहे हैं तब हमने सूर्य भगवान को गोद में जाते समय की लालिमा के साथ आपना फोटो निकाला और अपने घर को विदा ली।




                                                                                          

आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

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