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Wednesday, March 2, 2016

मरवण रा बोल ....राजस्थानी कविता

म्हरा नाँजोगा भरतार
मदछकिया मरवण रा ढोला आ कांई कुबद कमाई
थारै लारै आय र रोटी कदै ही न ताती खाई
म्हारा मूंछ्यांला मोट्यार
ईयूं किकर पङैली पार
दिन भर फिरै भटकतौ छैलो
थौथी करै छैलांया जी
करेंई जावे बीकानेर करेंई जावे जयपुर
10-10 दिन ताणी घरें कोनी आवे
जद भी पूछूं आ ही केवे
अबके ओ लास्ट धरणू है
म्हारा नाजोगा भरतार
म्हारी कियां पङैली पार
मीठा बोल कदै ई ना सुणिया
बटका भरता बौलै
आई वसुंधरा सरकार
कूदण लाग्यो नौ नौ ताळ
भरस ऐक बीत गियौ, अब उपजी है आस
करम कमाई भूल गा साल दियो गुजार
म्हारी ऐक अरज सुणज्यौ वसुंधरा सरकार
म्हारा पिया जी ने दैवो नौकरी जणां पङैली पार
नीतर आँ छोटा - छोटा टाबरां की लागेली हाय

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