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Tuesday, April 26, 2011

जाट्यां को ही कोनी मिनखा रो भी जीवणों दुबर होग्यो, कारण यो जीव (लट,कातरो)

 जकल गांव क हर बुढ़ बुज़ुर्ग के मुण्डे स यो ही बात सुणन नै मिलरी हैं  "जाट्यां न तो खाई सो खाई इण लट (कातरो) तो मिनखा को भी जीवणों दुबर कर दियो"


अब थे  बताओं इतणा कातरा ने देख  के थारो इं गुदड़े पर सोवण न जी करसी के।
शायद राजस्थान और शेखावाटी का मिनख इं जीव सूं भली भांति जाणकार होगा।



यो छोटो सो जीव जो थानै फोटू में दिखरयो है यो ज्यादातर शेखावाटी र इलाके में ही ज्यादा पायो जावे हैं और इने लट (कातरों) बोल्यों /कहयो  जा है।  इं रो विज्ञान को के नाम है यो तो मैं कुनी जाणू पर इतणे जाणू हूं कियो जीव है बड़ो ही खतरनाख  यो पुरी की पुरी हरी लूंग (पत्तीयों) की जांटी (खेजड़ी ) न एकदम चट कर जावे हैं और एकदम सुखी बणा दे है।
यो जीव आजकल घरां में गुदड़ा, खाटली, और कमरा में अपणों डेरो जमा राख्यों है।रात नं जद देखा तो कमरा की छात के कमरां का कुणा के गुदड़ा, डांगरा की लास,  किवाड़ क लारने घणों घणों भेळो होयड़ो मिले हैं  
 इं जीव रो प्रकोप आजकल म्हारे गावं मालीगांव  में भोत ही ज्यादा होरयो है
यो जीव आजकल जांट्या के साथ साथ मिनखा रो भी जीवणों खराब कर राख्यों है यो जीव ठण्ड मं तो लूंग खा अर तावड़े मं घरां में आकर  भेळो हो जावे है
 यो एक प्रकार सूं जहरीलो किड़ो है जै अगर यो कोई माणस क शरीर पर फिरज्या जो पुरे शरीर पर खुजली चाल ज्या और  फदेड़ा सा फदेड़ा( एलर्जी)सा हो जावे है ,इंजीव नै पैदा करण हाळो एक कीट (कातर हाळी फूदी) बताई जा वे है जो जांटियां के उपर अण्डा दैवे है और अण्डा भी एक कीट (फूदी) हजारा की संख्या में देवे है। जीं सू यो जीव पैदा हावे हैं यो जीव शरीर पर घुमते टाईम अपणे मुण्डे से एक अलग तरीक को लार (पदार्थ) शरीर पर छोड़ दे है जिसूं पुरे शरीर पर खुजली चाल जवे हैं और बिको इलाज प्राथमिक उपचार तो तुरंत ठण्डे पानी से नहाणे और सरसूं को तेल लगाणें सूं क्यू राहत मिलै है।  और बाद में डाक्टरी सलाह और दुआई ,
 यो छोटो सो जीव कैया अपणे मुण्डे सं इतनी बड़ी जांटी की लूंग नं ख जावे है यो ताज्जुब की बात हैं
  यो पैदा हावै है जो बिल्कुल ही छोटो सो होवै है जो निचे की फोटू में दिखायों हैं औ बाद में इंकी लम्बाई 3 इंच तक की हो ज्या है।
जियां फोटू मं जाट्या दिखरी है हरी भरी लहलाती जाट्या नं यो कैया सुखी बणा दी है लगभग जाट्यां सुख गी,किसान मजदूर की हमदर्द जांटी (खेजड़ी) की या हालत बणा दी है इं कातरं जीव।
 जाटीं न किसान की सच्ची दोस्त मानी जावे हैं  क्यूंकि जांटी ही किसान नं समय समय पर  सहायता देती रवै है जियां लावपणी के टाइंम छाया बाळण ने लकड़ी, पशुआ के चारे खातर लूंग  और खेत की माटी के कटाव ने रोके हैं,सांग सब्जी खातर सांगरी  और  खोखा देवे है। इं प्रकार किसान की भरपूर सहायता करे है या खेजड्री और इं नं यो बैरी खारहयो है। इंको कोई दवा या इंलाज भी कौनी बड्रा बुजुर्ग कहवै है कि यो तो तावड़े से ही मरगो नाही कौनी मरे इंकी कोई दवाई भी हाल ताई कौनी बणी।
लट कातरं की खायेड़ी बिचारी जाट्यां, अब कठे सूं आकं सांगरी लागेगी और कठे सूं लूंग होगी।

खाट री दावणा माई घुसी हुई लटें


हाथ पर घुमती छोटी लट

सं सूं छोटी लट
 इं लट को पतो भी कोनी चाले की कब फिरगी जद खुजली चाले जद पतो चालै की या तो अपणों काम करगी अब तो नहाणे ही पड़सी,रात नं जद सोवां तो मन मं विश्वास कर अर दुसालो ओड सो जावा कि फिरगी तो फिरती रहसी 

ओर के करा  पण ये कोनी डटे रातुं फिरबो करें  सोवणें भी दुभर होग्यो











सं सूं बड़ी लट

या ही म्हारें गावं री आप बिती  परेशानी अब भगवान ही जाणे इ सूं कद पिछो छुटसी बड़ा बुढ़ा एक बाद जरूर कह रिया है कि अबकी बार इं लटा ने देखता जमानों होणे का कम ही आसार हैं या कहावत पुराणी प्रचलित है कि जीकं साळ लट कातरों ज्यादा होवे उं साळ जमानों कौनी होवे। अब भगवान ही मालीक है।









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खादी का बोलबाला (कर्त्तव्यनिष्ठ, निष्पक्ष, निस्वार्थ भाव से कार्य बनाम तबादला) यह है जनतंत्र

कोहरे के मौसम में , इन्हे भी नहाने के लिए गर्म पानी चाहिए

 Maligaon शेखावाटी में होने वाली शादीयों के विचित्र रिवाज


 घमसो मैया मन्दिर धौलपुर एक शेषनाग फनी पर्वत और प्...


चर्चा दो ब्लॉगों की

Wednesday, March 30, 2011

दिनभर सड़कें रही सुनसान व दुकाने तरसी ग्राहक को कारण देखिए ?

  सेमी फाईनल महा मुकाबले का जुनून टेंट लगाकर देखा भारत पाक का महा समर  क्रिकेट मैच ,बगड़
 पीरामल गेट जहां मेरी दुकान है वहा आज प्रातः से ही टेंट लगाकर कुर्सिया जमाकर भारत पाक के सेमी फाईनल या  इस वर्ल्ड कप का फाईनल ही कहें इस मैच को देखने के लिए पुरी तैयारी कर ली गई थी

 और जनता यहां आराम से बैठ कर मैच का आंदन्द उठा रही थी  वहीं दूसरी तरफ दिन भर से दुकाने व सड़के सुन्न पड़ी साफ नजर आ रहीं थी सभी बस मैचे देखने लगे थे दुकानदार भी अपनी दुकाने छोउ़कर मैच देखने में मस्त थे, तालीया व सिटिया बजा बजा कर आनन्द में चार चांद लगा रहें थे।  भारत ने पाकिस्तान के सामने 261  रन का लक्ष्य रखा है। अब देखते है कि क्या भारत यह महा समर जितता है या नहीं ?


सुनसान पड़े बाजार का एक दृश्य ग्राहक को तरस रही दुकाने और सुन्न पड़ी सड़क और साईड में खडै मैच देखने वाले लोगों के वाहन








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 "हेलो आयो रे बाबा श्याम बुलायो रे" बाबा श्याम की मन मोहक झांकी ,बगड़

वेलेंटाईन्स डे की बधाईयां

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Monday, March 21, 2011

होली की मस्ती और रंग गुलाल के संग फिर हम कैसे पिछे हटने वाले थे ? लक्ष्य

 आप सभी को मेरे नन्हें 11 माह के  बेटे लक्ष्य की तरफ से  रंगों के त्यौहार होली की चरण स्पर्श सहित प्यार भरी राम-राम  व मेरी तरफ से आपके परिवार सहित आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं


कल  की होली यानि धुलंडी गांव Maligaon मालीगांव में बड़ी धूम धाम से मनाई गई सुबह- सुबह लोग घरों में जाकर एक दूसरे से   स्नेह मिलन यानि राम रूमी करते नजर आये  और  9- 10 बजे के करीब शुरू हुआ रग खेलने का सिलसिला जो दोपहर तक चला  सभी के चेहरे एकदम कलर फूल नजर आ रहें थे और बच्चे टोली बनाकर रंग खेलकर होली का आनन्द उठा रहें थे जहां जहां भी ये टोली जाती वहां चारों तरफ रंग बिरंगी रगं वातावरण में उडतें नजर आ रहें थे लोगों ने दोपहर तक खूब मस्ती की  तो इस कार्य में मेरा बेटा लक्ष्य भी कहा पिछे रहने वाला था हालाकि वह महज 11 माह का ही हैं लेकिन वह भी प्लेट में रखे रंगों को अपने उपर डालने लगा और हंसने लगा मैने ये दृश्य अपने केमरे में कैद कर लिया,लक्ष्य ने खेली 11 माह की उम्र में ही अपनी पहली होली।



 पने उपर रंग लगाकर फर्स पर घुमता लक्ष्य




लक्ष्य के इन चचेरे भाईयों ने भी खेली लक्ष्य के संग रंगो की होली






















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Wednesday, March 16, 2011

"हेलो आयो रे बाबा श्याम बुलायो रे" बाबा श्याम की मन मोहक झांकी ,बगड़

 बगड़, में बाबा श्री श्याम जी की मन मोहक झांकी
सभी पाठको, ब्लागर बन्दुओ को आने वाले रंगों भरे पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं
फागण का मस्त महिना चल रहा हैं फागण महिने का नाम सुनते ही मन  चंग और ढ़प  की थाप पर नाचने को करता है। गावं में जहा रात को ढ़प पर धमाल चलते है और नृत्य होता है। हालांकि आज कल बिते सालों वाली बात नहीं रही  हिन्दू संस्कृति के त्यौहार का ह्रास होता जा रहा है। फिर भी कुछ गांवों में ये  सब आज भी देखने को मिल जाता हैं,  



आज मैं आपको बगड़ नगरी में बाबा श्याम जी की बहुत ही सुन्दर और मनमोहक झाकी दिखाने जा रहा हूं जिसमें घोड़ी नृत्य ऊँट नृत्य के साथ ढ़प व चंग पर नृत्य प्रमुख था इसमें विभिन्न देवताओं की झाकिया भी सजाई, ये झांकि बगड़ के तिराहा स्टेण्ड निकट श्री श्याम मन्दिर से चलकर बी.एल. चैक बगड़ से होकर मैने बाजार में घूमकर वापस श्री श्याम मन्दिर तक पहुँची बहुत से श्याम भक्तो ने झांकी का लुप्त उठाया
मण्डावा की सुप्रसिद्घ चंग व ढ़प मण्डली द्वारा कई करतब दिखाये गये जैसे ढ़प पर चढ़कर नृत्य और बांसुरी की सुरीली आवाज जो हर किसी के मन को मोह सकती है। और वो नगाड़े  व ढ़प की गुज जो चारो तरफ का माहौल मद मस्त बनाती हैं जिस पर हर किसी का नृत्य करने का मन बनता है।


 विभिन्न देवताओं का रूप धरे ये बाल कलाकार वास्तव में हर किसी का मन मोह सकते हैं


 नंगाड़ा बजाता मण्डावा  मण्डली का कलाकार

 ढ़प और धमाल पर शेखावाटी की शान "साफा" लगाकर  नाचते भक्त  और कलाकार
 ढ़प के उपर नाचती मण्डावा फतेहपुर की कलाकार

 ढ़प व चंग की सुरीली आवाज पर  पर नाचते बगड़ के श्री  श्याम भक्त  और मण्डली के कलाकार

झांकी का लुप्त उठाता बगड़ नगर
ये दृश्य देखकर आपका भी  नाचने का मन कर रहा होगा, तो आ जाइये हमारे गांव जहां आज भी आपको पुराने जामाने की होली  देखने को मिलेगी
आज के लिए इतना ही  ---






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दुनिया में ऐसा भी होता है।

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