आज मकर संक्रांति का दिन है आज सवेरा मौसम काफी कोहरे भरा था सुबस सुबह 10 बजे तक काफी धुंध (कोहरे)भरा मौसम रहा, हाथ को हाथ दिखाई नहीं दे पा रहा था ऐसा लग रहा था कि आज तो पंतग बाजी का मजा ही किरकिरा होने वाला है।
पर सूर्य भगवान ने आखिर पंतंग प्रेमियों की सुन ही ली और 11 बजे जोरदार धूप निकल आई सब लोग चढ़ गये अपने- अपने पंतग और मांझा लेकर अपनी -अपनी छतो पर और आकाश में उडने लगी रंग बिरंगी पंतगें कोई इधर तो कोई उधर
और इस शुभ कार्य में मेरा बेटा लक्ष्य कहां पिछे रहने वाला था, मुझे कहने लगा " पापा मंनै भी पतग ला दे" तो मै उसके लिए स्पेशल पंतग लाया वो थे गैस से भरे गुब्बारे क्योकि पंतग तो वो अभी उडा नहीं सकता क्योकि अभी वो 2-3 साल का बच्चा ही तो है तो उसके लिए गैस के गुब्बारे ही पंतग बने ।
तो वो उसे ही पंतग की तरह उडाने लगा और मैने उसे कैद कर लिया अपने कैमरे में ,और वो अपने तरीके से आनन्द लेने लगा । और बेक-ग्राउण्ड म्यूजिक चलने लगा और वो भी एक सुपरहिट राजस्थानी गाना " पंतग उडा रे छोरा पतंग उडा"
और वो झुमने लगा ये थी मेरे बैटे की मकर सक्रंति और और फिरे मै चल पड़ा बगड़ नगर की तरफ क्योकि मुझै तो वहा पर जाकर पंतग बाजी का लुफ्त उठाना था
वहां पर मैने काफी दोस्तों के संग पंतग बाजी की जिसका सचित्र वर्णन मैं आपके सामने अपनी अगली पोस्ट में करूगां जहा मैने और मेरे दोस्तों सहित कई विदेशी सैलानियो ने भी जमकर पंतग बाजी का लुफ्त उठाया। तो अगली पोस्ट का करें इंतजार...
तब तक के लिए इजाज़त ....

पर सूर्य भगवान ने आखिर पंतंग प्रेमियों की सुन ही ली और 11 बजे जोरदार धूप निकल आई सब लोग चढ़ गये अपने- अपने पंतग और मांझा लेकर अपनी -अपनी छतो पर और आकाश में उडने लगी रंग बिरंगी पंतगें कोई इधर तो कोई उधर
और इस शुभ कार्य में मेरा बेटा लक्ष्य कहां पिछे रहने वाला था, मुझे कहने लगा " पापा मंनै भी पतग ला दे" तो मै उसके लिए स्पेशल पंतग लाया वो थे गैस से भरे गुब्बारे क्योकि पंतग तो वो अभी उडा नहीं सकता क्योकि अभी वो 2-3 साल का बच्चा ही तो है तो उसके लिए गैस के गुब्बारे ही पंतग बने ।
तो वो उसे ही पंतग की तरह उडाने लगा और मैने उसे कैद कर लिया अपने कैमरे में ,और वो अपने तरीके से आनन्द लेने लगा । और बेक-ग्राउण्ड म्यूजिक चलने लगा और वो भी एक सुपरहिट राजस्थानी गाना " पंतग उडा रे छोरा पतंग उडा"
और वो झुमने लगा ये थी मेरे बैटे की मकर सक्रंति और और फिरे मै चल पड़ा बगड़ नगर की तरफ क्योकि मुझै तो वहा पर जाकर पंतग बाजी का लुफ्त उठाना था
वहां पर मैने काफी दोस्तों के संग पंतग बाजी की जिसका सचित्र वर्णन मैं आपके सामने अपनी अगली पोस्ट में करूगां जहा मैने और मेरे दोस्तों सहित कई विदेशी सैलानियो ने भी जमकर पंतग बाजी का लुफ्त उठाया। तो अगली पोस्ट का करें इंतजार...
तब तक के लिए इजाज़त ....

Bahut badhiya, aise hi bap beta mauz karo.
ReplyDeleteमकरसंक्रांति की शुभकामनायें ......
ReplyDelete