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Wednesday, November 9, 2016

एक आदेश और आम जन परेशान देव उठने से पहले बाज़ार से उठ गई लक्ष्मी

 एक आदेश और दो दिन व पूरी आम जन जिन्दगी अस्त व्यस्त ।आज जिसके मुह से सुनो ये ही चर्चा और हाथ में ये ही 2 नोट  500 or 1000  देव उठने से पहले ही बाज़ार से उठ गई  लक्ष्मी

 आज से 500 और 1000 का नोट बंद ,घोषणा करना आम जन को पड़ रहा है भारी देव उठनी ग्यारस के अबूझ सावे पर अचानक की गई ये घोषणा अब शादी वाले घरो का जी का जंजाल बन गई है। बेचारो के घर में ये ही नोट अब शादी के लिए काम में लिए जाने थे और अब वो है मात्र कागज के टुकड़े। अब बतावो कैसे होगी उनकी व्यवस्था? उन्हें काटने पड़ रहे है चक्कर कैसे जरूरत का सामान लाया जाये और कैसे बाकि के काम निपटाए जाये


 साथ ही इस समय किसानो द्वारा इस समय फसल बुवाई का कार्य चल रहा है वो भी बिज़ खाद खरीदने के लिए परेशान हो रहे है अब कहा से लाये 100-100 के नोट तब जा कर मिले उन्हें खाद बिज़???
इसके साथ साथ और भी आम जन परेशान है आज सभी की पॉकेट में 500-1000 से कम का नोट नही मिलता तो कैसे उनकी जरूरत पूरी हो। दुकान वाले सामान नही ले पा रहे है बेचारे उद्दोगपति मजदूरो को मजदूरी नही दे प् रहे है। ध्याड़ी मजदुर जिनका चूल्हा भी डैली मजदूरी से जलता है आज दो दिन तक तो उनको भूखों मरने की नोबत आ गई
 मेरे हिसाब से ये एक जल्दबाजी में लिया गया गलत फैसला है एकाएक बंद नही करने चाहए थे और वो भी सवो की सीज़न और किसानो की बुवाई जुताई की सीज़न में
सब को कर दिया परेशान वाह जी  वाह!!

नया 500 का नोट
 नई चलित करेंसी (नया 2000 का नोट )






आपका क्या मानना  कहना है इस विषय पर ???











आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

देवा ओ देवा गणपति देवा

 कुछ दोस्त बहुत याद आते है..

  मेह होग्यों भाया अब खेत बास्या (इस मानसून की सबसे तेज बारीश)

70 वें स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

 

लक्ष्य


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