सूचना

यह वेब पेज इन्टरनेट एक्सप्लोरर 6 में ठीक से दिखाई नहीं देता है तो इसे मोजिला फायर फॉक्स 3 या IE 7 या उससे ऊपर का वर्जन काम में लेवें

Sunday, January 15, 2023

मालीगांव आज जमी बर्फ़ सर्दी ने दिखाया अपना रंग

मालीगांव आज सर्दी भयंकर आज जमी बर्फ़ सर्दी ने दिखाया अपना तीखा रंग
नमस्कार पाठकों काफी दिनों बाद रूबरू होने का।मौका मिला है सबसे पहले 2023 नव वर्ष की आप सभी को परिवार सहित हार्दिक बधाई शुभकामनाएं फिर मकरसंक्रांति पर्व की भी हार्दिक शुभकामनाएं
आज सुबह उठे तो देखा पूरा बाहर पड़ा समान सफेद दिखाई दिया ये सफेदी और कुछ नही प्रकृति द्वारा बरसी बर्फ़ थी जो बाहर पड़े समान पर जमकर उसे सफेद बना रही थी इस बर्फ़ से छोटे कोमल पेड़ पौधों को पहुँचा नुकसान ।
सर्दी से मुरझाए पौधे
सर्दी में जमी बर्फ सरसो पे जमी बर्फ
आज के लिए इतना ही मिलते ह कोई नई खबर के साथ तब तक देखते रहिएगा आपका अपना ये ब्लॉग मालीगांव 


Sunday, May 8, 2022

मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

माँ 
सृष्टि का सबसे बड़ा ,सबसे पुण्य शब्द
"माँ" शब्द अपने आप में ही एक सुकून है, जिसे कहने मात्र से ही सारे दुःख, परेशानियाँ दूर हो जाती है, भगवान का दूसरा रूप है "माँ" l माँ के चरणों में ही है चारों तीर्थ है, माँ से ही है जीवन सार्थक है 
सभी को मातृशक्ति मातृत्व दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !👏
आज मेरी माँ की प्रथम पुण्य तिथि है एक साल पूर्व आज ही  8 मई 2021 के दिन ईश्वर ने मेरे सर से मेरी ममता छीन ली थी। मै अनाथ हो गया।
 माँ...........😭😭😭😭😭
किस्मत वाले होते ह जिनके माँ होती है.... 
माँ आप जहां कहीं भी हो अपना ममत्व ,प्यार और आशीर्वाद हमेशा मुझ और तुम्हारे परिवार पर हमेशा बनाये रखना।
हे!ईश्वर माँ की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दिए रखना।
आज ममता दिवस भी है आप सभी को ममता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 
"मेरी माँ को नींद से जगा दे कोई 
नहीं तो मुझको ही सुला दे कोई 
मुझको बिस्तर की आदत नहीं 
 माँ गोद में सुला दे कोई 
शायद जाग जाए मा मेरी 
रोना सुनकर
मुझे बेवजह ही रुला दे कोई 
उन जख्मो के निशान मिटा दे कोई 
मुझे चाह नहीं दौलत ए जमाने की 
बस माँ बाप का प्यार कही से ला दे कोई 
जो साया मेरे सर से  उठ चुका है 
मेरी माँ का वो साया मुझे लौटा दे कोई 
मुझे सिर्फ मेरी माँ से मिला दे कोई 
इस दर्द  से राहत दिला दें कोई 
मैने कई दिनों से कुछ खाया नहीं 
मुझे मोहब्बत की रोटी खिला दे कोई  
मुझे ख्वाईश नहीं मिले कुछ दुनिया से 
मुझे मेरी माँ से मिला दे कोई ...........
माँ 😭😭😭😭😭😭😭.........
तुम याद बहुत आती हो😭😭😭😭😭😭😭.....

Thursday, November 4, 2021

दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

 सभी देशवासियो,पाठकों को दीपावली 2021 की हार्दिक शुभकामनाएं

 दीपावली पर बगड़ में सुसज्जित बाजार और इस साल की दीपावली पर दुकानदारों का रिव्यू

सुख समृद्धि तथा एश्वर्य का प्रतीक पावन "दीपोत्सव" आपके लिए सपरिवार मंगलमय हो!
इस पर्व के शुभ अवसर पर आपको ढेर सारी शुभकामनाएं एवं उज्ज्वल भविष्य का कामना। 
आप व आपके परिवार के लिए यह पर्व हर्ष,उल्लास, खुशी ,उमंग के 
साथ  आए तथा प्रसन्नता अविराम आपके जीवन में 
सौदर्य मण्डित करती रहे। 
आने वाले वर्ष में आपकी और आपके अपनों की कीर्ति चहुं ओर फैले! 
आप जीवन में ऊँचाईयों को प्राप्त करें।
आपका जीवन सदैव उन्नति की और अग्रसर रहे
 इन्ही मंगल कामनाओं के साथ










" दीपावली मुबारक"
" दीपावली की हार्दिक बधाईयां "
" HAPPY DEEPAWALI "














क्रिकेट व आधुनिकरण ने ली आंचलिक (ग्रामीण ) खेलों की जान

पीपल के पेड़ से पद्मश्री पुरस्कार तक प्रकृति प्रेमी हिमताराम जी भाम्बू, हमारे भाम्बू परिवार व देश के गर्व

 

 6 फ़ीट ऊंचा पालक का पौधा मालीगांव



फाल्गुन मास,होली और धमाल,मोज़ मस्ती कहाँ गए वो दिन?सब कुछ बदल गया

 

भाम्बू गौत्र का इतिहास


मेरे बारे में ..



Tuesday, October 12, 2021

क्रिकेट व आधुनिकरण ने ली आंचलिक (ग्रामीण ) खेलों की जान

    सोच कर बहुत दुःखी होना पड़ता है कि हमारे देखते ही देखते हमारे आंचलिक (ग्रामीण) खेल जिनका विवरण नीचे किया जा रहा है लगभग लुप्त हो गये हैं। आजकल आप अपने बच्चों को स्कूली समय के बाद (छुट्टी )के समय में देखते है तो वह या तो कमरे के कोने में बैठा टी.वी पर क्रिकेट का भूल भुलैया गेम देख रहा होगा या कोई  बेतुकी नई फिल्म देख रहा होगा या कान से चलभाष संयत्र (मोबाइल) लगाकर बात कर रहा होगा। तथा कभी कभार देखेंगे की वह अपने दोस्तों के साथ तीन डण्डे लेकर और एक बैट लेकर मोहल्ले,गली या रोड़ के पास आज का प्रसिद्घ भूल भुलैया मैच क्रिकेट खेल रहा होगा। अगर उन बच्चों से हमारे ग्रामीण खेलों के नाम जैसे सतन तलाई,रसड़ी सितोलिया(पिट्टू), हड़दड़ा,राउण्डर बैट,गिल्ली डण्डा,(मोई डंका)रस्सा कस्सी,चौसर,चर -भर, आर तिला,आदि के बारे पूछा जाये तो उन्हें अचम्बा होगा की ये किस चिज के नाम है। क्योंकि उन्हें इनके बारे में मालूम ही नहीं है। और ये ऐसा हुआ ज्यादा समय नहीं बिता हमारे देखते ही देखते ये खेल लुप्त हो गये इसका जिम्मेदार कौन है ?  टी.वी, आधुनीकरण,या हम स्वयं ?
ये आप बुद्धि जीवी लोग ही बता सकते है। मुझे ये अपनी संस्कृति को ह्रास होता दिखाई दे रहा है
      ज्यादा से ज्यादा 20 वर्ष पहले ये खेल गांवों, की शान हुआ करते थे और गांव के लोगो के मनोरंजन के साधन हुआ करते थे। मुझे ज्यादा तो याद नहीं लेकिन जिन खेलों को मैने गांव के दोस्तों के साथ खेला है और उन्हें खेलते हुए देखा है उनके बारे में मैं आपको उनके नाम सहित जितना मैं जानता हूं बताउगा। और इस ब्लॉग पर लिखना चाहूंगा ताकि आगे आनेवाली पिढ़ीयों के लिए ये नाम मात्र ही जीवित रह सके नहीं तो लोग खेलों के साथ उनके नाम भी भूल जायेंगे।
    ब मैं स्कूल में पढ़ता था जब स्कूल की छुट्टी के बाद सभी लड़के गांव के चौक में या गांव के बाहर बड़े चौक में इक्कठे हो जाते थे और इन खेलों को खेलते थे बहुत आनन्द आता था। शायद आपने भी ये खेल खेले होंगे।अगर खेले है तो आपको इनके आनन्द के बारे में ज्यादा बताने की जरूरत ही नहीं है। दीपावली की छुट्टियों में गायें भैसे व अन्य पशु (रोही) खेतों में चराने जाते थे और  इन खेलों के साथ दिन भर मौज मस्ती किया करते थे। समय कब बीत जाता था पता ही नहीं चलता था। ऐसे ही होली से 1 माह पूर्व ही ‘‘अर तिला’’ ‘‘छुपम छपाई’’ खेल जिसको  दो टोलिया बनाकर रात को हम बहुत ही शोख के साथ खेलते थे खेलते खेलते कब सुबह के 3-4 बज जाते थे पता ही नहीं चलता था कभी कभी तो अपने गांव की सीमा से कई दूर दूसरे गांव की सीमा में भी छुपने चले जाया करते थे कितना आनन्द आता था ? यह तो जिसने खेला हो वो ही जानता है।
दोस्तों आज जब वो बाते याद आती है तो एक बार तो रोने को दिल करता है अपने यहां की हालात और बेबसी देखकर  मन बहुत ही दुःखी हो जाता है। और फिर वही सवाल उठ खड़ा हो जाता है इन सब का जिम्मेदार कौन है?
      लि खने को तो मैं ऐसे बहुत सी बाते लिख कर चाहे एक किताब पुरी कर सकता हूं  वे कितने सुनहरे पल थे  उनके बारे में एक किताब लिखू तो भी कम है।
होलियों के दिनों में लड़कियां रात भर गीत गाती थी और लड़के खेलते रहते थे।
      काश  मैं उस समय खेले जाने वाले खेलों के फोटो आपको दिखाता लेकिन क्या करू मेरे पास उस समय कैमरा नहीं था और किसे पता थ कि ये खेल आगे चलकर लुप्त ही हो जायेगें अगर किसी भी गांव या कही भी मुझे ये खेल अब भी खेलते हुए मिले तो मैं आपको उनके फोटो  फिर कभी जरूर दिखाउगां। अब मैं कुछ खेल जो प्रायः सभी गांवों में खेले जाते थे उनका नाम लिख रहा हूं अगर उन खेलों का नाम आपकी नजरों में कोई दुसरा हो या आपके पास भी कोई ऐसे खेलों  के नाम हों तो टिप्पणी में जरूर लिखियेगा।
1.    सतन तलाई    
2.    रसड़ी      ‘‘रस रसड़ी का खेल बड़ा सळिया लागें जूते बगावे दलिया’’   

3.    सितोलिया (पिट्ठू)   
4.    हडदड़ा (टोरा गिण्डी)
5.    मार धड़ी       
6.    राउण्डर बैट       
7.    गुल्ली डण्डा/ गिल्ली डंडा  /मोई डंका 
8.    कुराक डंका       
9.    गुथा गिण्डी
10.    रस्सा कस्सी
11.    टिग्गा,टीटा, गिटा,गिट्टा 
12.    घुण घुण मिंगणा
13.    अगदड़ बगदड़
14    चौसर (
चौपड़)
15.    चर भर
16.    आर तिला (छुपम छुपाई)
17.    कबड्डी
18.    घोड़ा कबड्डी
19    चंगा,चावर
20   टिप टॉप
21   डाकन डब्बा , तत्ती
22   लँगड़ी टाँग
23   सांप सीढ़ी
24   अगड्ड भगदड़ (आज का लूडो)
25    कंचा,गोली,अंटा
26   चोर सिपाई
27   चिड़िया उड़
28    मोसम्बा भई मोसम्बा
29    चर -भर
30    आँख मिचोली
  
अपडेट 2021
कुछ खेलो के फोटो मिले हैं जो आपके सामने पेश हैं


डाकन डब्बा , तत्ती

टिप टॉप




 टिग्गा,टीटा, गिट्टा 

गुल्ली डण्डा/ गिल्ली डंडा  /मोई डंका 

चोर सिपाई

आँख मिचोली

कंचा,गोली,अंटा

सांप सीढ़ी

 सितोलिया (पिट्ठू)

चिड़िया उड़

मोसम्बा भई मोसम्बा




न खेलों के नाम मैने मेरे भांजे साहिल मान व पारस मान को साथ बिठाकर उन्हें बताते हुए लिखें है। ताकि वो तो याद रख सके।
 मुझे तो ये ही नाम याद है अगर आपके पास हो तो जरूर लिखना और हो सके तो इन खेलों को दुबारा जिवन्त करने की कोशिश करना ताकि हमारी संस्कृति या हमारा आंचलिक अस्तित्व बना रह सके। और हमारें बच्चे भी गर्व से इन खेलों के बारे में अपने बच्चों या अगली पिढ़ी को बता सके कि ये हमारें ग्रामीण खेल है।
नहीं तो आने वाले समय में बच्चे कमरे के कोने में ही सिमट कर रह जायेंगे। या फिर क्रिकेट जैसा भूल भूलैया खेल इनके दिमाग .....

ये है पहला डिजिटल गेम वीडियो गेम



इसके बाद लुप्त होते गए आंचलिक खेल




पीपल के पेड़ से पद्मश्री पुरस्कार तक प्रकृति प्रेमी हिमताराम जी भाम्बू, हमारे भाम्बू परिवार व देश के गर्व

 

 6 फ़ीट ऊंचा पालक का पौधा मालीगांव



फाल्गुन मास,होली और धमाल,मोज़ मस्ती कहाँ गए वो दिन?सब कुछ बदल गया

 

भाम्बू गौत्र का इतिहास


मेरे बारे में ..


Thursday, October 7, 2021

नवरात्रि स्पेशल सभी को माता के नवरात्रों की शुभकामनाएं

देवी वन्दना
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 "सदा भवानी दाहिनी सन्नमुख रहत गणेश, पांच देव रक्षा करें बह्मा, विष्णु, महेश"
श्राद्ध पक्ष खत्म होने के बाद आज से ही मां दुर्गा के नौ रूपों की पुजा अर्चना का सौभाग्य हमें नवरात्रों के रूप में मिलता है।  नौ दिन तक हर किसी के मुख मण्डल से माता के जयकारे ही गुंजते सुनाई देते है। इन नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पुजा की जाती है। और उनसे शक्ति,सुख और समृद्धी जैसे अनेक मन वांच्छित वर (मन्नत)मांगे जाते है। वेदानुकूल तरीके  विधि से पूजा करने वाले भक्तों पर माता भगवती अपनी असीम कृपा कर उनके दुःख, भय, रोग, शोकादि दूर कर शक्ति और समृद्धि प्रदान मन वांच्छित वर प्रदान करती है।तथा अन्न धन के भण्डार भरती है।सभी देवी देवताओं की प्रार्थना और तीनों  महादेवों के अंश से प्रतिपादित  दुष्ट संहारक माता के  नौ रूपों को नव दुर्गा कहा गया जिनकी पुजा नवरात्र में की जाती है।
आजकल कोविड नियमों की अनुपालना के कारण बगड़ में जगह जगह  माता पंडाल नही सजते घरों में ही होती ह पूजा या बगड़ दुर्गा मंदिर में होती ह माँ की पूजा अर्चना।
अब मैं माता के नो रूपो के बारे आपको बताता हूं
जिनके अलग -अलग नौ नाम है।
मेरे साथ आप भी करिये जगत पालक ,संहारक मां के नो रूपों के दर्शन
1 शैलपुत्री - जो हिमालय की तपस्या और प्रार्थना से प्रसन्न हो कृपापूर्वक उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुई, 




 


2 ब्रह्मचारिणी  - सच्चिदानन्दमय ब्रह्मस्वरूप की प्राप्ति कराना जिनका स्वभाव हो, वे ब्रह्मचारिणी कहलाई.





 



         3 चंद्रघंटा  - आल्हाद्कारी चन्द्रमा जिनकी घंटा में स्थित हो, उन देवी का नाम चंद्रघंटा है.



 
 



4  कूष्मांडा त्रिविध तापयुक्त संसार जिनके उदार में स्थित हैं, वे भगवती कूष्मांडा कहलाई.




 




5 स्कंदमाता - भगवती शक्ति से उत्पन्न हुए सनत्कुमार का नाम स्कन्द है, उनकी माता होने से वे स्कंदमाता कहलाई.


 
 




6 कात्यायनी  -देवताओं के कार्यसिद्धि हेतु महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई, जिससे उनके द्वारा अपने पुत्री मानने से कात्यायनी नाम से प्रसिद्द हुई.


 



7 कालरात्रि - काल की भी रात्रि (विनाशिका) दुष्ट संहारक होने से उनका नाम कालरात्रि पड़ा ।




 



8 महागौरी - तपस्या के द्वारा महँ गौरवर्ण प्राप्त करने से महागौरी कहलाई।





 




9 सिद्धिदात्री - सिद्धि अर्थात सर्व सिद्ध कारिणी मोक्षदायिनी होने से सिद्धिदात्री कहलाती है।

अनेक प्रकार के  आभूषणों और रत्नों तथा अस्त्र शस्त्रों  से सुशोभित ये देवियाँ क्रोध से भरी हुई और और मन मोहक दिखाई देती हैं. ये शक्ति, त्रिशूल हल, मुसल, खेटक, तोमर,शंख, चक्र, गदा, परशु, पाश, कुंत, एवं उत्तम शांर्गधनुष आदि अस्त्र-शस्त्र अपने हाथों में धारण किए रहती हैं, जिसका उद्देश्य दुष्टों का नाश कर अपने भक्तों को अभयदान देते हुए उनकी रक्षा कर संसार  में शांति व्याप्त करना और मन वांच्छित वर, मुराद पुरी करना और अन्न धन के भण्डार भरती है। 



 माता आप सभी पर भी अपनी असीम कृपा बनाये रखे इन्हीं शुभकामनाओं के साथ इजाजत चाहुंगा




पीपल के पेड़ से पद्मश्री पुरस्कार तक प्रकृति प्रेमी हिमताराम जी भाम्बू, हमारे भाम्बू परिवार व देश के गर्व

 

 6 फ़ीट ऊंचा पालक का पौधा मालीगांव



फाल्गुन मास,होली और धमाल,मोज़ मस्ती कहाँ गए वो दिन?सब कुछ बदल गया

 

भाम्बू गौत्र का इतिहास


मेरे बारे में ..


अन्य महत्वपूर्ण लिंक

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...