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Monday, September 13, 2010

रंगारंग सांस्कृतिक भजन संध्या जिसने सबका मन मोह लिया

पीरामल गेट बगड़ के पास स्थापित श्री गणेश प्रतिमा स्थल पर आयोजित एक विशाल भजन संध्या यहा पर मैं पहले बता चुका हूं कि श्री माधोपुर के श्री विनोद छैला एण्ड पार्टी ने बहतु ही सुन्दर व शिष्ट भजनों तथा अपनी कॉमेड़ी द्वारा लोगों का मन लुभाया इनकी पार्टी में आई लेडीज कलाकारों ने बाबा के भजनों के उपर बहुत ही सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया जो कि फोटों में साफ दिखाई दे रहा है।
( हालाकि इन लेडीज कलाकारों का रोल अदा किया था लड़कों ने ) लेकिन कोई मजाल कि यह बता सके ये लड़कियां नहीं थी सारी जनता इन्हें लड़कियां ही समझ रही थी भई बात ही ऐसी थी उनमें एकदम लेडीज से मिलती आवाज और एकदम लडकियों से मिला ही उनका बदन और पहनावे को इस ढ़ग से पहना गया कि एक बार तो भगवान भी धोखा खा सकते थे ये दोनों कला कर किसी स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं लग रहे थे विशेष कर इन्ही कलाकारों ने इस हजारों की जनता का मन मौह रखा था
मोहते भी कैसे नही इनकी अदाये भी वास्तव में मानने लायक थी क्या कला थी इनमें ढोलक की थाप पर लचकता बदन बैंजो (वाद्ययंत्र) की झनक पर मटकती इनकी कमर तथा नयन और ये जो मुछल बाबा दिख रहे है न इनकी कॉमेडी का तो जवाब नहीं

मैं अगली पोस्ट में इनकी कॉमेडी की आपको एक विडियों झलक दिखाउगां इनकी कॉमेडी राजस्थान क्या लगभग पुरे भारत में प्रसिद्ध है। नृत्य कलाकारों तथा विनोद जी की कॉमेडी का ऐसा तालमेल बैठा की जनता

ने प्रातः 3 बजे तक हिलने का नाम तक नहीं लिया अगर आप भी इनका ये कार्यक्रम देखते तो आप भी दांतों तले अँगुली दबाने के लिए मजबूर हो ही जाते ये मेरा दाबा रहा । हालाकि कुछेक लोगों को ही पता था के ये कलाकर लेडीज नहीं लड़के है जो लेडीज की आवाज और वेशभूषा पहन कर अपनी अदाये दिखाकर लोगों का मन लुभा रहें है।
सब ने गणपति जी को मिलकर ऐसा रिझाया कि प्रातः 3.20 बजे इन्द्र भगवान को उनके स्वागत में बरसात करनी पड़ गई

आपको यह बता दूं कि यह दोनों प्रोग्राम हर वर्ष आयोजित किये जाते है। 
हर वर्ष अलग अलग पार्टियों द्वारा भजनों के कार्यक्रम करवायें जाते है।
रथ पर सजी महाराज गणेश जी की मूर्ति

वहीं दूसरी तरफ का नजारा भी कोई कम नहीं था वहां भी एक नन्ही सी लेडीज कलाकार ने सभी को अपनी मधुर कोकिल स्वरी आवाज से लुभा रखा था सभी बाबा के भजन तथा माता की  भेंट  बड़े ही सुन्दर भाव से बैठकर सुन रहे थे। ऐसा लग रहा मानो भजन रूपी  स्वरों की गंगा बह रही है और सब मग्न होकर उसमें डुबकी लगा रहे हों । लगाते भी कैसे नहीं माहौल ही ऐसा ही बना हुआ था।  कोई दुर्भाग्यशाली ही होगा यहाँ जिसने ऐसे मधुर आनन्द का मजा न उठाया होगा
तो अब मुझे दीजिए इजाजत कल मैं फिर हाजिर होउगा आपके सामने आज सांय 4 बजे इन्हीं दोनों प्रतिमाओ के तालाब विर्सजन की झांकी को लेकर मेरी यही कौशिस रहती जितना हो सके आप लोगों को भी यहाँ पर होने वाले हर कार्यक्रम की खबर आप तक पहुचाता रहूं आपके साथ शैयर कर सकूं मैं चाहूंगा आपका आशीर्वाद हमेश मेरे उपर बना रहें इन्ही आशाओं के साथ...

पेश अगली पोस्ट इन सब मन मोहक दृश्यों  की विडियों के साथ

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 गणपति बप्पा मौरया अबके बरस तूं जल्दी आ
रेगिस्तान का जहाज एक नये अंदाज में
साया
लक्ष्य

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