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Sunday, October 3, 2010

ये लो आप भी हंस दिये, हंसो .. हंसो .. हसंना अच्छी बात है।


आज कुछ लिखने का मुड ही नहीं बन रहा था सो इधर उधर की साइट देख रहा था तो  दैनिक भास्कर समाचार पत्र की साईट पर पढ़ते पढ़ते मुझे ये चुटकुले मिले पढ़कर मन गुदगुदाने को किया ये मुझे अच्छे लगे  सोचा आपके साथ ही शैयर कर लूं ,अगर दैनिक भास्कर या किसी को भी इन चुटकुलों से सबंधी कोई शिकायत या आपत्ति  हो तो कृपया सूचित कर देवे इन्हें यहाँ से हटा दिया जायेगा।


लालू ने दोस्त को लिखा खत

राबड़ी: का करत हो?
लालू: इक दोस्त को खत लिख रहा हूं
राबरी: पर तोहार लिखना तो आवे नाही
लालू: वो भी तो ससुरा पढना नहीं जानत


एक्सीडेंट हो जाए उससे पहले घर पहुंच जाओ
सरदार: ओ बन्नो कार की स्पीड इतनी क्यो बढ़ा दी?
बन्नो: ओ जी कार के ब्रेक फेल हो गए हैं, एक्सीडेंट हो जाए उससे पहले घर पहुंच जाते हैं।


गधे ने संता को लात मारी.

एक गधे ने संता को लात मारी और भाग गया। संता उस गधे के पीछे दौड़ा।
थोड़ी दूर दौड़ने पर उसे गधे की जगह जेबरा दिखने लगा। संता ने जेबरा को मारते हुए बोला साले ट्रैक सूट पहन कर मुझे धोखा दे रहे हो।

 हर्ज़ भी क्या है?
संता, बंता से- सुना है तुम अपनी बीवी के साथ बर्तन धोते हो?

बंता- हां इसमें हर्ज़ भी क्या है? वह भी सहयोग करती है, मेरे साथ खाना पकाती है।

तोहफ़ा मांगना शुरू

संता अपने जिगरी दोस्त बंता से- यार, कल एक ख़ूबसूरत लड़की से मेरी मुलाक़ात हुई। वह इतनी सुंदर थी कि मैं दीवाना हो गया और उससे आई लव यू कह दिया। बंता- बहुत दिलेरी दिखाई यार, वैसे लड़की ने क्या कहा? संता- लड़की बोली- मेरी चप्पल का साइज़ पता है क्या?

बंता- हूं.. इन लड़कियों के साथ यही दि़क्क़त है। ज़रा सी जान-पहचान हुई नहीं कि तोहफ़ा मांगना शुरू कर देती हैं।

आंखों के सामने अंधेरा

संता-बंता अफीम की पिनक में ट्रेन में जा रहे थे। सामने की सीट पर बैठे एक सहृदय यात्री ने उन्हें खाने के लिए केला दिया। संता ने केला छीलकर खाना शुरू किया ही था कि ट्रेन एक बोगदे में प्रवेश कर गई, चारों ओर अंधेरा हो गया।

बोगदे से निकलने के बाद फिर उजाला हो गया। तभी घबराए हुए संता ने बंता से कहा- केला मत खाना, इसमें कुछ गड़बड़ है। इसे खाने से कुछ देर आंखों के सामने अंधेरा हो जाता है।

 हे भगवान !
नर्सरी क्लास में छोटे बच्चों से पुछा गया भगवान कहां है? एक बच्चे ने जोर-जोर से हाथ हिलाया मुझे पता है!!टीचर ने कहाðअच्छा बताओ बच्चे ने बताया हमारे बाथरूम में

एक पल के लिये टीचर चुप! फ़िर संभलते हुए बोली तुम्हें कैसे पता?

बच्चा बोला रोज सुबह जब पापा उठते है, बाथरूम का दरवाजा पिटते हुए कहते है´´ - हे भगवान ! तुम अब तक अंदर ही हो!

 ऑटोमेटिकली क्या होता है?

बंता: यह बंता: यह ऑटोमेटिकली क्या होता है?
संता: ओए तेनु एह वी  नहीं पता, जब ऑटो में कोई गंजी लड़की जा रही हो तो उसे कहते हैं ऑटो-मे-टकली

सफेद जूता..
संता ने पहना एक काला एक सफेद जूता..

संता स्कूल में एक काला और एक सफेद जूता पहन कर आता है।
टीचर ने बोला संता घर जाओ और जूते बदल कर आओ
संता-टीचर कोई फायदा नहीं घर पर ही एक कला और एक सफेद जूता रखा है।


दूर खड़ा चिल्लाए..चाय चाय

काली सी सूरत, हाथों में केतली..
चायवाला: भोली सी सूरत, आंखों में मस्ती, दूर खड़ी शरमाए..अरे हाय
लड़की: काली सी सूरत, हाथों में केतली, दूर खड़ा चिल्लाए..चाय चाय



अबे बेवकूफ...भाग ले..

सूरज हुआ मद्धम, चांद जलने लगा, आसमां ये हाय,क्यों पिघलने लगा, मैं ठहरा रहा जमीं चलने लगी,धड़का ये दिल सांस थमने लगी, क्या ये मेरा पहला पहला प्यार है????
अबे बेवकूफ ..ये प्यार नहीं..भुकंप है..भाग ले।

संता का लड़का मेडिकल कॉलेज में..

संता: मुझे गर्व है कि मेरा लड़का मेडिकल कॉलेज में है।
बंता: सचमुच। वो क्या पढ़ने गया है?
संता: वो वहा पढ़ने नहीं गया बल्कि वहां डॉक्टर उसके विषय में पढ़ाई करेंगे।

संता गाना गा रहा था..
संता झाड़ में बैठ कर गाना गा रहा था। थोड़ी देर में वह पेड़ पर उल्टा लटक गया। दूसरे ने पूछा उल्टा लटक कर क्यों गा रहा है। संता बोल साइड बी गा रहा हूं.


जमाना बदल गया है..
एक युग था जब लोग घर के दीवार पर लिखते थे अथिति देवो भव:
फिर लिखा गया शुभ लाभ
और अब लिखते हैं कुत्तों से सावधान

गधे पर हेलमेट लगाना जरूरी नहीं

एक सरदार जी ट्रैफिक पुलिस का इंटरव्यू देने गए है।

इंटरव्यूवर: अगर एक आदमी गधे पर बैठ कर ऑफिस जा रहा हो और हेलमेट पहनना भूल जाए तो क्या आप उसे सजा देंगे?

सरदार जी: नहीं।

इंटरव्यूवर: क्यो?

सरदार जी: हेलमेट पहनना टू व्हीलर वालों के लिए जरूरी है फोर व्हीलर वालों के लिए नहीं
 बॉस तो मुझे होना चाहिए..
एक दिन ईश्वर एक इंसान को बना रहे थे। इस दौरान शरीर के अंगों के बीच बॉस बनने की जंग छिड़ गई। हर कोई बॉस बनने के लिए अपनी अपनी दलीलें पेश करने लगा।

दीमाग: मेरे नियंत्रण में तो पूरा शरीर रहता है, ऐसे में बॉस मुझे होना चाहिए।

पैर: नहीं..नहीं.. तुम तो बस सोच सकते हो वो मेरी मरजी है कि मैं तुम्हारी दिखाई दिशा पर चलूं या न चलूं बॉस मुझे होना चाहिए।

हाथ: अरे भई ! सिर्फ सोचने और चलने से तो कुछ नहीं होता मेरे छुए बिना तो कोई काम हो ही नहीं सकता। बॉस मुझे होना चाहिए।

आंखे: लेकिन जब तक मैं चीज को देखूं नहीं हाथ, पैर, दीमाग तुम लोग कोई भी काम का पता कैसे लगा सकोगे। ऐसे में बॉस की असली दावेदार मैं हूं।

इस तरह शरीर का हर अंग बॉस बनने के लिए अपनी अपनी दलीलें पेश कर रहा था। तभी एक आवाज आई.. बॉस मुझे होना चाहिए। यह सुनकर सब हंसने लगे एक ने कहा तुम्हें तो सिर्फ धड़कना आता है..और तुम कर ही क्या सकते हो।

दिल: दीमाग तुम बस सोच सकते हो, हाथ तुम बस छू सकते हो , आंखे सिर्फ देख सकती हैं और पैर सिर्फ चल सकता है। लेकिन यह सब मेरे दम पर ही तो हो रहा है। अगर मैने काम करना बंद कर दिया तो शरीर मर जाएगा और तुम सब बेकार हो जाओगे। ऐसे बॉस तो मुझे होना चाहिए।
 अब आप ही बताइए बॉस किसे होना चाहिए?


आपके पढ़ने लायक यहां भी है।

श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष में क्यों की जाती है, कौवे की मनुहार और आवभगत) ?

तैन कुण कहवै री काळी,

एक छोरी काळती हमेशा जीव बाळती

साया
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